कानपुर में 103 फर्जी डिग्रियों का पर्दाफाश! 5 यूनिवर्सिटी की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

5 यूनिवर्सिटी की जांच में 103 डिग्रियां पूरी तरह नकली, 7 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा

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Kanpur fake degree scam: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा शिक्षा घोटाला सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। फर्जी डिग्रियों के इस बड़े कारोबार की जांच कर रही SIT को अब तक 103 डिग्रियां पूरी तरह नकली मिल चुकी हैं। फरीदाबाद और हापुड़ की दो यूनिवर्सिटी ने साफ लिखकर दे दिया है कि उनके यहां से ये डिग्रियां कभी जारी ही नहीं हुईं। इस खुलासे के बाद अब SIT की नजर तीन और यूनिवर्सिटीज पर टिकी है और पूरे मामले में 7 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का भी पता चला है।

Kanpur fake degree scam: कैसे हुआ पूरे मामले का भंडाफोड़?

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कानपुर की किदवई नगर पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली:

  • छापेमारी: पुलिस ने गौशाला चौराहे के नजदीक स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन नामक संस्थान पर छापा मारा।

  • गिरफ्तारी: इस छापेमारी में चार युवकों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

  • नेटवर्क: जांच में सामने आया कि यह महज चार लोगों का काम नहीं था बल्कि एक बेहद संगठित और सुनियोजित गिरोह था। इनके पास से 9 अलग-अलग राज्यों की 15 यूनिवर्सिटी से संबंधित 900 से भी अधिक फर्जी डिग्रियां, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रमाण पत्र बरामद हुए। यह गिरोह वर्ष 2012 से यानी करीब 13 साल से यह अवैध धंधा चला रहा था।

Kanpur fake degree scam: कौन है इस गिरोह का मास्टरमाइंड?

पुलिस जांच में इस सिंडिकेट के मुख्य चेहरों का खुलासा हुआ है:

  • शैलेंद्र कुमार ओझा: इस पूरे फर्जीवाड़े की कमान ओझा के हाथ में थी, जो ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ का संचालन करता था और उसी के नाम पर बैंक खाता भी खुला हुआ था।

  • अन्य गिरफ्तारियां: नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा।

  • फरार आरोपी: छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे की तलाश SIT और सर्विलांस टीम लगातार कर रही है।

Kanpur fake degree scam: SIT की पांच टीमें पांच यूनिवर्सिटी में पहुंचीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने अपनी पांच अलग-अलग टीमों को इन यूनिवर्सिटीज में जांच के लिए भेजा:

यूनिवर्सिटी का नाम स्थान बरामदगी (मार्कशीट/डिग्री)
लिंग्या यूनिवर्सिटी फरीदाबाद 100 मार्कशीट
मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ 3 डिग्रियां
मंगलायतन यूनिवर्सिटी अलीगढ़ 40 मार्कशीट
जेएस यूनिवर्सिटी शिकोहाबाद 11 डिग्रियां
ग्लोकल यूनिवर्सिटी सहारनपुर 2 मार्कशीट

Kanpur fake degree scam: दो यूनिवर्सिटी ने खारिज की अपनी डिग्रियां

SIT जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब लिंग्या यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) और मोनाड यूनिवर्सिटी (हापुड़) के प्रबंधन ने लिखित में स्पष्ट कर दिया कि उनके संस्थान से ये डिग्रियां कभी जारी नहीं की गई हैं।

निष्कर्ष: लिंग्या की 100 और मोनाड की 3 डिग्रियां यानी कुल 103 डिग्रियां पूरी तरह फर्जी साबित हो चुकी हैं। अपराध शाखा अब यह मानकर चल रही है कि बाकी निजी यूनिवर्सिटीज से बरामद डिग्रियां भी फर्जी ही निकलेंगी। अलीगढ़, फिरोजाबाद और सहारनपुर गई टीमों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

Kanpur fake degree scam: CSJMU से मांगी गई 357 डिग्रियों की जानकारी

बरामद हुई डिग्रियों में कानपुर विश्वविद्यालय (CSJMU) की 357 डिग्रियां भी शामिल हैं:

  • SIT की मांग: विश्वविद्यालय प्रशासन से इन डिग्रियों का पूरा डाटा और विश्वविद्यालय में कार्यरत बाबुओं की संख्या की जानकारी मांगी गई है।

  • विश्वविद्यालय का पक्ष: उधर विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उन्हें बरामद डिग्रियां पहले उपलब्ध कराई जाएं, तब वे पूरा रिकॉर्ड खंगालकर डाटा दे सकते हैं। इस मामले में विश्वविद्यालय की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

Kanpur fake degree scam: 7 करोड़ के लेनदेन ने खोले कई राज

SIT ने जब शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के नाम पर खुले बैंक खाते की जांच की, तो वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया:

  • टाइमलाइन: वर्ष 2021 से 2025 के बीच (केवल पांच साल)।

  • ट्रांजेक्शन: मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा के खाते में करीब 7 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ।

  • जांच का बिंदु: अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि इन 7 करोड़ रुपयों को कहां-कहां भेजा गया और किन लोगों से ये पैसे आए। बैंक ट्रांजेक्शन की जांच से और कई नामों के सामने आने की संभावना है।

Kanpur fake degree scam: फर्जी डिग्री लेने वाले भी जांच के दायरे में

SIT के सामने अब एक बड़ी चुनौती उन खरीदारों की पहचान करना है जिन्होंने इन डिग्रियों का इस्तेमाल नौकरियों में किया:

  • पहचान प्रक्रिया: 2012 से अब तक बेची गई सभी डिग्रियों की जांच होना जरूरी है।

  • आधिकारिक बयान: संयुक्त पुलिस आयुक्त संकल्प शर्मा ने बताया कि दो यूनिवर्सिटी ने लिखित पुष्टि कर दी है और बाकी की रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।

Kanpur fake degree scam: शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ एक गिरोह की करतूत नहीं है बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। 9 राज्यों और 15 यूनिवर्सिटीज तक फैला यह नेटवर्क बताता है कि फर्जी डिग्री का यह धंधा कितने बड़े पैमाने पर चल रहा था। अब जरूरत है कि सरकार डिग्री सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक कड़ा और डिजिटल बनाए ताकि भविष्य में ऐसे घोटाले न हो सकें।

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