शादी का झांसा देकर युवती को बंगाल ले गए, मां की एक कॉल पर 500 KM दूर पहुंची पुलिस ने बचाया
पूर्वी चंपारण की युवती को शादी का झांसा देकर पश्चिम बंगाल के पंजीपाड़ा ले जाने का आरोप।
Bihar Human Trafficking: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से मानव तस्करी और धोखे की एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने रिश्तों और भरोसे को शर्मसार कर दिया है। प्रेम प्रसंग और शादी का झांसा देकर एक युवती को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया और फिर उसे पश्चिम बंगाल के एक कुख्यात रेड लाइट इलाके में बेच दिया गया। हालांकि, संकट के बीच पीड़िता द्वारा अपनी मां को की गई एक गुप्त और संक्षिप्त फोन कॉल ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। केसरिया थाना पुलिस ने त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए करीब 500 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के पंजीपाड़ा इलाके में सादे लिबास में एक बेहद साहसिक गुप्त ऑपरेशन चलाया और युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस मामले में पुलिस ने जालसाज मुख्य आरोपी को धर दबोचा है।
Bihar Human Trafficking: मां के पास आई बेटी की रोती हुई कॉल, कांपते हाथों से पहुंची थाने
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब एक असहाय मां रोते-बिलखते केसरिया थाने पहुंची। महिला ने थानाध्यक्ष राहुल कुमार को आपबीती सुनाते हुए बताया कि सुबह अचानक उसके मोबाइल पर लापता बेटी का फोन आया था। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से बेटी रोने लगी और उसने घबराई हुई आवाज में कहा कि उसे बहुत गलत जगह पर लाकर कैद कर दिया गया है और जबरन देह व्यापार के दलदल में धकेला जा रहा है। इससे पहले कि वह अपनी सटीक लोकेशन या वहां मौजूद लोगों के नाम बता पाती, किसी ने उसका फोन छीन लिया और कॉल कट गई।
मां के पास पुलिस को देने के लिए केवल वही एक अज्ञात मोबाइल नंबर था, जिससे वह कॉल आई थी। मामले की संवेदनशीलता और अनहोनी की आशंका को भांपते हुए थानाध्यक्ष ने बिना एक पल गंवाए जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया और तकनीकी सर्विलांस सेल को उस नंबर को ट्रैक करने का निर्देश दिया।
मोबाइल टावर लोकेशन ने खोला राज, बंगाल के पंजीपाड़ा में मिला सुराग
साइबर और तकनीकी टीम ने जैसे ही उस नंबर का विश्लेषण किया, उसकी अंतिम सक्रिय लोकेशन पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले स्थित पंजीपाड़ा इलाके में पाई गई, जो अंतरराज्यीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों और रेड लाइट एरिया के लिए जाना जाता है। लोकेशन ट्रेस होते ही केसरिया पुलिस ने एक विशेष बचाव दल का गठन किया, जिसमें अनुभवी सब-इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर के साथ महिला पुलिसकर्मी और अन्य तकनीकी जवानों को शामिल किया गया।
पीड़िता के पिता को साथ लेकर पुलिस टीम तुरंत निजी वाहन से रवाना हुई और करीब 500 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय कर पंजीपाड़ा पहुंची। रेड लाइट इलाका होने के कारण वहां सीधे वर्दी में दबिश देना पीड़िता की जान को खतरे में डाल सकता था और तस्करों को सतर्क होने का मौका मिल जाता, इसलिए पुलिस ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की।
सादे कपड़ों में ग्राहक बनकर पहुंचे पुलिसकर्मी, बिछाया चक्रव्यूह
स्थानीय पंजीपाड़ा थाना पुलिस से आवश्यक कानूनी समन्वय स्थापित करने के बाद बिहार पुलिस के सब-इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर ने एक साहसिक कदम उठाया। वे सादे कपड़ों में एक आम ग्राहक का भेष बनाकर उस संदिग्ध इलाके की तंग गलियों में दाखिल हुए, जबकि अन्य पुलिसकर्मी और महिला बल आसपास के मोड़ों पर निगरानी बनाए हुए थे।
इलाके में दलालों से बातचीत करते हुए अधिकारी ने एक कोठे की संचालिका तक पहुंच बनाई। वहां बातचीत और मोलभाव का नाटक करते हुए उन्होंने कमरे के भीतर मौजूद युवती की पहचान की पुष्टि कर ली। संकेत मिलते ही बाहर तैनात बिहार और बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम ने कोठे पर अचानक धावा बोल दिया। पुलिस के इस सुनियोजित और तेजतर्रार एक्शन से इलाके में भगदड़ मच गई और पुलिस ने पीड़िता को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित अपनी सुरक्षा घेरे में ले लिया।
प्यार, शादी का नाटक और 2.30 लाख रुपये में बेचने की साजिश
रेस्क्यू के बाद सुरक्षित वापस लाई गई पीड़िता ने पुलिस को जो आपबीती सुनाई, वह बेहद चौंकाने वाली है। पीड़िता ने बताया कि उसके पड़ोस में रहने वाले रोहित कुमार ने उससे मेलजोल बढ़ाया और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का झांसा दिया। रोहित के बहकावे में आकर वह घर छोड़कर उसके साथ जाने को तैयार हो गई। योजना के मुताबिक, रोहित ने उसे मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचने को कहा।
जब वह मुजफ्फरपुर स्टेशन पहुंची, तो वहां रोहित खुद मौजूद नहीं था, बल्कि उसने अपने दो अज्ञात साथियों को भेजा था जिन्होंने रोहित का हवाला देकर युवती को गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद उसे मुजफ्फरपुर से पूर्णिया ले जाया गया, जहां उसे रानी नाम की एक महिला के सुपुर्द कर दिया गया। पूर्णिया में युवती को यह दिलासा दिया जाता रहा कि अगले दिन रोहित आकर उससे शादी कर लेगा। लेकिन अगले ही दिन उसे धोखे से ट्रेन और निजी वाहनों के जरिए बंगाल के पंजीपाड़ा के एक वेश्यालय में पहुंचा दिया गया। वहां पहुंचते ही उसके सारे दस्तावेज और फोन छीन लिए गए तथा मारपीट कर उसे गलत काम के लिए विवश किया जाने लगा। उसी दौरान उसने किसी तरह एक पल के लिए फोन हासिल कर अपनी मां को डायल किया था।
Bihar Human Trafficking: मुख्य आरोपी रोहित कुमार गिरफ्तार, स्वीकार किया अपना जुर्म
युवती को सकुशल बरामद करने के बाद पुलिस ने मानव तस्करी के इस संगठित गिरोह की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य सूत्रधार रोहित कुमार को मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत शाहपुरपट्टी गांव से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी रोहित कुमार ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने खुलासा किया कि उसने मोटी रकम कमाने के लालच में युवती को प्रेम जाल में फंसाया था और पूर्णिया व बंगाल के सिंडिकेट के हाथों उसे 2 लाख 30 हजार रुपये में बेच दिया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय गिरोह में शामिल पूर्णिया की महिला संचालक, मुजफ्फरपुर के बिचौलियों और बंगाल के खरीदारों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
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