जूट किसानों की बल्ले-बल्ले, केंद्र सरकार ने 275 रुपये बढ़ाकर 5925 रुपये प्रति क्विंटल किया MSP, JCI करेगी सीधी खरीद
केंद्र ने 275 रुपये बढ़ाकर जूट का MSP 5925 रुपये किया, JCI करेगी सीधी खरीद, किसानों की बल्ले-बल्ले
Jute MSP Update: देश के जूट किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी और राहत भरी खुशखबरी का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 2026-27 विपणन सत्र के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP 275 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया गया है। इस फैसले की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ समय से बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में कीमतें के उतार-चढ़ाव के बीच जूट किसान बेहतर दाम की मांग कर रहे थे। पश्चिम बंगाल, असम और बिहार जैसे पूर्वी राज्यों में लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए जूट की खेती पर निर्भर हैं और इस MSP वृद्धि से उन सभी को सीधा और ठोस आर्थिक लाभ मिलेगा। सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और जूट उत्पादन को नई प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है।
Jute MSP Update: क्या होता है MSP और किसानों को कैसे मिलता है फायदा
MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह न्यूनतम कीमत होती है जो सरकार किसी फसल के लिए तय करती है। इसका मतलब यह है कि बाजार में चाहे कुछ भी हो जाए किसान को उसकी फसल का कम से कम इतना दाम तो मिलेगा ही। अगर बाजार में कीमतें MSP से नीचे चली जाती हैं तो सरकारी एजेंसियां सीधे किसानों से MSP पर खरीद करती हैं। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता और कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है। जूट के मामले में सरकार ने MSP तय करते समय यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिले। यह सिद्धांत किसानों की मेहनत को उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Jute MSP Update: 2014 से अब तक 2.5 गुना बढ़ा जूट का MSP
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में जूट के MSP में कितना बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2014 में कच्चे जूट का MSP केवल 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था। अब 2026-27 के लिए यह बढ़कर 5,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यानी पिछले एक दशक में जूट का MSP करीब 2.5 गुना यानी ढाई गुना बढ़ चुका है। यह एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक वृद्धि है जो जूट किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस वृद्धि से न केवल किसानों की आय बढ़ी है बल्कि जूट की खेती के प्रति उनका उत्साह और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
Jute MSP Update: MSP भुगतान में तीन गुना वृद्धि
केवल MSP की दर ही नहीं बढ़ी बल्कि किसानों को किए जाने वाले कुल MSP भुगतान में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2004-05 से 2013-14 के बीच यानी 10 साल में जूट किसानों को कुल 441 करोड़ रुपये का MSP भुगतान किया गया था। लेकिन 2014-15 से 2025-26 के बीच यानी अगले 10 साल में यह राशि बढ़कर 1,342 करोड़ रुपये हो गई जो पिछली अवधि से लगभग तीन गुना अधिक है। यह अंतर साफ बताता है कि सरकार ने जूट किसानों के हित में कितना बड़ा काम किया है।
Jute MSP Update: JCI करेगी सीधी खरीद, घाटे की भरपाई करेगी सरकार
इस MSP को प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने एक मजबूत खरीद व्यवस्था भी बनाई है। सरकार ने मूल्य समर्थन संचालन की जिम्मेदारी जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी JCI को सौंपी है। JCI एक सरकारी संस्था है जो देशभर में जूट की खरीद और विपणन का काम करती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर बाजार में कच्चे जूट की कीमतें MSP से नीचे जाती हैं तो JCI सीधे किसानों से MSP पर जूट खरीदेगी। इस खरीद प्रक्रिया में JCI को अगर कोई नुकसान होता है तो उसकी पूरी भरपाई केंद्र सरकार करेगी। यह व्यवस्था किसानों को पूरी तरह सुरक्षित करती है और उन्हें यह भरोसा देती है कि उनकी फसल का उचित दाम हर हाल में मिलेगा।
Jute MSP Update: अन्य ग्रेड के जूट की कीमतें भी होंगी तय
कच्चे जूट की TD-3 ग्रेड के लिए MSP तय होने के साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कच्चे जूट के अन्य ग्रेड और किस्मों का MSP भी TD-3 ग्रेड के आधार पर ही निर्धारित किया जाएगा। इससे पूरे जूट सेक्टर में कीमतों का एक संतुलन बना रहेगा। किसानों को किसी भी ग्रेड के जूट पर नुकसान नहीं होगा और वे अपनी जमीन और मौसम के अनुसार जूट की किसी भी किस्म की खेती कर सकेंगे।
Jute MSP Update: भारत है दुनिया का सबसे बड़ा जूट उत्पादक
यह जानना जरूरी है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे जूट उत्पादक देशों में से एक है। देश में पश्चिम बंगाल, असम और बिहार राज्यों में जूट की खेती सबसे अधिक होती है। इन राज्यों में लाखों किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए जूट की खेती पर निर्भर हैं। जूट एक पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ फसल है जिसका उपयोग बोरे, थैले, कालीन और कई अन्य उत्पाद बनाने में होता है। प्लास्टिक के बढ़ते विकल्प के रूप में भी जूट उत्पादों की मांग देश और दुनिया में लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में यह वृद्धि किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाने में मदद करेगी। साथ ही जूट की खेती को और अधिक बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार का यह फैसला जूट किसानों के लिए सही मायनों में एक बड़ी सौगात है।
read more here
CUET UG 2026 के लिए फिर खुली रजिस्ट्रेशन विंडो,- 26 फरवरी तक कर लें आवेदन, कोई करेक्शन नहीं होगा
SIP से रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ कैसे तैयार करें, उम्र के हिसाब से जानें मासिक निवेश की रणनीति