Andaman Nicobar Maritime Hub: हिंद-प्रशांत में समुद्री ताकत बढ़ाने की तैयारी में भारत, जहाज निर्माण से लेकर अंडरसी केबल तक पर फोकस

अंडमान-निकोबार में बंदरगाह, जहाज निर्माण और सबमरीन केबल सुरक्षा पर भारत का फोकस

0

Andaman Nicobar Maritime Hub: भारत अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की रणनीतिक और भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक सुरक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने की व्यापक योजना पर काम कर रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य और बंगाल की खाड़ी के व्यस्ततम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जलमार्गों के मुहाने पर स्थित होने के कारण यह द्वीपसमूह वैश्विक समुद्री परिवहन की धड़कन माना जाता है। भारत इस क्षेत्र में न केवल आधुनिक बंदरगाहों और जहाज निर्माण क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, बल्कि समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली सबमरीन संचार केबलों की सुरक्षा और क्षेत्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक सेतु का निर्माण करना और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को अपरिहार्य बनाना है।

Andaman Nicobar Maritime Hub: अंडमान-निकोबार को क्षेत्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स का केंद्र बनाने की रणनीति

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह हिंद महासागर के उन प्रमुख समुद्री मार्गों पर स्थित है जहां से दुनिया के कच्चे तेल और कंटेनर कार्गो का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस रणनीतिक लाभ को आर्थिक शक्ति में बदलने के लिए भारत सरकार द्वीपसमूह में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट्स, बंकरिंग सुविधाएं और आधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने पर सक्रियता से आगे बढ़ रही है।

इसी रणनीति को वैश्विक और क्षेत्रीय मंच पर विस्तार देने के लिए ‘अंडमान डायलॉग 2027’ की तैयारी के तहत एक विशेष पूर्व-वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें 15 से अधिक मित्र देशों के राजदूतों, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों और औद्योगिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 12 से 14 मार्च 2027 तक स्वराज द्वीप पर प्रस्तावित अंडमान डायलॉग के मुख्य एजेंडे में बंदरगाहों का अंतर्संबंध, हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना और क्षेत्रीय व्यापारिक गलियारों के विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत आर्थिक पुल का निर्माण

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला सबसे मजबूत आर्थिक पुल बनने की पूरी क्षमता रखता है। शिपिंग सेवाओं के आधुनिकीकरण, तटीय नौवहन और मजबूत वित्तीय ढांचे की स्थापना से क्षेत्रीय व्यापार को भारी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली अनिश्चितताओं के बीच भारत एक भरोसेमंद और सुरक्षित व्यापारिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मजबूत समुद्री संपर्क स्थापित होने से भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे और क्षेत्रीय देशों के बीच आयात-निर्यात की लागत में भारी कमी आएगी। हालांकि, इस परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर पूंजी निवेश और आधुनिक बंदरगाह अवसंरचना का समयबद्ध निर्माण अनिवार्य रहेगा।

2028 तक समुद्री सूचना नेटवर्क (IFC-IOR) में 50 देशों को जोड़ने का लक्ष्य

समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए भारत रियल-टाइम सूचना साझाकरण प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के नेतृत्व और भारतीय नौसेना के मार्गदर्शन में संचालित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

वर्तमान में इस केंद्र पर लगभग 16 से 17 मित्र देशों के संपर्क अधिकारी (International Liaison Officers) तैनात हैं, जिनकी संख्या को वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 50 करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अंडमान सागर और आसपास के जलक्षेत्र में मर्चेंट जहाजों की ट्रैकिंग, संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम और समुद्री डकैती रोधी अभियानों के लिए यह साझा नेटवर्क समुद्री सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार बनेगा।

भारत-आसियान व्यापारिक संबंध और घरेलू जहाज निर्माण उद्योग का विस्तार

वित्त वर्ष 2025-26 के व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत और आसियान देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब डॉलर के स्तर को छू चुका है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा है। इस विशाल व्यापारिक हिस्सेदारी को संभालने के लिए भारत को अपने घरेलू शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयरिंग उद्योग को आत्मनिर्भर बनाना अनिवार्य हो गया है।

इस दिशा में केंद्र सरकार ने समुद्री क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए 69,725 करोड़ रुपये के विशेष सहायता पैकेज की घोषणा की है, जबकि इंडिया मैरीटाइम वीक के माध्यम से लगभग 12 लाख करोड़ रुपये की दीर्घकालिक निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल की गई हैं। इन भारी-भरकम निवेशों का बड़ा हिस्सा अंडमान-निकोबार और मुख्य भूमि के शिपयार्डों में आधुनिक ड्राइ-डॉक्स के निर्माण, आधुनिक क्रेन प्रणालियों और स्थानीय स्तर पर कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने में खर्च किया जाएगा।

समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स की डिजिटल और भौतिक सुरक्षा

भारत की यह समुद्री रणनीति केवल जहाजों की आवाजाही और बंदरगाहों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल युग की जीवनरेखा मानी जाने वाली समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबलों (Subsea Cables) की हिफाजत भी इसकी शीर्ष प्राथमिकता है। दुनिया का 95 प्रतिशत से अधिक वैश्विक इंटरनेट और वित्तीय डेटा इन्हीं समुद्री केबलों के माध्यम से प्रवाहित होता है।

अंडमान-निकोबार क्षेत्र से गुजरने वाले डिजिटल डेटा राजमार्गों पर किसी भी प्रकार के तकनीकी व्यवधान या तोड़फोड़ की आशंका से निपटने के लिए तटीय रडार स्टेशनों और नौसैनिक गश्ती जहाजों के बीच एकीकृत निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है। साझेदार देशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि डिजिटल संपर्क पूरी तरह सुरक्षित और अबाधित बना रहे।

Andaman Nicobar Maritime Hub: भारतीय समुद्री अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को मिलने वाली नई दिशा

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह को हिंद-प्रशांत के समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करने की यह व्यापक पहल भारत की समग्र समुद्री अर्थव्यवस्था यानी ब्लू इकोनॉमी को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। ट्रांसशिपमेंट हब के पूरी तरह सक्रिय होने से भारतीय मालवाहकों को सिंगापुर या कोलंबो जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे देश के बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी। आने वाले समय में परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना और हिंद-प्रशांत के मित्र देशों के साथ रणनीतिक समन्वय ही इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता तय करेगा।

Read More Here

Gold-Silver Price 14 October 2026: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट से खरीदारों को राहत, जानें 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड का ताजा भाव

Aaj Ka Mausam 14 October 2026: दिल्ली-NCR में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें यूपी समेत देशभर का मौसम

New Governors Appointed: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की, देखें पूरी लिस्ट

Natural Hair Care Tips: बालों के लिए घर पर बनाएं DIY कंडीशनर, इन 4 चीजों से करें तैयार

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.