बिहार में सरकारी अस्पतालों की तस्वीर 5 साल में पूरी तरह बदल जाएगी, जानें कैसे होगा विकास

PMCH बनेगा 5,500 बिस्तरों वाला एशिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल

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Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। अगले 5 साल में बिहार के सभी सरकारी अस्पताल पूरी तरह से बदल जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही बिहार के अस्पताल देश के सबसे अच्छे अस्पतालों में गिने जाएंगे। इस बड़े बदलाव से राज्य की 13 करोड़ जनता को फायदा होगा।

बिहार अस्पताल विकास – पिछले 20 साल में कितना बदला बिहार

साल 2005 में बिहार के अस्पतालों की हालत बहुत खराब थी। अस्पतालों में एक्सरे मशीन या खून की जांच जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। कई बार तो अस्पताल के बिस्तरों पर जानवर सोते दिखाई देते थे। लोगों का सरकारी अस्पतालों पर कोई भरोसा नहीं था। लेकिन जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने का फैसला किया।

बीते 20 सालों में बिहार का स्वास्थ्य बजट 705 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह करीब 28 गुना ज्यादा है। आज सरकारी अस्पतालों में 500 से ज्यादा दवाइयां मुफ्त में मिलती हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। साल 2006 में जहां महीने में सिर्फ 39 मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आते थे, वहीं अब यह संख्या 11,600 से ज्यादा हो गई है।

Bihar News: बिहार में नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खुलेंगे

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हर जिले में खुलेगा मेडिकल कॉलेज

बिहार सरकार ने हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य रखा है। अभी तक राज्य में 7 नए जिलों – किशनगंज, कटिहार, रोहतास, शिवहर, लखीसराय, अरवल और शेखपुरा में मेडिकल कॉलेज खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल बिहार में 15 मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं। इसमें से 12 राज्य सरकार के हैं और 3 केंद्र सरकार के हैं, जिसमें AIIMS पटना और ESIC मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं।

इसके अलावा 9 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी बिहार में हैं। अभी 20 मेडिकल कॉलेज और बन रहे हैं। ये कॉलेज जमुई, बक्सर, सिवान, आरा, वैशाली, बेगूसराय, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल और मुंगेर जिलों में बन रहे हैं। दरभंगा में एम्स भी इन प्रोजेक्ट में शामिल है। जब सभी मेडिकल कॉलेज बन जाएंगे, तो साल 2030 तक बिहार में 50 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे।

पटना मेडिकल कॉलेज बनेगा 5,500 बिस्तरों वाला अस्पताल

पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) का विस्तार किया जा रहा है। यहां 5,000 नए बिस्तर जोड़े जा रहे हैं। यह पूरे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल बनेगा। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) में 3,000 नए बिस्तर जुड़ेंगे। नालंदा मेडिकल कॉलेज में 2,500 बिस्तर और बढ़ाए जा रहे हैं। 5 और पुराने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी 2,500-2,500 बिस्तर जोड़े जाएंगे।

अधिकारियों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट से न सिर्फ बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि पुराने अस्पतालों पर भीड़ का दबाव भी कम होगा। अब तक अस्पतालों में मरीजों की बहुत भीड़ रहती थी और डॉक्टर मिलने में परेशानी होती थी।

Bihar News: डिजिटल तकनीक से आसान हो रही स्वास्थ्य सेवाएं

बिहार ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) में बिहार सबसे आगे है। राज्य के 92 फीसदी सरकारी अस्पतालों में अब ऑनलाइन OPD रजिस्ट्रेशन होता है। मरीजों को अस्पताल के बाहर एक QR कोड स्कैन करना होता है। इसके बाद वे सीधे डॉक्टर के पास जा सकते हैं। पहले मरीजों को 1 घंटे से ज्यादा समय लगता था। अब सिर्फ 45 मिनट में इलाज से लेकर दवाई मिलने तक का काम हो जाता है।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: पूरे राज्य की नजर रखता है कंट्रोल सेंटर

