बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर दक्षिणी लेबनान पहुंचे नेतन्याहू, सैनिकों से की मुलाकात और हिज्बुल्लाह को दी चेतावनी, युद्ध जारी रखने का ऐलान, सीजफायर से इनकार, इजरायल का आक्रामक रुख
इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर दक्षिणी लेबनान पहुंचे, हिज्बुल्लाह को चेतावनी, युद्ध जारी रखने का ऐलान, सैनिकों से मुलाकात और सुरक्षा संदेश
Netanyahu Lebanon visit: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रविवार को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर दक्षिणी लेबनान पहुंचे और वहां तैनात इजरायली सैनिकों से सीधे मुलाकात की। इस दौरे में उन्होंने दावा किया कि इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह के आक्रमण के खतरे को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध अभी जारी है और कोई सीजफायर नहीं होगा।
Netanyahu Lebanon visit: नेतन्याहू का लेबनान दौरा क्यों है अहम
युद्धग्रस्त क्षेत्र में किसी देश के प्रधानमंत्री का बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर खुद मोर्चे पर पहुंचना एक असाधारण संदेश देता है। नेतन्याहू का यह दौरा केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए नहीं था बल्कि इसके पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य संदेश भी था। इजरायली प्रधानमंत्री ने दक्षिणी लेबनान में अग्रिम मोर्चे पर तैनात अपने जवानों से सीधे बात की और उनकी हौसलाअफजाई की। इस मुलाकात को इजरायली सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
Netanyahu Lebanon visit: कौन हैं बेंजामिन नेतन्याहू
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। वे 1996 से 1999 और फिर 2009 से लगातार कई बार इस पद पर रहे हैं। नेतन्याहू इजरायल की लिकुड पार्टी के प्रमुख नेता हैं और उनकी विदेश नीति का मुख्य आधार सदैव इजरायल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना रहा है। वे हिज्बुल्लाह और हमास को इजरायल के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।
Netanyahu Lebanon visit: हिज्बुल्लाह खतरा खत्म होने का दावा क्या बताता है
नेतन्याहू ने दौरे के दौरान कहा कि इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह की उस क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया है जिससे वह उत्तरी इजरायल पर आक्रमण कर सकता था। यह बयान इजरायली जनता के लिए एक बड़ी राहत की खबर के रूप में प्रस्तुत किया गया। हिज्बुल्लाह लेबनान स्थित एक सशस्त्र संगठन है जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है। पिछले कई वर्षों से यह संगठन इजरायल की उत्तरी सीमा पर लगातार खतरा बना रहा है।
Netanyahu Lebanon visit: युद्ध जारी रखने की चेतावनी का क्या मतलब है
नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लेबनान के साथ कोई सीजफायर नहीं होगा और युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक इजरायल के सभी सुरक्षा लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। यह बयान अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उनके दृढ़ रुख को दर्शाता है। कई पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र लेबनान में युद्धविराम की मांग कर रहे हैं। किंतु इजरायल का कहना है कि जब तक हिज्बुल्लाह उसकी सीमाओं से दूर नहीं हो जाता तब तक सैन्य अभियान रोकना संभव नहीं है।
Netanyahu Lebanon visit: दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी
इजरायली सेना पिछले कई महीनों से दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में सक्रिय है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्लाह के उन ठिकानों को नष्ट करना है जहां से वह इजरायली नागरिक बस्तियों पर हमले करता रहा है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इजरायल ने इस अभियान में हिज्बुल्लाह के बड़े हथियार भंडार, सुरंग नेटवर्क और कमान केंद्रों को काफी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि इससे स्थानीय आबादी पर भी भारी असर पड़ा है।
Netanyahu Lebanon visit: मध्य पूर्व पर इस दौरे का व्यापक प्रभाव
नेतन्याहू का यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो चुकी है। इस परिदृश्य में इजरायल का आक्रामक रुख पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का मानना है कि ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच यह संघर्ष केवल दो पक्षों का मामला नहीं है। इसके तार ईरान की क्षेत्रीय नीति से सीधे जुड़े हैं और इसका असर पूरे अरब जगत पर पड़ता है।
Netanyahu Lebanon visit: लेबनान की आम जनता पर क्या पड़ रहा है असर
दक्षिणी लेबनान में चल रहे सैन्य अभियान के कारण वहां की आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने लेबनानी नागरिकों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता विभाग ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की अनुमति देने की मांग की है।
निष्कर्ष
बेंजामिन नेतन्याहू का बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर दक्षिणी लेबनान पहुंचना और सैनिकों के साथ खड़े होकर युद्ध जारी रखने की घोषणा करना एक स्पष्ट संकेत है कि इजरायल अपने सैन्य अभियान से पीछे हटने के मूड में नहीं है। हिज्बुल्लाह के खतरे को खत्म करने का दावा और सीजफायर से इनकार यह दोनों बातें मिलकर यह बताती हैं कि मध्य पूर्व में शांति की राह अभी बहुत लंबी और कठिन है। दुनिया भर की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं।
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