Vikat Sankashti Chaturthi 2026: करियर और बिजनेस की रुकावटें होंगी दूर! 5 अप्रैल को है विकट संकष्टी चतुर्थी, बुध-केतु को मजबूत करने के लिए करें गणपति की विशेष आराधना
5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और नौकरी-व्यापार की रुकावटें दूर करने के उपाय
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, काम अटक रहे हैं या मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है, तो 5 अप्रैल 2026 को मनाई जाने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी आपके लिए बहुत शुभ साबित हो सकती है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा करने से विघ्नहर्ता बप्पा प्रसन्न होते हैं और कुंडली के बाधक योग शांत हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की आराधना से बुध और केतु ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।
विकट संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, लेकिन विकट संकष्टी को विशेष महत्व दिया जाता है क्योंकि इस दिन गणेश जी की पूजा से कठिन संकटों से मुक्ति मिलती है। 5 अप्रैल 2026 को रविवार है, इसलिए अधिकांश लोग घर पर आराम से पूजा कर सकेंगे।
पंचांग और शुभ समय: 5 अप्रैल का महा-मुहूर्त, चंद्रोदय के समय पूजा करने से मिलेगा दोगुना फल
5 अप्रैल 2026 (रविवार)
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चतुर्थी तिथि शुरू: 4 अप्रैल शाम 7:42 बजे
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चतुर्थी तिथि समाप्त: 5 अप्रैल शाम 6:18 बजे
** पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय:** 5 अप्रैल शाम 6:00 बजे से रात 8:30 बजे तक (चंद्रोदय के आसपास)
सूर्योदय: सुबह 6:12 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:45 बजे
व्रत रखने वाले भक्त सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर संकल्प लें और शाम को चंद्रोदय के समय पूजा करें।
ज्योतिषीय महत्व: राहु-केतु के दोष होंगे शांत, मानसिक एकाग्रता और निर्णय क्षमता बढ़ाने वाला है यह पावन दिन
ज्योतिष शास्त्र में गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि के स्वामी माना जाता है। विकट संकष्टी चतुर्थी पर उनकी पूजा करने से:
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बुध ग्रह मजबूत होता है (जिससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है)
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केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं
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राहु-केतु की बाधाएं शांत होती हैं
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नौकरी, व्यापार और करियर में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं
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मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है
इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन की चंचलता दूर होती है और तनाव कम होता है।
संपूर्ण पूजा विधि: दूर्वा, मोदक और मंत्र जाप से करें बप्पा को प्रसन्न, चंद्र अर्घ्य का जानें सही तरीका
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सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
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घर के पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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लाल फूल, दुर्वा घास, मोदक, लड्डू और फल चढ़ाएं।
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“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 21 या 108 बार जाप करें।
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गणेश अथर्वशीर्ष या संकट नाशन स्तोत्र का पाठ करें।
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शाम को चंद्रोदय के समय पूजा करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें।
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व्रत खोलते समय फलाहार या सात्विक भोजन करें।
विशेष उपाय: * इस दिन 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
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गरीबों और ब्राह्मणों को दान दें।
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गणेश चालीसा का पाठ करें।
संकष्टी व्रत के अनुशासन: क्या करें और क्या न करें? सात्विकता और दान-पुण्य से सफल होगा उपवास
करें:
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पूरे दिन व्रत रखें (फलाहार कर सकते हैं)
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गणेश जी की कथा सुनें या पढ़ें
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सात्विक और शुद्ध भोजन करें
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दान-पुण्य करें
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सकारात्मक सोच रखें
न करें:
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मांसाहार, तामसिक भोजन या शराब
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झूठ बोलना या गुस्सा करना
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किसी से विवाद या निंदा करना
सफलता के गुप्त सूत्र: नौकरी और व्यापार में तरक्की के लिए अपनाएं ये 4 अचूक उपाय
जो लोग नौकरी या व्यापार में बार-बार बाधाएं महसूस कर रहे हैं, वे विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए ये उपाय कर सकते हैं:
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सुबह गणेश जी की मूर्ति पर दुर्वा घास चढ़ाएं।
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“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
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शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देते समय अपनी मनोकामना बोलें।
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गणेश जी को 21 लड्डू का भोग लगाएं।
इन उपायों से बुध और केतु ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और कामों में रुकावटें कम होती हैं।
विशेष सलाह: रविवार का अवकाश और गणेश भक्ति, व्यस्तता के बीच भी ऐसे करें सरल पूजन
5 अप्रैल 2026 को रविवार होने के कारण अधिकांश लोग घर पर पूजा कर सकेंगे। जो लोग बाहर हैं, वे भी शाम को जहां भी हों, गणेश जी की फोटो के सामने साधारण पूजा कर सकते हैं।
जो लोग नियमित संकष्टी व्रत रखते हैं, उनके लिए विकट संकष्टी और भी खास है। इस दिन किए गए व्रत और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: निष्कर्ष
विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 5 अप्रैल को है। इस पावन दिन गणेश जी की पूजा कर संकटों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना करें। सही मुहूर्त में पूजा और व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
नौकरी या व्यापार में बार-बार रुकावट आने वालों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ है। गणेश जी की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी हों।
शुभ मुहूर्त याद रखें: 5 अप्रैल शाम 6:00 से 8:30 बजे तक पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है।
हर विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा अवश्य करें। जय गणेश! जय विघ्नहर्ता!
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श जरूर लें।
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