पटना में एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। यह सेंटर बिहार के सभी जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की रियल टाइम जानकारी देखता है। अगर कहीं कोई समस्या होती है, तो तुरंत अलर्ट मिल जाता है। हर जिले में भी छोटे कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। इससे बीमारियों के फैलने और मरीजों की जानकारी पर लगातार नजर रखी जाती है। अगर कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या आने वाली है, तो पहले ही तैयारी हो जाती है।

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के आंकड़े

साल 2005 में बिहार में 1,000 बच्चों में से 60 की मौत हो जाती थी। आज यह संख्या घटकर 27 रह गई है। मातृ मृत्यु दर 312 से घटकर 118 हो गई है। मतलब अब कम महिलाओं की डिलीवरी के समय मौत होती है। बच्चों का टीकाकरण 18 फीसदी से बढ़कर 90 फीसदी से ज्यादा हो गया है। साल 2005 में बिहार में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे। जल्द ही यह संख्या 42 हो जाएगी।

मुफ्त इलाज और दवाइयां

बिहार सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं:

  1. मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष: इस योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गरीब मरीजों को 1,500 करोड़ रुपये की मदद दी गई है। अब तक 2 लाख गरीब मरीजों को फायदा मिल चुका है।

  2. आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना: इस योजना में परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।

  3. दिल की बीमारी वाले बच्चों का मुफ्त ऑपरेशन: जिन बच्चों को जन्म से ही दिल में छेद या दूसरी बीमारी है, उनका मुफ्त में ऑपरेशन होता है। यह ऑपरेशन बिहार में या दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों में भी करवाया जा सकता है।

Bihar News: बिहार में डॉक्टर और स्टाफ की कमी को कैसे दूर किया जाएगा

फिलहाल बिहार में हर 2,600 लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक हर 1,000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। भारत में औसत 811 लोगों पर एक डॉक्टर है। बिहार में यह संख्या बहुत कम है। सरकार ने कहा है कि अभी 12,000 से ज्यादा स्टाफ नर्स की जरूरत है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर और दूसरे मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। इसलिए ज्यादा मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। MBBS की सीटें 2,870 से बढ़ाकर 5,220 की जाएंगी। यह 2030 तक हो जाएगा।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुधार

बिहार में सिर्फ 41 फीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में 4 बिस्तर हैं। सरकार ने कहा है कि अगले 24 महीने में यह संख्या 85 फीसदी तक ले जाई जाएगी। सबसे खराब काम कर रहे 100 ब्लॉकों में PHC को जल्दी अपग्रेड किया जाएगा। 2,000 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) और ANM की भर्ती की जाएगी।

अस्पतालों में दवाइयां खत्म होने की समस्या को दूर करने के लिए लाइव डैशबोर्ड बनाए गए हैं। इससे पता चल जाता है कि कौन सी दवाई कहां खत्म हो रही है। सरकार ने कहा है कि जरूरी दवाइयों की कमी को हर तीन महीने में 5 फीसदी से कम रखा जाएगा।

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं से रोजगार भी बढ़ेगा

स्वास्थ्य सेवाओं के विकास से बिहार में रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। साल 2047 तक इस क्षेत्र में 16 लाख लोगों को सीधे नौकरी मिलेगी। इसमें डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, कॉल सेंटर स्टाफ और दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 21 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यानी कुल मिलाकर 37 लाख लोगों को काम मिलेगा। इसमें दवाई बनाने वाली कंपनियां, लैब, मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियां, लॉजिस्टिक और दूसरी सेवाएं शामिल हैं।

Bihar News: बिहार का स्वास्थ्य बजट और आर्थिक विकास

बिहार सरकार ने 2025-26 में कुल खर्च का 6.6 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य पर लगाया है। यह देश के दूसरे राज्यों के औसत 6.2 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2017 में 8 फीसदी का लक्ष्य रखा गया था। सरकार ने कहा है कि अगले 3 सालों में इस अंतर को पूरा कर लिया जाएगा।

फिलहाल बिहार का स्वास्थ्य क्षेत्र 23 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये) का है। इसमें अस्पताल, दवाई, जांच, बीमा और दूसरी सेवाएं शामिल हैं। जैसे-जैसे स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ेंगी, यह क्षेत्र और बड़ा होगा। इससे बिहार के विकास को बड़ी मदद मिलेगी।

