Border 2: कौन हैं निर्मलजीत सिंह सेखों, जिनकी शहादत देख रो पड़ेंगे आप
Border 2 में दिलजीत दोसांझ ने फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों को जीवंत किया; परमवीर चक्र विजेता, 1971 युद्ध में श्रीनगर की रक्षा करते हुए शहीद
Border 2: फिल्म बॉर्डर 2 में दिलजीत दोसांझ ने एक ऐसे किरदार को जीवंत किया है जो सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि एक सच्चे वीर योद्धा को श्रद्धांजलि है। भारतीय वायु सेना के महान अधिकारी फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों के रूप में दिलजीत की परफॉर्मेंस ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। उनके संयमित और गरिमापूर्ण अभिनय ने इस किरदार को फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ बना दिया है।
Border 2: फिल्म का भावनात्मक आधार
बॉर्डर 2 (Border 2) में सेखों का किरदार कहानी का भावनात्मक केंद्र बनता है। युद्ध के रोमांचक दृश्य जहां जोश भरते हैं, वहीं दिलजीत की परफॉर्मेंस उन पलों में मानवीय संवेदनाएं जोड़ती है। सोनम बाजवा मंजीत के किरदार में नजर आती हैं जो प्रेम, प्रतीक्षा और त्याग की भावना को मजबूती देती हैं।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
निर्मलजीत सिंह सेखों (Border 2) का जन्म सत्रह जुलाई उन्नीस सौ पैंतालीस को पंजाब के लुधियाना जिले के इस्सेवाल गांव में हुआ था। उनके पिता मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे जिससे देशसेवा की भावना उन्हें विरासत में मिली। चार जून उन्नीस सौ सड़सठ को वे भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
उन्नीस सौ इकहत्तर युद्ध में वीरता
उन्नीस सौ इकहत्तर के भारत-पाकिस्तान युद्ध (Border 2) के दौरान सेखों ने Gnat लड़ाकू विमान उड़ाए। इस युद्ध में उन्होंने असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने एक पाकिस्तानी सेबर जेट को मार गिराया और श्रीनगर हवाई क्षेत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर को पाकिस्तान वायु सेना के अचानक हमलों के दौरान भी वे लगातार मोर्चे पर डटे रहे।
Border 2: श्रीनगर की रक्षा करते हुए शहादत
चौदह दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर का दिन भारतीय वायु सेना के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया। उस दिन छह पाकिस्तानी सेबर जेट्स ने श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला किया। विषम परिस्थितियों में भी सेखों ने उड़ान भरने का फैसला किया। उन्होंने अपने विमान को आसमान में उठाया और दुश्मन विमानों से भिड़ गए।
संघर्ष के दौरान उन्होंने दो सेबर जेट्स का सामना किया। घमासान हवाई युद्ध में वे वीरतापूर्वक लड़े। अंततः दुश्मन की गोलियां उनके विमान को भेद गईं और देश की रक्षा करते हुए वे शहीद हो गए। उनकी शहादत ने श्रीनगर एयरफील्ड को बचा लिया।
परमवीर चक्र से सम्मानित एकमात्र वायुसैनिक

निर्मलजीत सिंह सेखों (Border 2) को उनकी बेजोड़ बहादुरी के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। सेखों भारतीय वायु सेना के पहले और एकमात्र अधिकारी हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ।
अंतिम शब्द जो रुला देते हैं
सेखों की पत्नी मंजीत थीं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उनके अंतिम शब्द थे: “मुझे लगता है मुझे गोली लगी है, घुम्मन आओ और उन्हें मारो।” ये शब्द आज भी उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं। मृत्यु के क्षणों में भी उनके मन में सिर्फ देश की रक्षा का विचार था।
Border 2: फिल्म में सच्ची श्रद्धांजलि
बॉर्डर 2 (Border 2) में दिलजीत दोसांझ ने इस ऐतिहासिक वीरता को पूरी ईमानदारी के साथ पर्दे पर उतारा है। फिल्म की थिएटर रिलीज के बाद तेईस जनवरी को सनी देओल का सेखों के परिवार से मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह फिल्म एक सच्चे नायक को सम्मान देने का माध्यम बनी है।
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