जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में 19% की बढ़ोतरी कर ग्राहकों को दिया झटका, अब हर ऑर्डर पर देने होंगे 14.90 रुपये, रोजाना कंपनी को होगी लाखों की अतिरिक्त कमाई, उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर

19% बढ़ोतरी, हर ऑर्डर महंगा, कंपनी की कमाई में उछाल

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Zomato platform fee hike: अगर आप रोज जोमैटो से खाना मंगाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। फूड डिलीवरी की दुनिया में एक बार फिर बदलाव आया है और इस बार आपकी जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है।

Zomato platform fee hike: जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में कितनी बढ़ोतरी की है

जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस को 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। यह बढ़ोतरी लगभग 19 प्रतिशत की है, जो एक बड़ा इजाफा माना जा रहा है। यह फीस वह अतिरिक्त शुल्क है जो खाने की कीमत और डिलीवरी चार्ज के ऊपर से हर ऑर्डर पर लगाया जाता है। ग्राहक चाहे कितना भी छोटा या बड़ा ऑर्डर करें, यह शुल्क हर बार कटता है।

Zomato platform fee hike: प्लेटफॉर्म फीस क्या होती है और यह क्यों ली जाती है

प्लेटफॉर्म फीस वह शुल्क है जो फूड डिलीवरी कंपनियाँ अपने ऐप और तकनीकी सेवाओं के रखरखाव के नाम पर ग्राहकों से वसूलती हैं। इसमें ऐप के संचालन, ग्राहक सेवा और तकनीकी ढांचे की लागत शामिल होती है। जोमैटो ने पहले यह फीस बहुत कम रखी थी ताकि ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का विस्तार हुआ और परिचालन लागत बढ़ी, इस फीस में धीरे-धीरे इजाफा किया जाता रहा है।

Zomato platform fee hike: इस बढ़ोतरी से कंपनी को रोजाना कितनी अतिरिक्त कमाई होगी

विश्लेषकों के अनुमान के अनुसार जोमैटो प्रतिदिन करीब 2 करोड़ से अधिक ऑर्डर प्रोसेस करती है। प्लेटफॉर्म फीस में 2.40 रुपये की बढ़ोतरी के आधार पर कंपनी को प्रतिदिन लगभग 48 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान लगाया गया है। यह सालाना आधार पर करोड़ों रुपये की अतिरिक्त आय बनती है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम कंपनी की लाभप्रदता सुधारने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

Zomato platform fee hike: क्या जोमैटो ने पहले भी फीस बढ़ाई है

हाँ, जोमैटो ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव किए हैं। शुरुआत में यह फीस मात्र 2 से 3 रुपये थी और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर पहले 5 रुपये, फिर 7 रुपये और उसके बाद 12.50 रुपये किया गया था। फिनटेक और डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति उद्योग में सामान्य है। पहले ग्राहकों को छूट और सुविधाओं से लुभाया जाता है और जब बाजार में पकड़ मजबूत हो जाती है, तब धीरे-धीरे शुल्क बढ़ाए जाते हैं।

Zomato platform fee hike: मिडिल ईस्ट के संकट का फूड डिलीवरी उद्योग पर क्या असर है

मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण गैस आपूर्ति की श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका असर एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है और सरकार ने कमर्शियल गैस की आपूर्ति को सीमित करके घरेलू उपभोग को प्राथमिकता दी है। रेस्तराँ और खाद्य उद्योग के लिए गैस की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण संसाधन है। इस संकट के कारण रसोई संचालन की लागत बढ़ी है, जिसका असर अंततः फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की समग्र लागत संरचना पर भी पड़ रहा है।

Zomato platform fee hike: जोमैटो कंपनी की पृष्ठभूमि क्या है

जोमैटो की स्थापना 2008 में दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने की थी। आज यह भारत की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों में से एक है और देश के सैकड़ों शहरों में इसकी सेवाएं उपलब्ध हैं। कंपनी 2021 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी और तब से इसने कई अधिग्रहण और विस्तार किए हैं। ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स सेवा भी अब जोमैटो के पोर्टफोलियो का हिस्सा है।

Zomato platform fee hike: ग्राहकों पर इस बढ़ोतरी का कुल बोझ कितना होगा

अगर कोई ग्राहक महीने में 20 बार जोमैटो से ऑर्डर करता है तो पहले की तुलना में अब उसे प्रतिमाह लगभग 48 रुपये अधिक देने होंगे। यह राशि भले ही छोटी लगे, लेकिन साल भर में यह बोझ उल्लेखनीय हो जाता है। उपभोक्ता मामलों के जानकारों का कहना है कि जब एक के बाद एक शुल्क बढ़ाए जाते हैं तो ग्राहकों के लिए वैकल्पिक प्लेटफॉर्म की तुलना करना और जागरूकता से फैसला लेना जरूरी हो जाता है।

Zomato platform fee hike: क्या ग्राहकों के पास कोई विकल्प है

ग्राहक स्विगी जैसे प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे रेस्तराँ की वेबसाइट या ऐप से ऑर्डर करने पर प्लेटफॉर्म फीस बचाई जा सकती है। जोमैटो गोल्ड या प्रो सदस्यता लेने वाले ग्राहकों को कुछ छूट और सुविधाएं मिलती हैं। डिजिटल उपभोक्ता विशेषज्ञों के अनुसार नियमित उपयोगकर्ताओं के लिए सदस्यता योजना की लागत और फायदों का तुलनात्मक विश्लेषण करना समझदारी है।

निष्कर्ष

जोमैटो की प्लेटफॉर्म फीस में 19 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी एक स्पष्ट संकेत है कि भारतीय फूड डिलीवरी उद्योग अब परिपक्वता के उस दौर में पहुंच चुका है जहाँ कंपनियाँ मुनाफे को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्राहकों के लिए यह जरूरी है कि वे हर ऑर्डर से पहले कुल लागत की जाँच करें और उपलब्ध विकल्पों की तुलना करें। डिजिटल युग में जागरूक उपभोक्ता ही अपनी जेब बचा सकता है।

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