बीमा से भी मिलेगी मदद

बिहार में सिर्फ 3.6 फीसदी लोगों के पास प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस है। पूरे देश में यह औसत 15 फीसदी है। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीमा कवर दिया जाए। साल 2025 में 47 लाख लोगों के पास बीमा है। यह संख्या 2045 तक 2.35 करोड़ हो जाएगी। इससे परिवारों को बड़े मेडिकल खर्च से बचने में मदद मिलेगी। साथ ही, अस्पतालों को भी पैसा मिलता रहेगा और वे बेहतर सेवाएं दे सकेंगे। सरकारी और प्राइवेट बीमा योजनाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे अस्पतालों को पैसा मिलने में देरी नहीं होगी।

बिहार में गर्मी और बाढ़ से निपटने की तैयारी

बिहार में अक्सर तेज गर्मी और बाढ़ आती है। इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अस्पतालों में दवाइयां पहुंचने में दिक्कत होती है। बाढ़ के समय कई इलाकों में लोग फंस जाते हैं और उन्हें इलाज नहीं मिल पाता। सरकार ने कहा है कि अब मौसम की समस्याओं से निपटने की तैयारी की जा रही है। कंट्रोल सेंटर से मौसम की जानकारी पर नजर रखी जाती है। बाढ़ या गर्मी के समय पहले से दवाइयां और डॉक्टर की व्यवस्था कर दी जाती है। मोबाइल मेडिकल यूनिट भी भेजी जाती हैं जो दूर-दराज के गांवों में जाकर मरीजों का इलाज करती हैं।

Bihar News: बिहार में बच्चों और महिलाओं की सेहत

बिहार में 5 साल से कम उम्र के 43 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। 9.2 फीसदी बच्चे बहुत कमजोर हैं और 23 फीसदी का वजन कम है। पहले यह स्थिति और खराब थी। अब सरकार ने इस समस्या पर खास ध्यान दिया है। बिहार में 15 से 49 साल की 63 फीसदी महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) है। यह देश में सबसे ज्यादा है। कमजोर और एनीमिया से पीड़ित महिलाएं जब बच्चे को जन्म देती हैं, तो बच्चे का वजन कम होता है। इससे कुपोषण की समस्या और बढ़ जाती है।

सरकार ने महिलाओं और बच्चों के लिए खास योजनाएं शुरू की हैं। गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में आयरन की गोलियां दी जाती हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक खाना मिलता है। स्कूलों में मिड-डे मील की योजना भी चल रही है।

Bihar News: बिहार एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर

सरकार ने कहा है कि साल 2047 तक बिहार को एक ट्रिलियन डॉलर (84 लाख करोड़ रुपये) की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी भूमिका होगी। जब लोग स्वस्थ होंगे, तो वे ज्यादा काम कर सकेंगे और आर्थिक विकास में योगदान देंगे। स्वास्थ्य सेवाओं से सिर्फ बीमारियों का इलाज ही नहीं होगा। इससे लोगों की जिंदगी लंबी होगी और वे ज्यादा उत्पादक बनेंगे। बिहार में दवाई बनाने की कंपनियां भी खुलेंगी। मेडिकल उपकरण बनाने का काम बढ़ेगा। यह सब मिलकर बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।

निष्कर्ष

बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में बीते 20 सालों में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। जहां पहले अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं, वहीं आज बिहार डिजिटल हेल्थकेयर में देश में नंबर 1 है। अगले 5 सालों में और बड़े बदलाव होने वाले हैं। हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुलेंगे, बड़े अस्पताल बनेंगे और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ बीमारियों का इलाज नहीं हैं। यह बिहार के आर्थिक विकास की नींव हैं। जब लोग स्वस्थ होंगे, तो राज्य भी तरक्की करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के हर व्यक्ति को अच्छी और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। हालांकि अभी भी कई चुनौतियां हैं। डॉक्टर और स्टाफ की कमी है, कुछ इलाकों में अभी भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। लेकिन सरकार ने इन सब समस्याओं को दूर करने का प्लान बनाया है। अगर यह योजनाएं सही तरीके से लागू हुईं, तो बिहार के सरकारी अस्पताल देश के सबसे अच्छे अस्पतालों में गिने जाएंगे।

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