मध्य पूर्व संघर्ष से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा, सरकार बोली स्थिति नियंत्रण में लेकिन होर्मुज मार्ग से LPG आपूर्ति पर दबाव, सतर्क रहने की सलाह

सरकार ने कहा स्थिति सामान्य, लेकिन LPG सप्लाई पर दबाव, सतर्कता जरूरी

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India energy security: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने आज स्वीकार किया कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी घटना का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति फिलहाल संतुलित है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और पेट्रोल पंपों पर कहीं कोई संकट नहीं है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।

India energy security: क्यों है भारत मध्य पूर्व पर इतना निर्भर?

भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है। इस आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से आता है, जो इस समय संघर्ष की जद में है। इसी तरह भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से प्राप्त करता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि “कोई भी घटना मिडिल ईस्ट में होगी, उसका प्रभाव हम पर पड़ेगा। युद्ध हो रहा है, हम पर असर पड़ रहा है, इसीलिए हम हर रोज जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं।” यह स्वीकारोक्ति खुद में बड़ी है क्योंकि सरकारें आमतौर पर ऐसी संवेदनशील बात सार्वजनिक रूप से कम कहती हैं।

India energy security: अभी क्या है देश में ईंधन की स्थिति?

सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़ों के अनुसार देश की प्राकृतिक गैस की कुल खपत लगभग 189 MMSCMD है। इसमें से 97.5 MMSCMD गैस घरेलू स्तर पर उत्पादित होती है। अप्रत्याशित परिस्थितियों यानी “फोर्स मेज्योर” की वजह से लगभग 47.4 MMSCMD गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

घरेलू पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी गई है और इसमें किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। कच्चे तेल की उपलब्धता सामान्य है और रिफाइनरियां बिना किसी बाधा के चल रही हैं। पेट्रोल पंपों पर किसी तरह के ड्राई-आउट की सूचना नहीं है।

India energy security: एलपीजी की स्थिति अभी भी चिंताजनक क्यों है?

पीएनजी और सीएनजी की स्थिति भले ही सामान्य हो, लेकिन रसोई गैस यानी एलपीजी को लेकर चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति में व्यवधान के कारण मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है।

सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि जहां पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध हो, वहां एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन लिया जाए। इस दिशा में सीजीडी कंपनियों के माध्यम से विशेष प्रोत्साहन और त्वरित कनेक्शन दिए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक सवा लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।

India energy security: सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

मध्य पूर्व संघर्ष की खबर फैलते ही कुछ इलाकों में पैनिक बुकिंग और जमाखोरी की शिकायतें सामने आई थीं। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सख्त निर्देश भेजे हैं। 31 राज्यों में जिला स्तर पर निगरानी केंद्र सक्रिय कर दिए गए हैं।

कमर्शियल गैस के लिए 17 राज्यों ने आवंटन आदेश जारी किए हैं। केरोसिन के लिए 15 राज्यों ने आपूर्ति आदेश दिए हैं। राज्यों के कंट्रोल रूम चौबीस घंटे सक्रिय हैं और तेल विपणन कंपनियां खुद बाजार का निरीक्षण कर रही हैं। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों के अनुसार भारत की भौगोलिक स्थिति और आयात पर निर्भरता को देखते हुए मध्य पूर्व में कोई भी दीर्घकालीन संघर्ष देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

India energy security: आगे क्या हो सकता है और सरकार की रणनीति क्या है?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह स्थिति पर हर दिन नजर रख रही है और रोजाना अपडेट देने की कोशिश की जाएगी। घरेलू पीएनजी और सीएनजी आपूर्ति में कोई कटौती नहीं होगी, यह प्राथमिकता है।

वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने और आयात मार्ग विविधीकरण की दिशा में भी काम जारी है। उपभोक्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे अफवाहों से बचें और आवश्यकता से अधिक ईंधन जमा न करें क्योंकि इससे आपूर्ति श्रृंखला पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व का संकट भारत को एक महत्वपूर्ण सबक दे रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल कूटनीति का नहीं बल्कि आर्थिक नीति का भी अहम हिस्सा है। फिलहाल सरकार ने स्थिति को संतुलित बनाए रखा है और आपूर्ति सामान्य है। लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचा, तो एलपीजी मोर्चे पर और कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। आम नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे अफवाहों से बचें, जरूरत से ज्यादा ईंधन न जमा करें और सरकार की अपील पर पीएनजी को प्राथमिकता दें।

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