Ankita Bhandari Case: इंडिया गेट पर हिरासत में लिए गए अंकिता के माता-पिता रिहा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन
दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने के दौरान अंकिता के माता-पिता हिरासत में लिए गए, सुबह रिहा हुए।
Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार लगा रहे मृतका के माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट से हिरासत में लेने के कुछ ही घंटों बाद रिहा कर दिया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 की तड़के हुई इस पुलिस कार्रवाई के बाद यह संवेदनशील मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अंकिता के परिजन भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि मामले में सामने आए कथित वीआईपी कनेक्शन को लेकर चल रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पड़ताल पूरी होने तक इस संवैधानिक नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाए।
Ankita Bhandari Case: इंडिया गेट पर रातभर चला धरना, तड़के पुलिस ने लिया हिरासत में
अपनी दिवंगत बेटी के लिए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर अंकिता भंडारी के माता-पिता बुधवार शाम से ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट परिसर में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। देर रात तक चले इस प्रदर्शन के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दलों के नेता भी उनके समर्थन में जुटे रहे।
गुरुवार तड़के करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने निषेधाज्ञा और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए धरना स्थल से अंकिता के माता-पिता सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, व्यापक जनआक्रोश और विपक्ष के कड़े विरोध के बाद पुलिस ने लगभग एक घंटे के भीतर, सुबह 5 बजे के करीब अंकिता के माता-पिता को औपचारिक रूप से रिहा कर दिया। विपक्षी दलों ने आधी रात को पीड़ित परिवार के साथ की गई पुलिसिया सख्ती की कड़ी निंदा की है।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी और पुलिस कार्रवाई पर तीखे सवाल
इंडिया गेट पर आयोजित इस धरने में कांग्रेस के कई प्रमुख नेता सीधे तौर पर शामिल हुए थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा, सोशल मीडिया व संचार विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत और इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत कई अन्य पदाधिकारियों को भी पुलिस ने मौके से हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि जब किसी मामले में वीआईपी संलिप्तता की उच्चस्तरीय जांच जारी है, तब संबंधित व्यक्ति को संवैधानिक पद देकर कथित तौर पर कानूनी प्रतिरक्षा (Immunity) देने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से इस पूरे प्रकरण में संज्ञान लेते हुए नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार करने का औपचारिक अनुरोध किया है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने की थी पीड़ित परिवार से मुलाकात
धरना प्रदर्शन के दौरान बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा स्वयं इंडिया गेट पहुंचे थे और अंकिता के शोकाकुल माता-पिता से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की थीं। दोनों शीर्ष नेताओं ने पीड़ित परिवार के साथ बैठकर उनकी आपबीती सुनी और न्याय की इस लड़ाई में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
राहुल गांधी ने इस मुलाकात के बाद कहा कि अपनी 19 वर्षीय बेटी को खोने के बाद भी एक असहाय परिवार को व्यवस्था से सच्चाई जानने के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं अंकिता के परिजनों ने भावुक होते हुए कहा कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक उस कथित वीआईपी का सच सामने नहीं आ जाता जिसके दबाव का जिक्र उनकी बेटी ने किया था।
क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड और मौजूदा कानूनी स्थिति?
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में रिजॉर्ट में आने वाले एक अज्ञात ‘वीआईपी’ को अनुचित सेवाएं देने से इनकार करने पर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी और शव को चिल्ला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। इस मुख्य हत्याकांड में त्वरित अदालती सुनवाई के बाद रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों—सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता—को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलने के बावजूद मामले से जुड़ा कथित वीआईपी एंगल लगातार विवादों में बना रहा। जनवरी 2026 में अज्ञात वीआईपी के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। हालांकि, कानूनी और तथ्यात्मक रूप से यह स्पष्ट किया गया है कि दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि किसी भी सक्षम अदालत या जांच एजेंसी द्वारा अब तक नहीं की गई है, और राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के पास यदि पुख्ता सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय सीधे जांच एजेंसियों के समक्ष पेश करना चाहिए।
Ankita Bhandari Case: राज्यपाल पद पर नियुक्ति और आगे की प्रशासनिक दिशा
सिक्किम के नव-नियुक्त राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम के नाम की घोषणा के बाद अंकिता के परिजनों ने अपना विरोध और तीव्र कर दिया है। परिवार का कहना है कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए यह आवश्यक है कि जब तक सीबीआई की अंतिम क्लोजर रिपोर्ट या आरोप पत्र सामने नहीं आ जाता, तब तक किसी भी तरह का संवैधानिक पदभार ग्रहण न कराया जाए।
दिल्ली पुलिस की हिरासत से छूटने के बाद अंकिता के माता-पिता ने दोहराया है कि उनकी यह मुहिम किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि केवल उनकी बेटी के साथ हुए अन्याय की संपूर्ण सच्चाई सामने लाने के लिए है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय इस राजनीतिक व सामाजिक विरोध पर क्या रुख अपनाते हैं और सीबीआई की चल रही जांच में अगला कदम क्या होता है।
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