ईरान-अमेरिका तनाव के बीच श्रीलंका का बड़ा फैसला, अमेरिकी युद्धक विमानों को लैंडिंग से किया इनकार, राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने तटस्थता और संप्रभुता को दी प्राथमिकता

दिसानायके ने तटस्थ नीति अपनाई, US को लैंडिंग से किया इनकार

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Sri Lanka: जब पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को बढ़ते हुए देख रही है, तब श्रीलंका ने एक साहसिक और स्वतंत्र कूटनीतिक कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

Sri Lanka: श्रीलंका को अमेरिका ने दो बार मांगी अनुमति

श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सार्वजनिक रूप से खुलासा किया कि अमेरिका ने न केवल एक बार बल्कि दो बार अपने युद्धक विमानों को श्रीलंकाई धरती पर उतारने की अनुमति मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों बार उनकी सरकार ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि अमेरिका चाहता था कि उसके दो युद्धक विमान मट्टाला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरें। यह हवाई अड्डा श्रीलंका के हम्बनटोटा जिले में स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

Sri Lanka: ईरान युद्ध के बीच श्रीलंका की तटस्थता की नीति क्यों महत्वपूर्ण है

श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर के बीचोबीच है। यह देश दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और दक्षिणपूर्व एशिया को जोड़ने वाले समुद्री मार्गों के करीब स्थित है। ऐसे में किसी भी सैन्य संघर्ष में श्रीलंका की भूमिका अत्यंत संवेदनशील हो जाती है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, श्रीलंका का यह निर्णय उसकी संप्रभुता और विदेश नीति की स्वायत्तता को दर्शाता है। एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में श्रीलंका का यह अधिकार है कि वह किसी भी विदेशी सैन्य अभियान में अपनी धरती का उपयोग नहीं करने दे।

Sri Lanka: राष्ट्रपति दिसानायके कौन हैं और उनकी विदेश नीति की क्या है दिशा

अनुरा कुमारा दिसानायके श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं और वे जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी से संबंध रखते हैं। उन्होंने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीता और तब से वे एक स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाने के लिए जाने जाते हैं। दिसानायके सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रीलंका न तो किसी बड़ी शक्ति के खेमे में जाएगा और न ही किसी सैन्य संघर्ष में किसी पक्ष का समर्थन करेगा। यह नीति देश की जनता की भावनाओं और आर्थिक हितों दोनों के अनुरूप है।

Sri Lanka: मट्टाला हवाई अड्डे का रणनीतिक महत्व क्या है

मट्टाला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा श्रीलंका के दक्षिणपूर्वी हिस्से में स्थित है। यह हवाई अड्डा हिंद महासागर के प्रमुख व्यापारिक और सैन्य मार्गों के बेहद करीब है। इसी कारण अमेरिका इस हवाई अड्डे पर अपने विमानों को उतारना चाहता था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका को इस हवाई अड्डे पर सुविधा मिल जाती, तो इससे ईरान के खिलाफ उसके सैन्य अभियान में सामरिक बढ़त मिलती। यही कारण है कि श्रीलंका के इनकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी खबर के रूप में देखा जा रहा है।

Sri Lanka: भारत और चीन के बीच श्रीलंका की स्थिति पर क्या पड़ेगा असर

श्रीलंका पहले से ही भारत और चीन दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखता है। हम्बनटोटा बंदरगाह को लेकर चीन की उपस्थिति पहले से ही भारत और अमेरिका की चिंता का विषय रही है। ऐसे में अमेरिका को लैंडिंग से मना करने के बाद श्रीलंका और अमेरिका के संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी मानना है कि श्रीलंका का यह निर्णय उसकी आंतरिक राजनीति और आर्थिक पुनर्निर्माण की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। श्रीलंका अभी भी 2022 के आर्थिक संकट से उबरने की प्रक्रिया में है।

Sri Lanka: तटस्थता कमजोरी नहीं, समझदारी है

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे देशों के लिए तटस्थता की नीति अपनाना न केवल उनकी संप्रभुता की रक्षा करती है बल्कि उन्हें बड़ी शक्तियों के बीच एक संतुलित भूमिका निभाने का अवसर भी देती है। श्रीलंका का यह कदम उसकी कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। एक वरिष्ठ कूटनीतिक विश्लेषक का कहना है कि “जब दो बड़ी शक्तियां आपस में टकराती हैं, तो छोटे देशों के लिए किसी एक पक्ष में जाना दीर्घकालिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। श्रीलंका ने जो रास्ता चुना है, वह उसके राष्ट्रीय हित की दृष्टि से सही प्रतीत होता है।”

निष्कर्ष

श्रीलंका का यह निर्णय केवल एक कूटनीतिक घटना नहीं है, यह एक स्पष्ट संदेश है कि छोटे देश भी बड़ी शक्तियों के दबाव में आए बिना अपनी स्वतंत्र नीति अपना सकते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच श्रीलंका ने जो संतुलित और साहसिक कदम उठाया है, वह उसकी कूटनीतिक दूरदर्शिता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस इनकार पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देता है और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर इसका क्या असर पड़ता है।

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