Women Reservation Bill Amendment 2026: महिला आरक्षण जल्द लागू करने की बड़ी तैयारी, इसी सत्र में संशोधन विधेयक लाएगी सरकार, अमित शाह ने विपक्ष से शुरू की बातचीत; UP-उत्तराखंड में 2027 से होगा लागू

महिला आरक्षण जल्द लागू करने की तैयारी, सरकार इसी सत्र में संशोधन विधेयक ला सकती है

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Women Reservation Bill Amendment 2026: देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर आई है। केंद्र की मोदी सरकार महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार इसी चल रहे संसद सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य महिला कोटे को परिसीमन और जनगणना की अनिवार्य शर्त से अलग करना है।

यदि यह संशोधन पारित हो जाता है तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 से ही महिला आरक्षण लागू हो सकता है। दोनों राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस पहल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी और क्षेत्रीय दलों से संपर्क शुरू कर दिया है।

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023

इस पूरे मामले को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 क्या है। एनडीए सरकार ने 2023 में संविधान में संशोधन करके लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित किया था। यह 27 साल से लंबित महिला आरक्षण विधेयक में कुछ संशोधन करके नया नाम दिया गया था।

इस कानून को पारित करने के लिए सरकार ने संसद का विशेष सत्र भी बुलाया था। कानून बनने के बाद इसे लागू करने के लिए एक शर्त रखी गई थी कि पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और उसके बाद महिला आरक्षण लागू होगा।

क्यों अटका था महिला आरक्षण?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होना था। इसके पीछे मुख्य कारण जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्त थी।

कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो पाई। 2011 के जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण देना संभव नहीं था। इसीलिए महिला आरक्षण अटका रहा और 2029 तक इंतजार करना पड़ता।

लेकिन अब मोदी सरकार इस शर्त को हटाने का फैसला कर चुकी है। सरकार जनगणना और परिसीमन की शर्त से महिला आरक्षण को मुक्त करना चाहती है ताकि इसे जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

अमित शाह ने किन दलों से की बातचीत

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कई क्षेत्रीय और विपक्षी दलों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP, समाजवादी पार्टी यानी SP, बीजू जनता दल यानी BJD, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट, वाईएसआर कांग्रेस और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के नेता शामिल रहे।

अभी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ बैठक होनी बाकी है। महिला आरक्षण जैसे संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इसलिए सरकार को विपक्षी दलों का सहयोग अनिवार्य है।

कांग्रेस ने मांगी सर्वदलीय बैठक

सूत्रों के मुताबिक चूंकि सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम के संशोधन के लिए विपक्षी दलों से संपर्क शुरू किया है इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को एक पत्र लिखकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

खरगे ने मांग की है कि सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में शामिल रखा जाए। उन्होंने कहा कि संसद में विधेयक पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक में इस पर चर्चा की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो और सभी दलों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

UP-उत्तराखंड में 2027 से लागू होने की उम्मीद

सरकार अगले सप्ताह संसद में यह संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। यदि सरकार यह संशोधन पारित करवाने में सफल हो जाती है तो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में महिला आरक्षण 2027 से ही लागू हो जाएगा। दोनों राज्यों में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

यह राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां विधानसभा की 403 सीटें हैं। यदि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता है तो यहां 130 से अधिक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी तरह उत्तराखंड में भी महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

महिला आरक्षण का ऐतिहासिक महत्व

भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा लगभग तीन दशकों से लंबित था। 1996 में पहली बार लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था लेकिन राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण यह बार-बार अटकता रहा।

2010 में राज्यसभा ने इसे पारित किया था लेकिन लोकसभा में यह फिर से लटक गया। अंततः 2023 में मोदी सरकार ने विशेष संसद सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया। लेकिन जनगणना और परिसीमन की शर्त के कारण इसका क्रियान्वयन अटका रहा।

यदि अब सरकार इस शर्त को हटाने में सफल हो जाती है तो यह भारतीय लोकतंत्र और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। इससे न केवल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी बल्कि नीति निर्माण में भी महिलाओं की आवाज मजबूत होगी।

Women Reservation Bill Amendment 2026: संशोधन के लिए क्या होगी प्रक्रिया?

महिला आरक्षण से जुड़ा यह संशोधन संविधान संशोधन है इसलिए इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी होगी। इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होगा। इसके अलावा कम से कम 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं की स्वीकृति भी जरूरी होगी।

यही कारण है कि सरकार ने विपक्षी दलों से पहले संपर्क किया है। यदि कांग्रेस और TMC का सहयोग मिल जाता है तो यह संशोधन आसानी से पारित हो सकता है।

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