यूपीएससी ने नियमों में किया बड़ा बदलाव, सिविल सर्विस में रहते हुए अब नहीं दे पाएंगे दोबारा परीक्षा, जानें नए नियम
आईएएस/आईएफएस अधिकारी दोबारा परीक्षा नहीं दे सकेंगे, आईपीएस को कुछ छूट। सिविल सेवा में स्थिरता और नए उम्मीदवारों को अवसर
UPSC New Rule: संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यूपीएससी की तरफ से जारी नई गाइडलाइन्स के अनुसार पहले से चयनित और सेवारत उम्मीदवार अब बार बार परीक्षा नहीं दे पाएंगे। 4 फरवरी को जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि जो उम्मीदवार पहले से ही आईएएस या आईएफएस अधिकारी के रूप में नियुक्त हैं वे दोबारा सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। यह नियम भारतीय पुलिस सेवा में चुने गए अधिकारियों पर भी लागू होता है। इस फैसले से उन अधिकारियों पर रोक लगेगी जो बेहतर रैंक या अलग सेवा पाने के लिए बार बार परीक्षा में बैठते थे। यूपीएससी का यह कदम सिविल सेवा में स्थिरता लाने और नए उम्मीदवारों को अवसर देने की दिशा में उठाया गया है।
आईएएस और आईएफएस अधिकारियों पर सख्त प्रतिबंध
यूपीएससी ने आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के लिए सबसे सख्त नियम बनाए हैं। सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो उम्मीदवार पिछली परीक्षा के नतीजों के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त हुआ है और उस सेवा का सदस्य बना हुआ है वह सिविल सेवा परीक्षा 2026 में शामिल होने के लिए पात्र नहीं होगा।
यह प्रावधान उन अधिकारियों को रोकने के लिए बनाया गया है जो बेहतर रैंक पाने या अपनी पसंद की सेवा में जाने के लिए सेवा में रहते हुए दोबारा प्रयास करते थे। अब अगर कोई अधिकारी फिर से परीक्षा देना चाहता है तो उसे पहले अपनी मौजूदा सेवा से इस्तीफा देना होगा। यह नियम सिविल सेवा में स्थिरता सुनिश्चित करने और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
UPSC New Rule: प्रीलिम्स के बाद नियुक्त हुए तो मेन्स नहीं दे पाएंगे
यूपीएससी के नए नियमों में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। अगर कोई उम्मीदवार सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में शामिल होने के बाद आईएएस या आईएफएस के पद पर नियुक्त होता है तो उसे सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह तभी लागू होगा जब वह उम्मीदवार उस सेवा का सदस्य बना रहता है।
इसका मतलब साफ है कि उम्मीदवार को मेन्स परीक्षा में शामिल होने के लिए अपनी मौजूदा नियुक्ति छोड़नी होगी। अगर उम्मीदवार पिछली सेवा की सदस्यता बनाए रखता है तो उसे पात्र नहीं माना जाएगा भले ही वह सीएसई 2026 प्रारंभिक परीक्षा पास कर ले। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि अधिकारी एक समय में केवल एक सेवा के प्रति प्रतिबद्ध रहें।
आईपीएस अधिकारियों के लिए थोड़ी छूट
यूपीएससी ने आईपीएस नियुक्तियों के लिए अपेक्षाकृत कम सख्त नियम बनाए हैं। अगर कोई उम्मीदवार सीएसई 2026 के नतीजे के आधार पर आईपीएस या केंद्रीय सेवा समूह ए के लिए चुना जाता है तो उसके पास सीएसई 2027 में शामिल होने का विकल्प होता है। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। यह छूट आईएएस और आईएफएस की तुलना में दी गई है क्योंकि इन सेवाओं को अलग तरह से देखा जाता है।
आईपीएस अधिकारियों को एक और मौका इसलिए दिया जा रहा है ताकि वे यदि चाहें तो आईएएस या आईएफएस जैसी सेवाओं में जाने का प्रयास कर सकें। लेकिन इसके लिए भी निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। यह प्रावधान सेवाओं के बीच गतिशीलता को कुछ हद तक बनाए रखता है।
UPSC New Rule: सामान्य वर्ग के लिए छह प्रयास की सीमा
सिविल सेवा परीक्षा में प्रयासों की संख्या पहले से निर्धारित है। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम छह प्रयास कर सकते हैं। यूपीएससी के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक परीक्षा में किया गया प्रयास सिविल सेवा परीक्षा में किया गया प्रयास माना जाएगा। इसका मतलब है कि अगर कोई उम्मीदवार केवल प्रीलिम्स देता है और मेन्स तक नहीं पहुंचता तब भी उसका एक प्रयास गिना जाएगा। यह नियम सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से लागू होता है।
छह प्रयासों की यह सीमा उम्मीदवारों को गंभीरता से तैयारी करने और सीमित अवसरों का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करती है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 32 वर्ष है।
आरक्षित वर्गों के लिए विशेष छूट
यूपीएससी आरक्षित श्रेणियों के लिए प्रयासों की संख्या में विशेष छूट देता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा में असीमित प्रयास कर सकते हैं। उनके लिए केवल आयु सीमा 37 वर्ष तय है। इसका मतलब है कि जब तक वे आयु सीमा के भीतर हैं तब तक कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं।
अन्य पिछड़ा वर्ग और बेंचमार्क विकलांग व्यक्ति उम्मीदवारों को कुल नौ प्रयास करने की अनुमति है। ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 35 वर्ष है। ये छूट सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के सिद्धांत पर आधारित हैं। सरकार का मानना है कि आरक्षित वर्गों को ऐतिहासिक रूप से कम अवसर मिले हैं इसलिए उन्हें अधिक मौके देने चाहिए। यह नीति सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है।
UPSC New Rule: नए नियमों का उद्देश्य और प्रभाव
यूपीएससी द्वारा लागू किए गए नए नियमों के पीछे कई उद्देश्य हैं। पहला उद्देश्य सिविल सेवा में स्थिरता लाना है। जब अधिकारी बार बार परीक्षा देते रहते हैं तो प्रशासनिक निरंतरता प्रभावित होती है। दूसरा उद्देश्य नए उम्मीदवारों को अधिक अवसर देना है। पहले से सेवारत अधिकारियों के बार बार प्रयास करने से नए युवाओं के लिए सीटें कम हो जाती थीं।
तीसरा उद्देश्य सिविल सेवा के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों को एक बार सेवा मिलने के बाद उसमें पूर्ण समर्पण के साथ काम करना चाहिए न कि बेहतर विकल्प की तलाश में रहना चाहिए। ये नियम सिविल सेवा की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने में मदद करेंगे। हालांकि कुछ आलोचकों का मानना है कि यह योग्य उम्मीदवारों के विकल्पों को सीमित करता है।
यूपीएससी के नए नियम सिविल सेवा परीक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव हैं। ये नियम प्रशासनिक स्थिरता और नए उम्मीदवारों को अवसर देने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं। उम्मीदवारों को इन नियमों को ध्यान से समझना चाहिए।
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