दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बड़ा खुलासा,- प्रति व्यक्ति आय 5.31 लाख रुपये पहुंची, राष्ट्रीय औसत से 2.5 गुना अधिक, 13.27 लाख करोड़ जीडीपी के साथ सेवा क्षेत्र बना विकास का सबसे बड़ा इंजन
दिल्ली आय 5.31 लाख, राष्ट्रीय औसत से दोगुनी
Delhi economy: दिल्ली विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आया है कि राष्ट्रीय राजधानी के एक औसत निवासी की सालाना आय 5.31 लाख रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत 2.19 लाख रुपये से करीब ढाई गुना अधिक है। दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 13.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है और सेवा क्षेत्र इस विकास का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है।
Delhi economy: दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय ने बनाया नया कीर्तिमान
नई दिल्ली। अगर कोई यह जानना चाहे कि देश की राजधानी में रहने वाला एक आम इंसान साल भर में कितना कमाता है तो जवाब है 5.31 लाख रुपये। यह आंकड़ा दिल्ली विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 से सामने आया है।
जब देश का राष्ट्रीय औसत 2.19 लाख रुपये प्रति वर्ष है, तब दिल्ली का यह आंकड़ा सिर्फ बड़ा नहीं, बल्कि भारत के शहरी और ग्रामीण विभाजन की एक गहरी कहानी भी कहता है। यह अंतर दिखाता है कि सेवा आधारित अर्थव्यवस्था किस तरह आय के ढांचे को बदल देती है।
Delhi economy: क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण और यह क्यों है जरूरी
आर्थिक सर्वेक्षण किसी राज्य या देश की वित्तीय सेहत का आधिकारिक लेखाजोखा होता है। इसे सरकार द्वारा बजट से पहले या उसके साथ विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
इस दस्तावेज में राज्य की जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय, रोजगार, निवेश और प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण होता है। आर्थिक नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह सर्वेक्षण सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं को समझने का सबसे विश्वसनीय आधार है।
Delhi economy: तीन साल में कितनी बढ़ी दिल्ली की आय
दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय की यात्रा पिछले कुछ वर्षों में बेहद उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 4.57 लाख रुपये था। अगले वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 4.92 लाख रुपये तक पहुंचा।
अब 2025-26 के लिए इसके 5.31 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस तरह केवल दो वर्षों में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय में करीब 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जो महंगाई की दर से भी अधिक है।
Delhi economy: दिल्ली की जीडीपी 13.27 लाख करोड़ रुपये के करीब
सर्वेक्षण के अनुसार दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्यों पर 13.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 9.42 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
अर्थशास्त्रियों की दृष्टि से यह वृद्धि दर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था देश की समग्र आर्थिक रफ्तार के साथ कदम मिलाकर चल रही है।
Delhi economy: सेवा क्षेत्र है दिल्ली की आर्थिक ताकत की असली जड़
दिल्ली की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की कमाई का आधार उद्योग या खेती नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र है। सर्वेक्षण के अनुसार दिल्ली के कुल आर्थिक उत्पादन में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 86.32 प्रतिशत है।
वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार, शिक्षा और पेशेवर सेवाएं इस क्षेत्र की रीढ़ हैं। औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 12.88 प्रतिशत है जबकि कृषि और संबद्ध गतिविधियों का हिस्सा केवल 0.80 प्रतिशत रह गया है।
Delhi economy: देश के अन्य राज्यों से कैसे अलग है दिल्ली की स्थिति
प्रति व्यक्ति आय के मामले में दिल्ली अकेला नहीं है जो राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार सिक्किम 5.88 लाख रुपये के साथ पहले स्थान पर है, उसके बाद गोवा 5.86 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है।
दिल्ली 4.93 लाख रुपये के साथ तीसरे स्थान पर आती है। चंडीगढ़ 4.53 लाख रुपये, तेलंगाना 3.88 लाख रुपये और कर्नाटक 3.80 लाख रुपये के साथ इस सूची में आगे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि शहरी और सेवा आधारित राज्यों की आय परंपरागत कृषि प्रधान राज्यों की तुलना में काफी अधिक है।
विशेषज्ञों की राय: शहरीकरण और सेवा क्षेत्र से बना यह अंतर
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली और राष्ट्रीय औसत के बीच यह बड़ा अंतर दशकों के शहरीकरण और केंद्र सरकार के मुख्यालय होने के फायदे से आया है। राजधानी में केंद्रीय मंत्रालय, कॉर्पोरेट मुख्यालय और उच्च शिक्षा संस्थानों की उपस्थिति बड़े पैमाने पर कुशल और उच्च वेतन वाले रोजगार पैदा करती है।
नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए एक सबक है। अगर राज्य सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर निवेश बढ़ाएं तो प्रति व्यक्ति आय में तेजी से सुधार संभव है।
Delhi economy: क्या इस आय का फायदा सभी दिल्लीवासियों को मिलता है
प्रति व्यक्ति आय एक औसत आंकड़ा है और इसे सभी के लिए समान नहीं माना जा सकता। अर्थशास्त्री बताते हैं कि इस औसत के पीछे बड़ी आय असमानता भी छिपी होती है।
दिल्ली में एक तरफ उच्च वेतन पाने वाले आईटी और वित्त क्षेत्र के पेशेवर हैं, तो दूसरी तरफ दैनिक मजदूरी पर निर्भर लाखों परिवार भी हैं। इसलिए इस आंकड़े को विकास की पूरी तस्वीर मानने के बजाय एक संकेतक के रूप में देखना उचित होगा।
निष्कर्ष
दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक पूरी आर्थिक कहानी है। 5.31 लाख रुपये की प्रति व्यक्ति आय और 13.27 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी यह बताती है कि राजधानी का विकास मॉडल सेवा क्षेत्र की मजबूती पर टिका है। लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब यह समृद्धि केवल औसत आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर तबके के नागरिक तक पहुंचे।
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