46 साल का इंतजार खत्म, 31 मार्च तक पूरा होगा शाहपुर कांडी डैम, रावी का एक-एक बूंद पानी रोकेगा भारत, पाकिस्तान की बढ़ेंगी मुश्किलें

रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा, जम्मू-कश्मीर-पंजाब में 32,000+ हेक्टेयर सिंचाई, पाकिस्तान को गर्मियों में सूखे का खतरा

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Shahpurkandi Dam Project: भारत ने पाकिस्तान को एक और बड़ा रणनीतिक झटका देने की तैयारी पूरी कर ली है। रावी नदी पर बन रहा शाहपुर कांडी डैम प्रोजेक्ट 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा। इसके बाद रावी का अतिरिक्त पानी जो अब तक पाकिस्तान की ओर बह जाता था, अब पूरी तरह से रोक लिया जाएगा। इस पानी का उपयोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सिंचाई के लिए किया जाएगा। यह 1979 में परिकल्पित 46 साल पुराने सपने का साकार होना है, जो राजनीतिक उपेक्षा और पंजाब-जम्मू-कश्मीर के बीच विवादों के कारण दशकों तक अटका रहा। इस डैम के चालू होने के बाद पाकिस्तान को गर्मियों में गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उसकी कृषि और शहरी जलापूर्ति काफी हद तक सिंधु नदी सिस्टम पर निर्भर है।

Shahpurkandi Dam Project: 46 साल का अधूरा सपना अब होगा पूरा

रावी नदी पर शाहपुर कांडी डैम प्रोजेक्ट की परिकल्पना सबसे पहले 1979 में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रावी नदी के उस अतिरिक्त पानी को रोकना था जो भारत में स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण बेकार बहकर पाकिस्तान चला जाता था। 1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी – के पानी पर पूर्ण अधिकार दिया गया था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह अधिकार कागजों तक ही सीमित रह गया था।

इस समस्या के समाधान के लिए पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए रंजीत सागर डैम (ऊपर की ओर) और शाहपुर कांडी बैराज (नीचे की ओर) बनाने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच 1979 में एक समझौता हुआ।

1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। यह एक ऐतिहासिक क्षण था क्योंकि यह भारत के जल संसाधनों के उपयोग की दिशा में एक निर्णायक कदम था। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसके बाद के वर्षों में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच भूमि, मुआवजे और लाभों के बंटवारे को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो गए।

इन विवादों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट 46 साल तक अटका रहा। कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन कोई भी इस परियोजना को पूरा करने में गंभीर रुचि नहीं दिखा पाई। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट में सीधे हस्तक्षेप किया और दोनों राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए ठोस प्रयास किए।

केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद इस परियोजना पर काम ने तेज रफ्तार पकड़ी। अब यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है और 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा।

32,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई होगी संभव

जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने इस डैम प्रोजेक्ट को लेकर हाल ही में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से सूखे से जूझ रहे कठुआ और सांबा जिलों में सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया जा रहा है।

शाहपुर कांडी डैम प्रोजेक्ट से कुल 32,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई संभव होगी। इसमें से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की लगभग 27,000 हेक्टेयर भूमि को लाभ मिलेगा। वहीं पंजाब में पठानकोट और गुरदासपुर जिलों की लगभग 5,000 हेक्टेयर से अधिक खेती योग्य भूमि को इससे फायदा होगा।

यह क्षेत्र परंपरागत रूप से बारिश पर निर्भर रहे हैं और अक्सर सूखे की स्थिति का सामना करते रहे हैं। शाहपुर कांडी डैम से इन क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

मंत्री जावेद राणा ने स्पष्ट किया कि इस डैम का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की ओर जाने वाले अतिरिक्त पानी के प्रवाह को रोकना और जम्मू-कश्मीर की जनता को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है।

Shahpurkandi Dam Project: पाकिस्तान पर क्या होगा प्रभाव?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है और देश की लगभग 80 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। रावी नदी इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत द्वारा रावी का अतिरिक्त पानी रोके जाने से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत, जो उसका सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध प्रांत है, में सिंचाई व्यवस्था पर सीधा प्रहार होगा। लाहौर, मुल्तान, फैसलाबाद और सियालकोट जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

