गौतम अदाणी का ₹1500 करोड़ का मेगा प्लान, लखनऊ-अहमदाबाद-जयपुर समेत छह हवाई अड्डों का कायापलट, बॉन्ड से जुटाएंगे रकम

लखनऊ-अहमदाबाद-जयपुर समेत 6 हवाई अड्डों पर मेगा विस्तार, 3 साल के बॉन्ड से जुटाएगी राशि

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Adani Airport Expansion: अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी के एविएशन कारोबार ने एक बार फिर बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने अपने नियंत्रण वाले देशभर के छह प्रमुख हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर उन्नत करने के लिए 1500 करोड़ रुपये जुटाने का फैसला किया है। कंपनी यह राशि तीन साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी करके एकत्रित करेगी, जिन पर 8.45 फीसदी सालाना ब्याज दिया जाएगा और हर तिमाही में ब्याज का भुगतान किया जाएगा। यह कदम अदाणी समूह की आक्रामक विस्तार नीति और भारतीय हवाई अड्डा क्षेत्र में उनकी बढ़ती पकड़ का ताजा उदाहरण है।

Adani Airport Expansion: किन छह हवाई अड्डों का होगा कायापलट?

इस महत्वाकांक्षी योजना के दायरे में देश के छह बड़े शहरों के हवाई अड्डे शामिल हैं। इनमें गुजरात का अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश का लखनऊ, राजस्थान का जयपुर, कर्नाटक का मंगलुरु, असम का गुवाहाटी और केरल का तिरुवनंतपुरम शामिल है। इन सभी शहरों की एक समान विशेषता यह है कि ये या तो राज्यों की राजधानियां हैं या फिर अपने-अपने क्षेत्र के सबसे प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र। ऐसे में इन हवाई अड्डों पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और मौजूदा अवसंरचना विस्तार की मांग कर रही है।

अदाणी समूह ने पिछले कुछ वर्षों में इन सभी हवाई अड्डों का संचालन अपने हाथ में लिया है और शुरुआती दौर में यात्री सुविधाओं में सुधार, नई तकनीक का इस्तेमाल और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर काम किया। अब 1500 करोड़ रुपये की यह नई फंडिंग इन एयरपोर्ट्स के भौतिक विस्तार, नए टर्मिनल निर्माण, रनवे अपग्रेड और अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना पर खर्च की जाएगी।

बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाने का क्या है तरीका?

अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स इस बार डेट मार्केट यानी ऋण बाजार का सहारा ले रही है। कंपनी तीन साल की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड निवेशकों को बेचेगी, जिन पर सालाना 8.45 फीसदी की ब्याज दर तय की गई है। खास बात यह है कि ब्याज का भुगतान सालाना नहीं बल्कि हर तीन महीने में किया जाएगा, जो निवेशकों के लिए नियमित आय का एक आकर्षक विकल्प बनाता है।

सूत्रों के अनुसार इस पूरी धन उगाही को समूह स्तर पर एक सीमित और नियंत्रित ढांचे में अंजाम दिया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि सभी छह हवाई अड्डों को एक साझा वित्तीय ढांचे में बांधा गया है और इस व्यवस्था में अतिरिक्त कर्ज लेने पर प्रतिबंध रहेगा। यह कदम निवेशकों को भरोसा देने के लिए उठाया गया है ताकि उन्हें यह सुनिश्चित हो सके कि उनका पैसा सुरक्षित है और कंपनी पर अनावश्यक ऋण का बोझ नहीं बढ़ेगा।

इन बॉन्ड की व्यवस्था ट्रस्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स द्वारा संभाली जा रही है और इंडिया रेटिंग्स ने इन प्रस्तावित बॉन्ड को एए माइनस की साख रेटिंग प्रदान की है। एए माइनस रेटिंग का अर्थ है कि ये बॉन्ड उच्च गुणवत्ता की श्रेणी में आते हैं और समय पर भुगतान की संभावना काफी मजबूत है।

