अहमदाबाद विमान हादसा मामले में मृत पायलट के रिश्तेदार को समन, पायलट संगठन ने की कड़ी आपत्ति
मृतक पायलट के रिश्तेदार को समन, पायलट फेडरेशन ने AAIB को कानूनी नोटिस भेजा
Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे की जांच अब विवादों में घिर गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने मृतक पायलट के एक रिश्तेदार को समन भेजा है। इस कदम का फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने कड़ा विरोध किया है और जांच एजेंसी को कानूनी नोटिस भेज दिया है।
किसे मिला समन
जांच एजेंसी ने कैप्टन वरुण आनंद को समन भेजा है। वे एयर इंडिया फ्लाइट 171 के मृतक कैप्टन सुमीत सभरवाल के रिश्तेदार हैं। एयर इंडिया ने कैप्टन आनंद को सूचित किया कि उन्हें जांच में पेश होने के लिए बुलाया गया है। लेकिन पायलट्स की संस्था का कहना है कि जांच एजेंसी (Ahmedabad Plane Crash) ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कैप्टन आनंद को क्यों बुलाया जा रहा है। उन्हें किस आधार पर गवाह माना जा रहा है, यह भी साफ नहीं है।
Ahmedabad Plane Crash: पायलट संगठन की आपत्ति

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो को कानूनी नोटिस जारी कर दिया है। संगठन ने इस कदम को अनुचित और गैरकानूनी बताया है। फेडरेशन का तर्क है कि कैप्टन वरुण आनंद का उस दुर्घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। वे न तो उस फ्लाइट (Ahmedabad Plane Crash) की योजना में शामिल थे और न ही दुर्घटना स्थल पर मौजूद थे। वे किसी भी तरह के गवाह नहीं हैं। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि कैप्टन आनंद को सिर्फ इसलिए बुलाया जा रहा है क्योंकि वे मृतक पायलट के रिश्तेदार हैं। यह प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है।
क्या है आशंका
पायलट फेडरेशन को आशंका है कि जांच एजेंसी पहले से ही एक निष्कर्ष पर पहुंच चुकी है। उन्हें लगता है कि जांचकर्ता पूरी जिम्मेदारी मृत पायलटों (Ahmedabad Plane Crash) पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। फेडरेशन का मानना है कि यह रवैया निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के खिलाफ है। जांच में सभी पहलुओं को देखा जाना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने की कोशिश की जाए। खासकर जब मृत पायलट अपना पक्ष रखने के लिए जीवित नहीं हैं, तब उन पर आरोप लगाना और भी गलत है। फेडरेशन चाहता है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
Ahmedabad Plane Crash:अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला
पायलट संगठन ने इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के नियमों का हवाला दिया है। आईसीएओ वैश्विक विमानन के नियम बनाने वाली संस्था है। फेडरेशन के अनुसार, आईसीएओ के दिशानिर्देशों में स्पष्ट है कि विमान दुर्घटना (Ahmedabad Plane Crash) की जांच में परिवार के सदस्यों को गवाह के रूप में नहीं बुलाया जा सकता। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत है। हालांकि इन आपत्तियों के बावजूद, कैप्टन वरुण आनंद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच में पेश होने को तैयार हैं। वे सहयोग करना चाहते हैं लेकिन प्रक्रिया सही होनी चाहिए।
कैसे हुआ था हादसा
यह भयानक हादसा (Ahmedabad Plane Crash) 12 जून को हुआ था। एयर इंडिया की फ्लाइट 171 अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रही थी। विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद विमान नियंत्रण से बाहर हो गया। वह तेजी से नीचे गिरा और अहमदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास से जा टकराया। टक्कर इतनी भयंकर थी कि विमान पूरी तरह नष्ट हो गया और इमारत का एक हिस्सा भी ढह गया।
इस दुर्घटना में विमान में सवार 229 यात्री और सभी 12 क्रू मेंबर मारे गए। मेडिकल कॉलेज की इमारत में 29 लोगों की मौत हुई। कुल मिलाकर 260 लोगों की जान चली गई। चमत्कारिक रूप से सिर्फ एक यात्री बच गया।
Ahmedabad Plane Crash: जांच की स्थिति और एयर इंडिया की भूमिका
हादसे (Ahmedabad Plane Crash) के बाद से एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो जांच कर रहा है। जांच टीम ने ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया है और उसका विश्लेषण किया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विमान में तकनीकी खराबी की संभावना जताई गई थी। लेकिन अभी तक अंतिम कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है।
एयर इंडिया ने कहा है कि वह पूरी तरह से जांच में सहयोग कर रही है। कंपनी ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है। हालांकि एयरलाइन पर भी सवाल उठे हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि विमान के रखरखाव में कमी थी, लेकिन एयर इंडिया ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि विमान की पूरी जांच हो चुकी थी और सभी सुरक्षा मानक पूरे किए गए थे।
निष्कर्ष: यह मामला अब और जटिल होता जा रहा है। पायलट संगठन का कानूनी नोटिस जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटना की जांच में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। यह भारतीय विमानन इतिहास की सबसे भयानक दुर्घटनाओं में से एक है और पीड़ित परिवार सच जानना चाहते हैं कि आखिर हुआ क्या था।
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