बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर मतदान आज! उपेंद्र कुशवाहा की सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा
बिहार में एनडीए की परीक्षा, हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर
Rajya Sabha election 2026: राज्यसभा का रण हमेशा से संख्याओं का खेल रहा है लेकिन आज तीन राज्यों में जो सियासी बिसात बिछी है उसमें हर वोट की कीमत पहले से कहीं अधिक है. बिहार में एनडीए, हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस, दोनों के लिए यह चुनाव एक अग्निपरीक्षा बन गया है.
Rajya Sabha election 2026: आज कितनी सीटों पर हो रहा है मतदान और कहां कितने उम्मीदवार हैं
बिहार, हरियाणा और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है. इन तीनों राज्यों में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं जिसकी वजह से चुनाव का रास्ता अपरिहार्य हो गया. यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होती तो निर्विरोध निर्वाचन हो जाता लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवारों की उपस्थिति ने मतदान को अनिवार्य बना दिया. राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदाता होते हैं और हर सीट के लिए एक निश्चित कोटे की जरूरत होती है. जिस दल के पास जितने अधिक विधायक होते हैं उतनी अधिक सीटें जीतना उनके लिए संभव होता है. लेकिन जब संख्या बल सीमा पर हो तो क्रॉस वोटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है.
Rajya Sabha election 2026: बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की पांचवीं सीट पर क्यों है इतना संकट
बिहार से राज्यसभा की पांचवीं सीट इस पूरे चुनाव की सबसे चर्चित और संवेदनशील सीट बन गई है. एनडीए ने इस सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है. उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में एक लंबे अनुभव वाले नेता हैं जो कई बार केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और ओबीसी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. एनडीए के पास बिहार विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल तो है लेकिन पांचवीं सीट के लिए वोटों की गणना बेहद कड़ी है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विधायकों के रुख में बदलाव आने की खबरों ने एनडीए की राह में अनिश्चितता पैदा कर दी है. ओवैसी की पार्टी के विधायक यदि किसी अन्य उम्मीदवार को समर्थन देते हैं तो एनडीए के लिए यह सीट बचाना कठिन हो जाएगा.
Rajya Sabha election 2026: ओवैसी की पार्टी के बदले तेवर से एनडीए को कितना नुकसान हो सकता है
बिहार विधानसभा में एआईएमआईएम के कुछ विधायक हैं जिनके वोटों की अहमियत पांचवीं सीट के लिए बड़ी है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार “राज्यसभा चुनाव में छोटे दलों के विधायकों का vote अक्सर किसी बड़े दल के लिए निर्णायक हो जाता है, खासकर तब जब संख्या बल कोटे के एकदम करीब हो.” एनडीए ने अपने सभी सहयोगी दलों से व्हिप जारी किया है और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश की है. लेकिन ओवैसी की पार्टी के रुख पर अंतिम समय तक संशय बना हुआ था. यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के बाद उनके विधायकों के वोटों का हिसाब किसके पक्ष में जाता है.
Rajya Sabha election 2026: हरियाणा में कांग्रेस को क्यों है क्रॉस वोटिंग का डर
हरियाणा में राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारा है. राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस की स्थिति में बदलाव आया है और उसके विधायकों की संख्या एक निश्चित दायरे में है. समस्या यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने के लिए जितने वोटों की जरूरत है वह संख्या बहुत करीब है और किसी एक विधायक की भी क्रॉस वोटिंग नतीजे पलट सकती है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों में राज्यसभा चुनावों के दौरान दलबदल और क्रॉस वोटिंग की घटनाएं कई बार देखी गई हैं. कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सभी विधायकों को विशेष निर्देश जारी किए हैं.
Rajya Sabha election 2026: ओडिशा में कांग्रेस की क्या है स्थिति और कहां फंसा है मामला
ओडिशा में कांग्रेस की चुनौती हरियाणा से भी अधिक जटिल है. राज्य में बीजेपी की सरकार है और विधानसभा में उसकी मजबूत पकड़ है. कांग्रेस के पास सीमित विधायक हैं और उनके लिए राज्यसभा सीट जीतना एक कठिन लक्ष्य है. ओडिशा में कांग्रेस को न केवल क्रॉस वोटिंग का डर है बल्कि उसे अपने विधायकों को एकजुट रखने की भी चुनौती है. विपक्षी दल अक्सर ऐसे चुनावों में सत्ताधारी दल के दबाव का सामना करते हैं. राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार ओडिशा में कांग्रेस का यह दांव जोखिम भरा है लेकिन दल ने संख्याओं के आधार पर अपनी उम्मीदवारी को उचित ठहराया है.
Rajya Sabha election 2026: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग क्यों होती है और इसे कैसे रोका जाता है
राज्यसभा चुनाव का मतदान खुले मत से होता है यानी पार्टी के अधिकृत एजेंट यह देख सकते हैं कि विधायक ने किसे वोट दिया. इसके बावजूद क्रॉस वोटिंग की घटनाएं होती हैं क्योंकि दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून राज्यसभा के मतदान पर उसी तरह लागू नहीं होता जैसा विधानसभा के विश्वास मत पर होता है. दल अपने विधायकों को व्हिप जारी करते हैं और उन्हें एक विशेष स्थान पर एकत्र रखने की कोशिश करते हैं ताकि बाहरी प्रभाव कम से कम हो. फिर भी राजनीति में प्रलोभन और दबाव दोनों काम करते हैं और यही क्रॉस वोटिंग की असली जड़ है.
निष्कर्ष
बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर आज का मतदान देश की संसदीय राजनीति की दिशा को प्रभावित करेगा. बिहार में एनडीए का पांचवीं सीट पर दांव और हरियाणा तथा ओडिशा में कांग्रेस की परीक्षा, दोनों ही परिणाम देश को बताएंगे कि राज्यों की विधानसभाओं में असली शक्ति संतुलन किसके हाथ में है. यह चुनाव यह भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र में हर वोट मायने रखता है, चाहे वह जनता का हो या विधायक का.
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