8th Pay Commission Updates: 8वें वेतन आयोग के सामने उठी न्यूनतम पेंशन 45000 रुपये करने की मांग, जानें अन्य बड़े प्रस्ताव

8th Pay Commission Updates: 8वें वेतन आयोग के सामने उठी न्यूनतम पेंशन 45000 रुपये करने की मांग, जानें अन्य बड़े प्रस्ताव

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8th Pay Commission Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद अब रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस बीच भारत पेंशनर्स समाज ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष एक बड़ा प्रस्ताव रखते हुए न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर पैंतालीस हजार रुपये करने की मांग उठाई है। संगठन का तर्क है कि देश में लगातार बढ़ रहे खर्चों और महंगाई के स्तर को देखते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वित्तीय रूप से मजबूत सुरक्षा प्रदान किया जाना बेहद आवश्यक है ताकि वे बुढ़ापे में एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

8th Pay Commission Updates: आठवें वेतन आयोग का गठन और रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा

केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में संशोधन के लिए हर दस साल के अंतराल पर नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है। इसी कड़ी में आठवें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन तीन नवंबर दो हजार पच्चीस को किया गया था, जिसके पास सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कुल अठारह महीने का समय तय किया गया है। अब इस आयोग के कार्यकाल के शुरुआती नौ महीने बीत चुके हैं और बाकी बचे नौ महीनों के भीतर इसे अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करनी हैं। आयोग की इन सिफारिशों के आधार पर ही केंद्र सरकार भविष्य में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन ढांचे पर अंतिम फैसला लेगी।

महंगाई भत्ते के नियमों में बदलाव और हर तीन महीने में बढ़ोतरी की मांग

मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को साल भर में केवल दो बार यानी छह महीने के अंतराल पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का लाभ मिलता है। हालांकि भारत पेंशनर्स समाज ने इस समयावधि पर आपत्ति जताते हुए मांग की है कि डीए में इजाफा हर तीन महीने में किया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि वर्तमान दौर में महंगाई जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए छह महीने का लंबा इंतजार करना पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है। इसके अलावा संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि महंगाई भत्ता पच्चीस प्रतिशत तक पहुंचते ही उसका मूल वेतन में विलय कर दिया जाना चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव

कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, जिसे लेकर इस बार बहुत बड़ी मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठनों की ओर से आठवें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर तीन दशमलव आठ तीन करने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन जो वर्तमान में अठारह हजार रुपये है, वह बढ़कर सीधे उनहत्तर हजार रुपये तक पहुंच सकता है। इस संभावित बढ़ोतरी से देश भर के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतनमान में ऐतिहासिक उछाल आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

8th Pay Commission Updates: फैमिली यूनिट के दायरे में बदलाव और माता-पिता को शामिल करने की मांग

वेतन और पेंशन के अलावा पारिवारिक इकाइयों के गठन और उनके दायरे को लेकर भी आयोग के सामने महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। मौजूदा समय में सरकारी नियमों के अनुसार फैमिली यूनिट की संख्या तीन तय की गई है, जिसे बढ़ाकर पांच दशमलव दो करने की पुरजोर मांग की गई है। इसके पीछे मुख्य तर्क यह दिया गया है कि इस नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के आश्रित माता-पिता को भी फैमिली यूनिट के दायरे में जोड़ा जाना चाहिए। इस बदलाव से बुजुर्ग माता-पिता को स्वास्थ्य और अन्य पारिवारिक लाभ मिलने में काफी आसानी होगी, जिससे कर्मचारियों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम हो सकेगा।

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