LPG संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा कदम, राज्यों को 10% अतिरिक्त कमर्शियल गैस कोटा देने का फैसला; ईरान-इजरायल युद्ध से प्रभावित आपूर्ति के बीच होटल-रेस्टोरेंट उद्योग को राहत, सुधारात्मक कदमों पर आधारित होगा आवंटन

राज्यों को 10% अतिरिक्त गैस कोटा, होटल-रेस्टोरेंट को मिलेगी राहत

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LPG crisis 2026: रसोई गैस की लंबी लाइनें, डिस्ट्रीब्यूटर के दरवाजे पर घंटों इंतजार और व्यवसायों में गैस की कमी से उत्पन्न संकट, यह तस्वीर इन दिनों देश के अधिकांश शहरों में देखी जा रही है। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है जिसका सीधा असर भारत में LPG की उपलब्धता पर पड़ा है। इसी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।

LPG crisis 2026: सरकार ने LPG पर क्या बड़ा फैसला लिया?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमर्शियल LPG का 10 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन देने की पेशकश की है। यह निर्णय उस समय आया है जब देशभर में गैस सिलेंडर की किल्लत चरम पर है।

मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि LPG का मामला अभी भी चिंताजनक है। ऑनलाइन बुकिंग में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह भी सच है कि डिस्ट्रीब्यूटरों के यहां लंबी लाइनें अभी भी लगी हैं। यह बयान इस बात की स्वीकृति है कि संकट गंभीर है और इससे निपटने के लिए तत्काल उपाय जरूरी हैं।

LPG crisis 2026: LPG संकट का मूल कारण क्या है?

भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और खाड़ी देश इसके प्रमुख स्रोत हैं। ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को प्रभावित किया है।

इस युद्ध के कारण LPG की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और भारत में भी गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। देश में LPG की खपत में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है जो इस संकट की गहराई को दर्शाती है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय सबसे अधिक प्रभावित हैं।

LPG crisis 2026: सहायता फ्रेमवर्क क्या है और यह कैसे काम करेगा?

केंद्र सरकार ने यह अतिरिक्त LPG कोटा सीधे सभी राज्यों को नहीं दिया है। इसके बजाय एक प्रोत्साहन आधारित सहायता फ्रेमवर्क तैयार किया गया है जिसमें राज्य जितने अधिक सुधारात्मक कदम उठाएंगे उन्हें उतना अधिक अतिरिक्त कोटा मिलेगा।

इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं है बल्कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करना भी है। ऊर्जा नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह एक स्मार्ट नीतिगत कदम है जो राज्यों को सुधार के लिए प्रेरित करते हुए आपूर्ति संकट से भी निपटता है।

LPG crisis 2026: किन कदमों पर कितना अतिरिक्त LPG आवंटन मिलेगा?

सहायता फ्रेमवर्क के तहत राज्यों को उनके प्रशासनिक सुधारों के आधार पर श्रेणीबद्ध अतिरिक्त आवंटन दिया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • 1% अतिरिक्त आवंटन: जो राज्य सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े आवेदनों की मंजूरी और शिकायतों के लिए जिला स्तर पर समितियां बनाएंगे।

  • 2% अतिरिक्त आवंटन: जो राज्य CGD परियोजनाओं को तेज करने के लिए ‘डीम्ड CGD अनुमतियां’ (स्वचालित मंजूरी) देंगे।

  • 3% अतिरिक्त आवंटन: डिग एंड रिस्टोर स्कीम (खुदाई के बाद बहाली) लागू करने वाले राज्यों को।

  • 4% अतिरिक्त आवंटन: CGD कंपनियों के लिए वार्षिक किराए में कमी करने वाले राज्यों को।

LPG crisis 2026: इस फैसले का होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर क्या असर होगा?

कमर्शियल LPG की किल्लत का सबसे अधिक असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ा है। देशभर में लाखों ऐसे प्रतिष्ठान हैं जो अपनी दैनिक रसोई के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं।

इन व्यवसायों के लिए गैस की उपलब्धता सीधे उनके संचालन से जुड़ी है। 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा मिलने से इस क्षेत्र में आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मध्यपूर्व में युद्ध जारी है तब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य होना कठिन है।

LPG crisis 2026: सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करना क्यों जरूरी है?

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन यानी CGD नेटवर्क शहरों में पाइपलाइन के जरिए घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक गैस पहुंचाने की प्रणाली है। यह प्रणाली परंपरागत सिलेंडर आधारित आपूर्ति की तुलना में अधिक स्थिर और किफायती होती है।

देश के कई शहरों में CGD नेटवर्क का विस्तार अभी भी अधूरा है जिसके कारण किसी भी आपूर्ति संकट में सिलेंडर आधारित व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। सरकार का यह फ्रेमवर्क राज्यों को CGD इन्फ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह फैसला LPG संकट से निपटने के लिए एक सकारात्मक और व्यावहारिक कदम है। सहायता फ्रेमवर्क के जरिए राज्यों को सुधार के लिए प्रोत्साहित करना और साथ में अतिरिक्त कोटा देना एक संतुलित नीतिगत दृष्टिकोण है। लेकिन यह भी सच है कि जब तक वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य नहीं होती और देश का CGD नेटवर्क मजबूत नहीं होता, तब तक LPG की किल्लत पूरी तरह खत्म होना आसान नहीं होगा। यह संकट भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में और अधिक आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।

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