एलपीजी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम: एथनॉल को रसोई ईंधन के रूप में विकसित करने पर जोर, IIT और पेट्रोलियम कंपनियों का शोध तेज, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
एथनॉल स्टोव पर शोध तेज, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की ओर बड़ा कदम
Ethanol fuel: पेट्रोलियम कंपनियों ने उद्योग जगत के दिग्गजों से एथनॉल को भारतीय परिवारों के लिए एक स्वच्छ रसोई ईंधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) का मानना है कि इससे आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने और जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिशों को बल मिलेगा।
Ethanol fuel: एथनॉल आधारित रसोई स्टोव पर शोध
फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) के निदेशक (डाउनस्ट्रीम) आर. एस. रवि ने ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह अपील की। आर. एस. रवि ने एथनॉल आधारित रसोई स्टोव पर जारी शोध पर प्रकाश डाला और कहा कि एलपीजी उपकरण अनुसंधान केंद्र और अलग-अलग भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में इस दिशा में काफी काम हो रहा है।
Ethanol fuel: E-20 की सफलता और एलपीजी संकट
पेट्रोलियम कंपनियों की यह अपील पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E-20) के सफल कार्यान्वयन की पृष्ठभूमि में आई है। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैस की किल्लत भी हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने देश को एलपीजी पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। वर्तमान में एलपीजी सप्लाई के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है जबकि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है।
Ethanol fuel: एथनॉल उपयोग के प्रमुख प्रभाव और लाभ
एथनॉल का उपयोग करने से कई महत्वपूर्ण लाभ हो सकते हैं:
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आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम होगी।
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देश में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
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स्थानीय स्तर पर एथनॉल का उत्पादन बढ़ेगा।
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ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।
हाल के दिनों में एलपीजी की कमी से फैक्टरियों और कमर्शियल उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
Ethanol fuel: आपूर्ति श्रृंखला और मॉडल में बदलाव
आर. एस. रवि ने दो प्रमुख मोर्चों पर सक्रिय सहयोग की मांग की है:
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एथनॉल से चलने वाले स्टोव के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विनिर्माताओं के साथ जुड़ना।
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सीधे घरों तक एथनॉल पहुंचाने के लिए एक व्यावहारिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथनॉल रसोई ईंधन के रूप में एक बड़ी क्रांति ला सकता है। यह न केवल एलपीजी पर निर्भरता घटाएगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। एथनॉल एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जो गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से प्राप्त किया जा सकता है।
Ethanol fuel: प्रोटोटाइप और वितरण की योजना
पेट्रोलियम कंपनियां अब एथनॉल से चलने वाले रसोई स्टोव के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। इसके लिए विनिर्माताओं के साथ साझेदारी की जा रही है। आर. एस. रवि ने कहा कि इन स्टोव के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विनिर्माताओं के साथ जुड़ना और सीधे घरों तक एथनॉल पहुंचाने के लिए एक व्यावहारिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना आवश्यक है। अब तक उद्योग पेट्रोलियम कंपनियों को थोक में आपूर्ति कर रहा है लेकिन अब इस मॉडल को बदलने की जरूरत है।
निष्कर्ष
भारत में एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल का उपयोग एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। पेट्रोलियम कंपनियों की यह पहल पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगी। यदि एथनॉल आधारित रसोई स्टोव सफलतापूर्वक विकसित होकर बाजार में उपलब्ध होते हैं, तो यह आम परिवारों के लिए एक नई और सस्ती ऊर्जा क्रांति ला सकता है।
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