Asian Para Games 2026: सुवर्णा राज ने जीता गोल्ड, स्वाति चौधरी को सिल्वर; भारत के 64 पदक
सुवर्णा राज ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड जीता, स्वाति चौधरी को सिल्वर; भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर।
Asian Para Games 2026: जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारतीय पैरा एथलीटों का अभूतपूर्व और ऐतिहासिक विजय अभियान निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय दल के खिलाड़ियों ने अपने अदम्य साहस, असाधारण अनुशासन और असाधारण खेल कौशल के दम पर तिरंगे का परचम गर्व से लहराया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारतीय अभियान की शुरुआत स्वर्णिम आभा के साथ हुई जब सुवर्णा राज ने महिला डिस्कस थ्रो F54 स्पर्धा में उत्कृष्ट तकनीक का प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में एक और स्वर्णिम सफलता डाली। इसके साथ ही तीरंदाजी के रोमांचक मुकाबले में भारतीय पैरा आर्चर स्वाति चौधरी ने दबाव की परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इन शानदार जीतों के बल पर प्रतियोगिता में भारत के पदकों की कुल संख्या 64 तक पहुंच गई है और देश शीर्ष पांच खेल महाशक्तियों की विशिष्ट तालिका में मजबूती से बना हुआ है।
Asian Para Games 2026: महिला डिस्कस थ्रो F54 में रचा इतिहास
महिला डिस्कस थ्रो F54 स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में भारत की दिग्गज पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने अपनी शुरुआत से ही दबदबा कायम कर लिया। थ्रोइंग रिंग में अपने तकनीकी संतुलन और बाजुओं की शक्ति का अद्भुत तालमेल बिठाते हुए सुवर्णा ने 15.66 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर स्वर्ण पदक पर एकतरफा कब्जा जमाया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की, बल्कि इस खेल महाकुंभ में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या को 15 तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
इस मुकाबले में विदेशी प्रतिद्वंद्वियों की ओर से भी कड़ी चुनौती देखने को मिली। ईरान की अनुभवी थ्रोअर शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर की दूरी तय कर रजत पदक हासिल किया, जबकि वियतनाम की गुयेन थी न्गोक थुई ने 14.65 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक पर संतोष किया। सुवर्णा के इस स्वर्ण पदक ने पूरे भारतीय दल में ऊर्जा का संचार कर दिया और एथलेटिक्स ट्रैक पर भारत की तकनीकी श्रेष्ठता को पुनः रेखांकित किया।
पैरा आर्चरी में स्वाति चौधरी का सटीक निशाना: रजत पदक पर कब्जा
तीरंदाजी रेंज पर भारतीय खिलाड़ियों का जलवा लगातार बरकरार है। महिला W1 व्यक्तिगत स्पर्धा के स्वर्ण पदक मैच में भारत की प्रतिभावान पैरा आर्चर स्वाति चौधरी ने जबरदस्त एकाग्रता का परिचय दिया। फाइनल मुकाबले में उनका सामना चीन की विश्व स्तरीय तीरंदाज मेंगकान सेन से हुआ। हवा के बदलते रुख और अत्यधिक मनोवैज्ञानिक दबाव के बीच दोनों तीरंदाजों के मध्य बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।
स्वाति ने प्रत्येक तीर के साथ सटीक निशाना साधते हुए चीनी खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी और मुकाबले को अंत तक रोमांचक बनाए रखा। यद्यपि कुछ अंकों के सूक्ष्म अंतर से उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा, किंतु उनका यह रजत पदक भारतीय तीरंदाजी के बढ़ते कद की गवाही देता है। इससे पूर्व कंपाउंड डबल्स मुकाबले में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने भी फाइनल तक का सफर तय कर शानदार रजत पदक हासिल किया था, जिसने तीरंदाजी में भारतीय अभियान की नींव को अत्यधिक मजबूत कर दिया है।
प्रवीण कुमार और आयुष वर्मा का ट्रैक एंड फील्ड में ऐतिहासिक प्रदर्शन
एथलेटिक्स स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों की पदकों की भूख लगातार जारी है। पुरुषों की हाई जंप T44/64 श्रेणी में भारतीय जंपर प्रवीण कुमार ने इतिहास रचते हुए 2.05 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की और नया गेम्स रिकॉर्ड स्थापित करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी ऐतिहासिक स्पर्धा में भारत के ही बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक प्राप्त किया, जिसके चलते पोडियम के शीर्ष दो स्थानों पर एक साथ भारतीय तिरंगा लहराया।
वहीं थ्रोइंग स्पर्धाओं में आयुष वर्मा ने पुरुषों के शॉट पुट F53 वर्ग में 8.16 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकते हुए देश को एक और स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले आयुष ने भाला फेंक स्पर्धा में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए कांस्य पदक जीता था। एक ही संस्करण में दोहरे पदक जीतकर आयुष ने पैरा एथलेटिक्स में अपनी अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया है।
पदक तालिका में भारत का दबदबा: 64 पदकों के साथ पांचवें पायदान पर जमाया कब्जा
गुरुवार की सुबह तक संकलित नवीनतम पदकीय आंकड़ों के अनुसार, भारत ने कुल 64 पदक जीतकर तालिका में अपनी स्थिति को अत्यंत सुरक्षित और गौरवमयी बना रखा है। भारतीय खाते में 15 स्वर्ण, 22 रजत और 27 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। भारत वर्तमान में पदक तालिका में पांचवें स्थान पर मजबूती से डटा हुआ है, जो पिछले कई अंतरराष्ट्रीय पैमानों की तुलना में भारतीय पैरा खेलों के बुनियादी ढांचे में आए क्रांतिकारी बदलाव को दर्शाता है।
भारतीय दल के लिए सबसे अधिक पदकों की फसल एथलेटिक्स यानी ट्रैक एंड फील्ड से आई है, जहां थ्रोइंग, जंपिंग और स्प्रिंटिंग सभी वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम फिनिश हासिल की है। इसके साथ ही पैरा आर्चरी, पैरा बैडमिंटन और तैराकी में भी भारतीय एथलीटों ने निरंतर पदक जीतकर देश के संचयी स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया है।
Asian Para Games 2026: आगामी स्पर्धाएं और पदक संख्या में नए कीर्तिमान की उम्मीद
जापान में चल रहे इस खेल महाकुंभ में अभी कई महत्वपूर्ण स्पर्धाओं के फाइनल मुकाबले शेष हैं। भारतीय दल के कई प्रमुख चेहरे आने वाले दिनों में पैरा बैडमिंटन के एकल और युगल मुकाबलों, व्हीलचेयर रेसिंग, पैरा पावरलिफ्टिंग और क्लब थ्रो जैसी स्पर्धाओं में अपनी चुनौती पेश करने उतरेंगे। वर्तमान फॉर्म और खिलाड़ियों के अटूट आत्मविश्वास को देखते हुए खेल विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत इस बार अपने पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए पदकों का एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
सुवर्णा राज और स्वाति चौधरी की यह ताजा सफलता देश के लाखों दिव्यांग युवाओं और उदीयमान खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक विशाल स्रोत है। इन पैरा एथलीटों ने यह सिद्ध कर दिया है कि शारीरिक सीमाओं से परे जाकर यदि दृढ़ संकल्प, कड़ा अभ्यास और राष्ट्र के प्रति समर्पण हो, तो दुनिया के किसी भी मंच पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
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