Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। होली से पहले ही प्रदेश में चुनावी रंग गाढ़ा होने लगा है। भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरों से अपनी जमीन मजबूत करना शुरू कर दिया है। वहीं विपक्षी दल भी अपनी रणनीति बना रहे हैं। समाजवादी पार्टी प्रयागराज में संतों के विवाद को गरमाने में जुटी है तो बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रही है।
भाजपा ने शुरू की तैयारी
भाजपा ने मिशन 2027 के लिए चुनावी पिच तैयार करना शुरू कर दिया है। पिछले एक महीने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ दौरे के दौरान बड़े चुनावी संदेश दिए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों ने अपनी नई पारी की शुरुआत मथुरा से की। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह इसे हार्डकोर राजनीति का नया केंद्र बनाकर रखेगी।
Uttar Pradesh Politics: ओबीसी वोटों को साधने की रणनीति

भाजपा ने ओबीसी और विशेष रूप से कुर्मी वोटों को साधने के लिए कुर्मी चेहरा और सात बार के सांसद केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को 14 दिसंबर 2025 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। यह कदम ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी अपनी सामाजिक इंजीनियरिंग को और मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
प्रधानमंत्री का राष्ट्र प्रेरणा स्थल दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को लखनऊ में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्तियों से सजे राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन के दौरान राष्ट्रवाद की तान छेड़ी। उन्होंने इस स्थल को न सिर्फ वैचारिक तीर्थ बताया बल्कि बिजली पासी, बिरसा मुंडा, सुहेलदेव, निषादराज, राजा महेंद्र सिंह और चौरी चौरा के बलिदानियों का स्मरण किया। इससे सपा के पीडीए की काट के रूप में जातीय समीकरण को भी साधा गया।
मथुरा को बनाया चुनावी केंद्र
15 दिसंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने 27 दिसंबर को अपना पहला दौरा मथुरा का किया। पार्टी मथुरा को हार्डकोर हिंदुत्व की बड़ी प्रयोगशाला बना चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष ने गोरखपुर, अयोध्या और काशी का दौरा कर धार्मिक धरातल को मजबूत किया। साथ ही गन्ना बेल्ट मेरठ पहुंचकर किसानों की चौखट भी छुई।
Uttar Pradesh Politics: गांवों तक पहुंचने का रोडमैप
13 जनवरी को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लखनऊ में विकसित भारत जी राम जी के मुद्दे पर सभी सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों की बैठक में गांवों में चौपाल लगाने की बात कही। इससे पार्टी के सामने किसानों की चौखट तक पहुंचने का रोडमैप तैयार हुआ। इसके लिए प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने पार्टी को माइक्रो मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाया है।
गृह मंत्री शाह का एक जिला एक व्यंजन फॉर्मूला
24 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में आयोजित यूपी दिवस 2026 के कार्यक्रम में एक जिला एक उत्पाद के बाद एक जिला एक व्यंजन की सराहना की। इससे उन्होंने ऐसे बड़े वर्ग को साधने का प्रयास किया जो रेहड़ी, ठेला, छोटी दुकानों और लघु उद्योगों से जुड़ा है। यह छोटे व्यापारियों को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
शाह की रणनीतिक बैठक
अमित शाह ने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ करीब 50 मिनट की बैठक की। इसमें सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय रखने तथा आगामी अभियानों से चुनावी जमीन मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
Uttar Pradesh Politics: राष्ट्रीय अध्यक्ष का मथुरा दौरा
25 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश का पहला दौरा मथुरा वृंदावन से किया। इस दौरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी साथ रहे। यह दौरा धार्मिक राजनीति को मजबूत करने के संकेत देता है।
बसपा ने ब्राह्मणों पर डाले डोरे
चुनावी जंग से पहले अन्य दल भी अपनी रणनीति को धार दे रहे हैं। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पिछले दिनों भाजपा समेत अन्य दलों पर तंज कसते हुए कहा कि ब्राह्मणों का सम्मान सिर्फ बसपा में सुरक्षित है। इस बयान से प्रदेश की राजनीति का पारा चढ़ गया। बसपा ने प्रदेशभर में आकाश आनंद के दौरे की रणनीति भी बनाई है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
मायावती के बयान पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। भाजपा का मानना है कि सभी जातियों का सम्मान उनकी पार्टी में है और उन्हें किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं।
Uttar Pradesh Politics: समाजवादी पार्टी की रणनीति
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 17 जनवरी को भुवनेश्वर में विजन इंडिया कार्यक्रम में पहुंचे। इससे पहले दिसंबर में बेंगलुरु में बैठक कर युवाओं के रोजगार समेत अन्य मुद्दों को लेकर रणनीति बना चुके हैं। सपा पीडीए से एक कदम आगे बढ़ने की कोशिश में है। साथ ही पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने की कसरत भी हो रही है।
प्रयागराज विवाद को गरमाने की कोशिश
समाजवादी पार्टी प्रयागराज में स्नान को लेकर संतों और पुलिस के बीच हुए विवाद को नए सिरे से गरमाने में जुटी है। पार्टी इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। यह विवाद सपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
कांग्रेस में उथलपुथल
पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस को अलविदा कहकर प्रदेश की राजनीति में तरंग पैदा कर दी है। यह घटना कांग्रेस के लिए झटका है। इससे विपक्षी एकता में भी दरार के संकेत मिल रहे हैं।
Uttar Pradesh Politics: चुनावी अखाड़े में बदल रहा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh Politics) धीरे धीरे चुनावी अखाड़े में तब्दील हो रहा है। सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी रणनीति बना रहे हैं। भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुटी है तो विपक्षी दल अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में हैं। आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। भाजपा ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है और विपक्षी दल भी मैदान में उतर चुके हैं। होली से पहले ही चुनावी रंग गाढ़ा होने लगा है। अब देखना यह होगा कि 2027 में कौन सी पार्टी सत्ता पर काबिज होती है।
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