Adani Airport Expansion: यात्री क्षमता दोगुनी होने का अनुमान, 2030 तक बड़ा लक्ष्य

इंडिया रेटिंग्स की विश्लेषण रिपोर्ट से पता चलता है कि अदाणी समूह के अधीन इन छह हवाई अड्डों की वर्तमान संयुक्त सालाना यात्री क्षमता लगभग 3.9 करोड़ है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2030 तक यह क्षमता दोगुनी होकर करीब 7.8 करोड़ यात्रियों तक पहुंच सकती है। भारतीय विमानन उद्योग में पिछले कुछ वर्षों में जिस रफ्तार से वृद्धि हुई है और मध्यम वर्ग में हवाई यात्रा की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए यह अनुमान अतिशयोक्ति नहीं लगता।

अहमदाबाद एयरपोर्ट गुजरात के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है और वहां अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू दोनों उड़ानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लखनऊ और जयपुर जैसे शहर भी पर्यटन और कारोबारी यात्राओं के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। गुवाहाटी पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार है और तिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी होने के नाते अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, विशेषकर खाड़ी देशों से आने-जाने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मंगलुरु भी तटीय कर्नाटक का प्रमुख हवाई अड्डा है जहां यात्री संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है।

अदाणी समूह की ऋण बाजार में बढ़ती सक्रियता

यह बॉन्ड जारी करने की योजना किसी इकलौती घटना नहीं है बल्कि अदाणी समूह की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। हाल के महीनों में समूह ने घरेलू ऋण बाजार में अपनी मौजूदगी काफी तेजी से बढ़ाई है। इसी फरवरी में अदाणी पावर ने 7500 करोड़ रुपये नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी के माध्यम से जुटाने की घोषणा की है। पिछले सवा साल के दौरान समूह की पांच अलग-अलग कंपनियों ने मिलकर लगभग 14000 से 15000 करोड़ रुपये की धनराशि ऋण बाजार से एकत्रित की है।

अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स का यह कदम नया भी नहीं है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भी 400 करोड़ रुपये के एनसीडी जारी किए थे, जिनकी परिपक्वता 2027 से 2029 के बीच है। उस राशि का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स की जरूरतों को पूरा करने में किया गया था। अब 1500 करोड़ रुपये की नई योजना से स्पष्ट है कि कंपनी पूंजी जुटाने के पैमाने को काफी बड़ा कर रही है।

Adani Airport Expansion: भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए क्या मायने रखता है यह विस्तार

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में हवाई अड्डों की क्षमता का विस्तार समय की मांग है। अदाणी समूह का यह निवेश न केवल इन छह शहरों में यात्रा सुविधाओं को बेहतर बनाएगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार सृजन को भी गति देगा।

हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण होने से यात्रियों को तेज चेक-इन, बेहतर लाउंज, बढ़ी हुई पार्किंग क्षमता और उन्नत सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ने से इन शहरों से माल ढुलाई भी आसान होगी, जो व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी।

क्या निवेशकों के लिए आकर्षक है यह बॉन्ड?

8.45 फीसदी ब्याज दर के साथ तिमाही भुगतान और एए माइनस रेटिंग — ये तीनों बातें मिलकर इन बॉन्ड को बाजार में एक प्रतिस्पर्धी निवेश विकल्प बनाती हैं। मौजूदा समय में जब बैंक एफडी पर ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम हैं, तब 8.45 फीसदी का रिटर्न निश्चित आय चाहने वाले निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। हालांकि बॉन्ड निवेश में क्रेडिट रिस्क और लिक्विडिटी रिस्क जैसे कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर गौतम अदाणी की यह योजना भारतीय विमानन अवसंरचना में बड़े निजी निवेश की कहानी का अगला अध्याय है। छह शहरों में एक साथ विस्तार करने का यह कदम बताता है कि अदाणी समूह हवाई अड्डा कारोबार को अपने साम्राज्य का एक स्थायी और मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। निवेश संबंधी निर्णय अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह से लें।)

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