पाकिस्तान के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की कमी से गेहूं, चावल, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन घट सकता है। इससे पाकिस्तान की पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बड़ा झटका लगेगा।

पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा देश है। विश्व बैंक और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान को “पानी की कमी वाले देश” (water-stressed country) की श्रेणी में रखा है। शाहपुर कांडी डैम के चालू होने से यह समस्या और गंभीर हो जाएगी।

विशेष रूप से गर्मियों के महीनों में जब पानी की मांग अधिक होती है, पाकिस्तान को गंभीर सूखे और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

सिंधु जल संधि का कोई उल्लंघन नहीं

यह महत्वपूर्ण है कि भारत का यह कदम 1960 की सिंधु जल संधि का कोई उल्लंघन नहीं है। इस संधि के तहत छह नदियों – सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज – का पानी भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया था।

तीन पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – का 80 प्रतिशत से अधिक पानी पाकिस्तान को दिया गया। वहीं तीन पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी – के पानी पर भारत का पूर्ण और बिना शर्त अधिकार दिया गया।

संधि के अनुसार, भारत इन पूर्वी नदियों के पानी का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकता है – चाहे वह सिंचाई हो, बिजली उत्पादन हो या पेयजल आपूर्ति। भारत को इन नदियों पर बांध और बैराज बनाने का भी पूरा अधिकार है।

अब तक भारत में पर्याप्त स्टोरेज और सिंचाई बुनियादी ढांचे की कमी के कारण रावी का काफी पानी बेकार बहकर पाकिस्तान चला जाता था। शाहपुर कांडी डैम इसी बर्बादी को रोकने के लिए बनाया जा रहा है।

इसलिए भारत का यह कदम पूरी तरह कानूनी और संधि के अनुरूप है। पाकिस्तान इस पर कोई आपत्ति नहीं उठा सकता क्योंकि सिंधु जल संधि भारत को यह अधिकार स्पष्ट रूप से देती है।

Shahpurkandi Dam Project: आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा रुख

शाहपुर कांडी डैम का चालू होना भारत की पाकिस्तान के प्रति बदली हुई नीति का हिस्सा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब “बिजनेस एज यूजुअल” की नीति नहीं अपनाएगा।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। यह एक ऐतिहासिक निर्णय था क्योंकि यह संधि 1960 से लगातार बनी हुई थी और 1965, 1971 और 1999 के युद्धों के दौरान भी इसका पालन किया गया था। भारत ने साफ किया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक वह पानी के मामले में भी उदारता नहीं दिखाएगा।

इसी नीति के तहत भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर कई हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स पर काम तेज कर दिया है। रातले, पाकल दुल और किरू जैसी परियोजनाओं के 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है। इनसे न केवल भारत को बिजली मिलेगी बल्कि पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

इसके अलावा, भारत झेलम नदी पर लंबे समय से रुके हुए वुलर बैराज प्रोजेक्ट पर भी काम फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है। यह बैराज झेलम के पानी को स्टोर और रेगुलेट करने में मदद करेगा।

पाकिस्तान की बढ़ती चिंताएं

पाकिस्तान में भारत के इन कदमों को लेकर गहरी चिंता है। पाकिस्तानी मीडिया और राजनेताओं ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है और भारत पर “जल युद्ध” छेड़ने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के जल संसाधन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत अपनी सभी योजनाओं को लागू करता है, तो पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता 20-30 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग कर रहा है और पाकिस्तान के पास इस पर आपत्ति करने का कोई आधार नहीं है।

शाहपुर कांडी डैम का 31 मार्च तक चालू होना न केवल भारत के जल संसाधन प्रबंधन में एक मील का पत्थर होगा बल्कि पाकिस्तान के लिए एक गंभीर चुनौती भी बनेगा। यह भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और रणनीतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है कि 46 साल पुराना यह सपना अब साकार होने जा रहा है।

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