US-Iran तनाव: ट्रंप ने खामेनेई को फिर दी धमकी, बोले- ‘ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे बड़ी बात होगी, कभी-कभी डर जरूरी’

ट्रंप बोले- ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात, कभी डर जरूरी, मिडिल ईस्ट में युद्धपोत तैनाती बढ़ाई

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US-Iran Tension : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खुली धमकी दी है।

उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन “सबसे अच्छी बात होगी जो हो सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि “कभी-कभी डर भी जरूरी होता है।”

US-Iran Tension:  ट्रंप का साफ बयान: सत्ता परिवर्तन ही एकमात्र उपाय

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ अपनी आक्रामक नीति को स्पष्ट किया है:

  • खुली धमकी: ट्रंप ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन ही सबसे बेहतर विकल्प है।

  • सैन्य विकल्प: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सैन्य कार्रवाई के सभी विकल्पों को खुला रख रहे हैं।

  • रणनीति: उनका मानना है कि ईरान को केवल सैन्य दबाव और भय के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है।

US-Iran Tension : मिडिल ईस्ट में युद्धपोतों की तैनाती

ट्रंप के बयान के साथ-साथ अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति काफी बढ़ा दी है:

  • नौसैनिक बल: फारस की खाड़ी और अरब सागर में अतिरिक्त युद्धपोत, विमान वाहक पोत, मिसाइल विध्वंसक और पनडुब्बियां तैनात की गई हैं।

  • सैन्य अड्डे: कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर गतिविधियां बढ़ी हैं।

  • अलर्ट: लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर रखा गया है और विशेष बलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

US-Iran Tension : फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात

उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग (फोर्ट लिबर्टी) में सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपनी “शक्ति के माध्यम से शांति” (Peace through Strength) की नीति को दोहराया:

  • संदेश: अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

  • चेतावनी: जो भी देश अमेरिकी हितों को नुकसान पहुँचाएगा, उसे कड़ी कीमत चुकानी होगी।

US-Iran Tension : ईरान-अमेरिका तनाव का इतिहास

दोनों देशों के बीच शत्रुता का इतिहास काफी पुराना है:

  • 1979 की क्रांति: दूतावास बंधक संकट के बाद से ही संबंध शत्रुतापूर्ण रहे हैं।

  • JCPOA और ट्रंप: 2018 में ट्रंप ने परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था।

  • कासिम सुलेमानी: 2020 में ईरानी जनरल की हत्या के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया था। अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में फिर से वही आक्रामक रुख दिख रहा है।

US-Iran Tension: ईरान की संभावित प्रतिक्रिया

ट्रंप की धमकियों के जवाब में ईरान के पास कई रणनीतिक विकल्प हैं:

  • प्रॉक्सी समूह: हिजबुल्लाह, हूथी और शिया मिलिशिया के माध्यम से अमेरिकी हितों पर हमला।

  • होर्मुज जलसंधि: वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस जलसंधि को अवरुद्ध करने की धमकी।

  • परमाणु कार्यक्रम: परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अपनी गतिविधियों को तेज करना।

US-Iran Tension : अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

  • वैश्विक अपील: यूरोपीय संघ, रूस और चीन ने बार-बार संयम बरतने की अपील की है।

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत सहित कई देश मिडिल ईस्ट में शांति चाहते हैं क्योंकि यह क्षेत्र उनकी ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य स्रोत है।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप की ताजा धमकी और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों की बढ़ती तैनाती ने युद्ध की आशंकाओं को मजबूत कर दिया है। आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि क्या यह वास्तव में सैन्य कार्रवाई की शुरुआत है या केवल दबाव की एक रणनीति।

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