11 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता, फिर बदनामी के अंधेरे में खो गईं, अब ओटीटी की क्वीन बनकर लौटीं: श्वेता बसु प्रसाद की संघर्ष भरी कहानी
11 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली श्वेता बसु प्रसाद बदनामी के बाद ओटीटी पर शानदार कमबैक, 'मकड़ी' से 'क्रिमिनल जस्टिस' तक की प्रेरणादायक यात्रा
Shweta Basu Prasad: भारतीय सिनेमा की चकाचौंध भरी दुनिया में कई कहानियां सफलता की चमक दिखाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां संघर्ष, विवाद और कमबैक की भी होती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं अभिनेत्री श्वेता बसु प्रसाद। मात्र 11 साल की उम्र में नेशनल फिल्म अवॉर्ड अपने नाम कर उन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया था। मीडिया ट्रायल, बदनामी और गुमनामी के अंधेरे में खो जाने के बाद आज वे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की एक सशक्त अभिनेत्री के रूप में वापसी कर रही हैं। श्वेता की यह यात्रा साबित करती है कि सच्ची प्रतिभा को दबाया नहीं जा सकता।
Shweta Basu Prasad: बचपन में मिली शानदार शुरुआत और नेशनल अवॉर्ड
श्वेता बसु प्रसाद का फिल्मी सफर 2002 में शुरू हुआ, जब उन्होंने विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘मकड़ी’ में चुन्नी और मुन्नी की दोहरी भूमिका निभाई। मात्र 11 साल की उम्र में इतनी जटिल भूमिका को इतनी संवेदनशीलता और परिपक्वता से निभाना आसान नहीं था। फिल्म में उनकी अदाकारी ने पूरे देश को छू लिया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद 2005 में नagesh kukunoor की फिल्म ‘इकबाल’ में खदीजा की भूमिका ने उनकी प्रतिभा को और मजबूती दी।
विवाद का काला अध्याय: 2014 का हैदराबाद incident
सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए श्वेता के जीवन में 2014 एक चुनौतीपूर्ण साल साबित हुआ। हैदराबाद के एक होटल में पुलिस रेड के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया। मीडिया ने तुरंत उनके नाम को एक विवाद से जोड़ दिया। महज 23 साल की उम्र में इस तरह की बदनामी ने उनके करियर को गंभीर झटका दिया। हालांकि, बाद में अदालत ने मामले की जांच के बाद श्वेता को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था और वे पीड़िता थीं।
Shweta Basu Prasad: निजी जीवन की उथल-पुथल और नई शुरुआत
विवाद के बाद श्वेता ने अपनी जिंदगी को फिर से संवारने की कोशिश की। 2018 में उन्होंने फिल्म निर्माता रोहित मित्तल से शादी की। लेकिन आपसी मतभेदों के कारण महज एक साल बाद 2019 में दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। श्वेता ने सोशल मीडिया पर शांतिपूर्वक यह खबर साझा की और कहा कि वे और रोहित अब भी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। असफल विवाह के दर्द को उन्होंने अभिनय की ओर मोड़ दिया और खुद को नई चुनौतियों के लिए तैयार किया।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर comeback: नई पहचान और सफलता
श्वेता बसु प्रसाद का असली पुनरुत्थान डिजिटल दुनिया में हुआ। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने उन्हें वह जगह दी जहां वे अपनी प्रतिभा को बिना किसी दबाव के दिखा सकीं। ‘क्रिमिनल जस्टिस’ सीरीज में वकील की भूमिका, ‘इंडिया लॉकडाउन’ में महामारी के दौरान की जिंदगी, और ‘ट्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर’ में शोभा पाठक का किरदार निभाते हुए उन्होंने शानदार परफॉर्मेंस दी। आज वे ओटीटी स्पेस की क्वीन कहलाती हैं और नई पीढ़ी के दर्शकों को अपनी अदाकारी से जोड़ रही हैं।
महिलाओं की भूमिका पर विचार: IFFD 2026 में श्वेता का संदेश
मार्च 2026 में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली (IFFD) में श्वेता बसु प्रसाद ने महिलाओं के योगदान पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमा में महिलाओं ने दशकों की मेहनत से जगह बनाई है। फिल्ममेकर्स, डिजाइनर्स, थिंकर्स और क्रिएटर्स के रूप में महिलाएं सिनेमा को नई दिशा दे रही हैं। श्वेता ने युवा अभिनेत्रियों और क्रिएटर्स को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी आवाज मजबूत रखें और सार्थक कहानियां चुनें।
प्रेरणा का संदेश: हार न मानने की मिसाल
श्वेता बसु प्रसाद की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि हार न मानने वाले जज्बे की है। बचपन की सफलता, विवाद का तूफान, गुमनामी और फिर मजबूत comeback – यह सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। वे साबित करती हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन सच्ची प्रतिभा और साहस के साथ कोई भी अंधेरा स्थायी नहीं होता। आज वे न केवल अभिनय कर रही हैं बल्कि खुद को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।
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