भागवत ने खोला युद्धों का राज! बोले- दुनिया एक है फिर भी लड़ती क्यों है? हम अपने एकत्व को पहचानते नहीं, इसीलिए झगड़े और युद्ध होते हैं

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जैसलमेर में कहा- हम एकत्व भूल गए, इसलिए युद्ध नहीं थमते, करुणा और सत्य से आएगी शांति

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Mohan Bhagwat statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज जैसलमेर की धरती से दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि आखिर दुनिया में इतने युद्ध क्यों होते हैं और क्यों ये थमते नहीं। उनका जवाब जितना सरल था उतना ही गहरा भी था। उन्होंने कहा कि हम अपने एकत्व को पहचानते नहीं, इसीलिए झगड़े और युद्ध होते हैं। उनके इस संबोधन ने जैसलमेर में उपस्थित हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

Mohan Bhagwat statement: जैसलमेर में हुआ भव्य दादागुरु चादर महोत्सव का शुभारंभ

राजस्थान के जैसलमेर में आज से तीन दिवसीय दादागुरु चादर महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महोत्सव डेडांसर मेला ग्राउंड पर आयोजित किया गया और इसका उद्घाटन स्वयं RSS प्रमुख मोहन भागवत ने किया। यह आयोजन परम पूज्य दादा श्री जिनदत्त सूरिजी महाराज के चमत्कारी चादर महोत्सव के रूप में जाना जाता है। इस कार्यक्रम की थीम भारतीय संस्कृति समागम एवं समरसता है, जो भारत की विविधता में एकता की भावना को समर्पित है। इस महोत्सव के दौरान दादागुरु और चादर महोत्सव के अवसर पर विशेष सिक्के और डाक टिकट का विमोचन भी किया जाएगा।

Mohan Bhagwat statement: गुजरात प्रवास के बाद सीधे जैसलमेर पहुंचे भागवत

मोहन भागवत इससे पहले दो दिनों तक गुजरात दौरे पर थे। गुजरात प्रवास समाप्त करने के बाद वे सीधे राजस्थान के जैसलमेर पहुंचे। उनका यह दौरा इस महोत्सव में शामिल होने और देश की जनता को एकता और समरसता का संदेश देने के उद्देश्य से था। जैसलमेर जो अपने इतिहास और संस्कृति के लिए जाना जाता है, वह आज इस आयोजन के कारण पूरे देश की निगाहों में था। राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु और समाज के प्रमुख लोग इसमें शामिल हुए।

Mohan Bhagwat statement: जब भागवत ने पूछा, युद्ध क्यों नहीं थमते

जैसलमेर के डेडांसर मेला ग्राउंड पर अपने संबोधन में मोहन भागवत ने दुनियाभर में जारी युद्धों और संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो युद्ध चल रहे हैं वे थम क्यों नहीं रहे, यह झगड़े क्यों होते हैं? इसका एक ही जवाब है कि हम अपने एकत्व को पहचानते नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जब हम खुद को एक नहीं मानते तो स्वाभाविक रूप से अलग हो जाते हैं और जब अलग हो जाते हैं तो अलग-अलग स्वार्थ पैदा हो जाते हैं। फिर हर कोई सिर्फ अपना स्वार्थ साधने में लग जाता है और यही स्वार्थ झगड़ों की जड़ है।

Mohan Bhagwat statement: करुणा भूल गए लोग, सत्य से हुई दूरी

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आज लोग मन की करुणा भूल गए हैं और इसकी वजह है कि वे सत्य से दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हम दिखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं लेकिन सच यह है कि हम सब एक हैं। यह एकत्व ही भारतीय दर्शन का मूल है और यही दुनिया की समस्याओं का समाधान भी है। उन्होंने कहा कि जब तक यह बोध नहीं होगा कि हम सब एक हैं तब तक कलह भी थामेगी नहीं और युद्ध भी चलते रहेंगे। यह एक ऐसा विचार है जो न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है।

Mohan Bhagwat statement: दो महायुद्धों से भी नहीं मिला सबक, बोले भागवत

RSS प्रमुख ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पहला महायुद्ध हुआ और यह सोचकर कि फिर ऐसा न हो, लीग ऑफ नेशन की स्थापना की गई। लेकिन वह संस्था अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकी। फिर दूसरा महायुद्ध हुआ और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ यानी UNO की स्थापना हुई। लेकिन भागवत ने यह सवाल उठाया कि आज हम देख रहे हैं कि UNO के रहते भी दुनिया में जंग जारी है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यही है कि बाहरी संस्थाएं बना लेने से शांति नहीं आती, शांति तो भीतर से आती है, सत्य की पहचान से आती है।

Mohan Bhagwat statement: भारतीय संस्कृति ही है विश्व शांति का मार्ग

मोहन भागवत का यह संबोधन केवल एक राजनीतिक या सामाजिक वक्तव्य नहीं था बल्कि यह भारतीय सनातन दर्शन की उस गहरी परंपरा की अभिव्यक्ति था जो वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर टिकी है। इस विचार का अर्थ है कि संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार है। जब यह भाव मन में जागता है तभी न स्वार्थ रहता है और न झगड़ा। उन्होंने कहा कि यही वह मार्ग है जो भारत हमेशा से दुनिया को दिखाता आया है। संस्कृति समागम और समरसता के इस कार्यक्रम में उनके इन विचारों ने उपस्थित हजारों लोगों के मन में एक नई ऊर्जा का संचार किया।

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