नासिक में कथित गॉडमैन अशोक खरात गिरफ्तार, सात घंटे की पूछताछ में खुलासा, 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो और 500 करोड़ की संपत्ति के सबूत मिले, महिलाओं के शोषण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप

100+ वीडियो और 500 करोड़ संपत्ति के सबूत, जांच तेज

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Ashok Kharat: आस्था की आड़ में जब कोई व्यक्ति नकली चमत्कारों का कारोबार खड़ा करता है तो उसके जाल में फंसने वाले लोग अक्सर तब तक नहीं जागते जब तक पुलिस दरवाजे पर दस्तक न दे। नासिक में यही हुआ जब खुद को दैवीय शक्तियों का स्वामी बताने वाला अशोक खरात अब कानून की गिरफ्त में है और उसके अपराधों की परतें एक एक कर खुल रही हैं।

Ashok Kharat: अशोक खरात कौन है और उस पर क्या आरोप हैं?

अशोक खरात उर्फ कैप्टन खरात नासिक में खुद को ज्योतिषी और गॉडमैन के रूप में प्रस्तुत करता था। उसने मिरगांव में एक मंदिर भी बनवाया था जहां वह धार्मिक अनुष्ठानों की आड़ में अमीर और प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाता था।

उस पर महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर शोषण करने, धार्मिक कर्मकांडों के नाम पर मोटी रकम वसूलने, ब्लैकमेलिंग और उगाही के अनेक गंभीर आरोप हैं। पुलिस का मानना है कि उसके शिकार बनी महिलाओं की संख्या अभी सामने आई संख्या से कहीं अधिक हो सकती है और जांच जारी है।

Ashok Kharat: पुलिस ने कितनी देर पूछताछ की और खरात की हालत कैसी रही?

रविवार को पुलिस ने अशोक खरात से सात घंटे से अधिक समय तक लगातार पूछताछ की। यह पूछताछ इतनी गहन थी कि जब उसे बाहर लाया गया तो उसकी शारीरिक अवस्था पूरी तरह बदली हुई नजर आई।

जो व्यक्ति गिरफ्तारी से पहले खुद को प्रभावशाली और रसूखदार बताता था वह पूछताछ के बाद बिना सहारे के ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। पुलिस वाहन में बैठते समय वह अपना चेहरा छिपाने की कोशिश करता दिखा। यह दृश्य उसके अहंकार और उसकी वास्तविकता के बीच के फर्क को साफ तौर पर उजागर करता है।

Ashok Kharat: अशोक खरात के ठिकाने से क्या क्या बरामद हुआ?

जांच एजेंसियों ने अशोक खरात के कथित कार्यालय और ठिकानों की व्यापक तलाशी ली जिसमें चौंकाने वाले साक्ष्य सामने आए। उसके कार्यालय से एक पेन ड्राइव बरामद की गई जिसमें 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो क्लिप होने की जानकारी सामने आई है।

इन सभी वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच अधिकारियों की आशंका है कि इनमें कुछ उच्च प्रोफाइल व्यक्ति भी नजर आ सकते हैं। इसके अलावा नकदी, महत्वपूर्ण दस्तावेज, हथियार और करोड़ों की संपत्ति से जुड़े साक्ष्य भी बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में करीब 500 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति से संबंधित सूत्र मिले हैं।

Ashok Kharat: ठगी के लिए खरात कौन से हथकंडे अपनाता था?

अशोक खरात की ठगी की कार्यप्रणाली अत्यंत चतुराई से बनाई गई थी। वह नकली सांपों को रिमोट से नियंत्रित करके लोगों के सामने चमत्कार का नाटक करता था और भोले भाले श्रद्धालुओं को इसे दैवीय शक्ति का प्रमाण मानने पर मजबूर करता था।

इसके साथ ही वह बाजार में बेहद सस्ते दाम पर मिलने वाले इमली के बीजों को सिद्ध रत्न बताकर हजारों से लाखों रुपये में बेचता था। मिरगांव में बने उसके मंदिर का उपयोग वह संपन्न और प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाने के अड्डे के रूप में करता था। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के धार्मिक ढोंग से जुड़े मामलों में आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत धोखाधड़ी और शोषण की अनेक धाराओं में मुकदमा चल सकता है।

Ashok Kharat: ब्लैकमेलिंग नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें और कौन शामिल थे?

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तथाकथित आस्था के कारोबार में खरात के अलावा और कितने लोग सक्रिय थे। ब्लैकमेलिंग और उगाही की इस श्रृंखला की सभी कड़ियों को जोड़ने का काम अभी जारी है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि कोई भी व्यक्ति अकेले इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चला सकता। खरात के पास मिली पेन ड्राइव और दस्तावेजों में अनेक नाम और संपर्क सूत्र हो सकते हैं जो इस नेटवर्क के विस्तार को उजागर करेंगे। जांच जैसे जैसे आगे बढ़ेगी नए नामों के सामने आने की संभावना से पुलिस इनकार नहीं कर रही है।

Ashok Kharat: इस मामले का समाज पर क्या संदेश और प्रभाव है?

अशोक खरात जैसे मामले समाज को यह याद दिलाते हैं कि आस्था और विश्वास का दोहन करने वाले लोग किस तरह सोच समझकर अपना शिकार चुनते हैं। वे विशेषकर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो किसी कठिनाई या मानसिक परेशानी में होते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को सामने आने में समय लगता है क्योंकि ब्लैकमेलिंग और सामाजिक शर्म का डर उन्हें चुप रखता है। इसीलिए इस प्रकार के नेटवर्क वर्षों तक बिना किसी बाधा के चलते रहते हैं।

निष्कर्ष

अशोक खरात का मामला महाराष्ट्र में धार्मिक आस्था की आड़ में चलने वाले अपराधों की एक गंभीर परत को उजागर करता है। 500 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित संपत्ति और 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो यह बताते हैं कि यह सब एक दिन में नहीं बना बल्कि वर्षों की सुनियोजित ठगी का परिणाम है।

इस मामले का सबसे बड़ा सबक यह है कि नागरिकों को किसी भी व्यक्ति की दैवीय शक्तियों के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति धार्मिक अनुष्ठान या ज्योतिष के नाम पर असामान्य मांगें करे तो तत्काल पुलिस को सूचित करना ही सबसे सही कदम है।

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