Varuthini Ekadashi 2026: 13 अप्रैल को रखा जाएगा सौभाग्य प्रदायक व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 10 हजार साल की तपस्या के बराबर फल का रहस्य
13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी व्रत, 10 हजार वर्षों के तप के बराबर पुण्य, जानें पूजा विधि, नियम और पारण समय
Varuthini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने दो एकादशियां आती हैं लेकिन वैशाख मास की कृष्ण पक्ष वाली वरुथिनी एकादशी का अपना अलग स्थान है। इस साल वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 को रखी जाएगी। शास्त्रों में इसे अत्यंत फलदायी माना गया है। भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत काल में युधिष्ठिर को बताया था कि वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से दस हजार वर्षों की तपस्या का पुण्य मिलता है।
यह व्रत पापों का नाश करता है, सौभाग्य बढ़ाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। जो भक्त पूरे श्रद्धा-भक्ति से इस व्रत को रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शुभ मुहूर्त: एकादशी तिथि और पारण समय
एकादशी तिथि: 13 अप्रैल 2026 (सोमवार)
तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2026, रात 01:16 बजे
तिथि समाप्त: 14 अप्रैल 2026, रात 01:08 बजे
व्रत पारण समय (14 अप्रैल 2026): सुबह 06:54 बजे से 08:31 बजे तक
वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से शुरू होकर 14 अप्रैल को पारण समय तक रहेगा। पारण के समय दूध या फलाहार से व्रत खोला जाता है।
धार्मिक महत्व: पौराणिक कथा और व्रत फल
शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत से सूर्य ग्रहण के दौरान सोना दान करने जितना पुण्य मिलता है। कुछ ग्रंथों में तो इसे अन्नदान से भी अधिक फलदायी कहा गया है।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि जो व्यक्ति विष्णु भगवान के चरण कमलों में मन लगाकर इस एकादशी का व्रत रखता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत से दरिद्रता दूर होती है, सौभाग्य बढ़ता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा मांधाता ने भगवान से पूछा कि ऐसा कौन सा व्रत है जिससे मनुष्य को सबसे अधिक पुण्य मिले। तब भगवान ने वरुथिनी एकादशी का महात्म्य बताया और कहा कि यह व्रत सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ है।
पूजन प्रक्रिया: सरल एवं सटीक पूजा विधि
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सुबह का स्नान: 13 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनें।
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सूर्य अर्घ्य: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
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भगवान विष्णु की पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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कलश स्थापना: एक कलश में जल भरकर रखें। उसमें सुपारी, सिक्का और फूल डालें।
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आरती और भोग: भगवान को फूल, फल, मिठाई, दूध और वस्त्र अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
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कथा श्रवण: वरुथिनी एकादशी की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
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आरती: शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।
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रात्रि जागरण: रात भर भजन-कीर्तन या विष्णु नाम का जाप करें।
व्रत अनुशासन: पालन करने योग्य जरूरी नियम
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पूरे दिन उपवास रखें। फलाहार या केवल जल भी ले सकते हैं।
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नमक, अनाज, चावल और दाल का सेवन न करें।
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क्रोध, झूठ और निंदा से बचें।
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गायत्री मंत्र या विष्णु मंत्र का जाप करें।
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गरीबों को अन्न या वस्त्र दान करें।
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14 अप्रैल को पारण समय में दूध या फल से व्रत खोलें।
व्रत लाभ: सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति
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सभी प्रकार के पापों का नाश
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सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि
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स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति
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वैवाहिक सुख में वृद्धि
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मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
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पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति
राशिफल प्रभाव: राशियों पर एकादशी का असर
यह एकादशी सभी राशियों के लिए शुभ है लेकिन कुछ राशियों को विशेष लाभ मिल सकता है:
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वृषभ, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों को आर्थिक लाभ की संभावना
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मिथुन, तुला राशि वालों को वैवाहिक सुख में सुधार
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सिंह और धनु राशि वालों को स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
विशेष उपाय: मनोकामना पूर्ति के सरल तरीके
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विष्णु सहस्रनाम पाठ: रोजाना पढ़ें या सुनें।
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तुलसी पूजा: तुलसी के पौधे की पूजा करें।
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दान: गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करें।
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मंत्र जाप: “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करें।
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भजन: भगवान विष्णु के भजन गाएं।
ज्योतिषियों का महत्वपूर्ण सुझाव
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से रखने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। जो लोग नियमित एकादशी व्रत रखते हैं, उन्हें मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता मिलती है।
Varuthini Ekadashi 2026: निष्कर्ष
वरुथिनी एकादशी 2026 इस साल 13 अप्रैल को है। यह व्रत 10 हजार वर्षों की तपस्या के समान पुण्य प्रदान करता है। जो भक्त श्रद्धा से इस व्रत को रखते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
13 अप्रैल को व्रत रखकर 14 अप्रैल को सही मुहूर्त में पारण करें। पूजा विधि का पालन करें, कथा सुनें और दान-पुण्य करें। इस पावन व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आएगी।
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