राज्यसभा में एलपीजी संकट पर जोरदार हंगामा! खरगे के सवाल पर रिजिजू ने रोका, जेपी नड्डा बोले, भारत की नीति नहीं, अंतरराष्ट्रीय हालात हैं जिम्मेदार

खरगे के सवाल पर सदन में हंगामा, नड्डा बोले—पश्चिम एशिया तनाव से प्रभावित हुई आपूर्ति

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Kharge vs Rijiju debate: राज्यसभा में सोमवार को एलपीजी गैस की किल्लत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जब यह सवाल सदन में रखा तो संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें टोका। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि यह संकट भारत की किसी नीति या निर्णय के कारण नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की देन है।

Kharge vs Rijiju debate: संसद में अचानक क्यों गरमाया एलपीजी का मुद्दा

नई दिल्ली। सोमवार की सुबह जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष पूरी तरह तैयार था। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में बने हालात ने भारत में एलपीजी आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में यह विषय उठाया और सरकार से जवाब माँगा। खरगे ने कहा कि देशभर में एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है और आम परिवारों को परेशानी हो रही है। जैसे ही वे अपनी बात रख रहे थे, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें बीच में ही टोका। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया और विपक्षी सदस्य नाराजगी जताने लगे।

Kharge vs Rijiju debate: रिजिजू ने क्यों टोका और क्या था उनका तर्क

किरेन रिजिजू संसदीय प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने खरगे को इस आधार पर रोका कि सदन में जो विषय उठाया जा रहा था वह उस समय की कार्यसूची के अनुरूप नहीं था। हालाँकि विपक्ष ने इसे विषय दबाने की कोशिश बताया। रिजिजू का कहना था कि सरकार इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है लेकिन सदन की प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इस पर विपक्षी दलों ने जोरदार नारेबाजी की और कुछ सदस्य अपनी सीट से उठकर वेल में आ गए।

जेपी नड्डा का बयान: संकट भारत की वजह से नहीं

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में साफ शब्दों में कहा कि एलपीजी संकट का कारण भारत की कोई नीति या सरकार की कोई चूक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समस्या पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जन्मी है। नड्डा ने स्पष्ट किया कि ईरान और अमेरिका के बीच बने तनाव तथा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए असर पड़ना स्वाभाविक है।

भारत पर क्यों पड़ रहा है असर: पृष्ठभूमि को समझें

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसमें खाड़ी देशों और पश्चिम एशियाई क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। जब इस क्षेत्र में भूराजनीतिक तनाव बढ़ता है तो समुद्री मार्गों पर असर पड़ता है जिससे आपूर्ति बाधित होती है। ईरान और अमेरिका के बीच हाल के हफ्तों में तनाव तेजी से बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, के प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर दिख रहा है।

Kharge vs Rijiju debate: आम नागरिकों पर क्या पड़ रहा है प्रभाव

एलपीजी गैस की किल्लत का असर सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ता है। देशभर में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं। जब आपूर्ति बाधित होती है तो बुकिंग के बाद भी सिलेंडर समय पर नहीं मिलता और कतारें लंबी हो जाती हैं। छोटे ढाबों, रेस्तराँ और खाद्य व्यवसायों पर भी असर पड़ता है क्योंकि वे भी गैस आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार जब वैश्विक संकट के कारण आयात प्रभावित होता है तो घरेलू बाजार में तात्कालिक किल्लत अपरिहार्य हो जाती है और सरकार को बफर स्टॉक से काम चलाना पड़ता है।

विशेषज्ञों की राय: सरकार को क्या करना चाहिए

ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी एलपीजी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर पूरी व्यवस्था न चरमरा जाए। इसके लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते जरूरी हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सरकार को रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ानी चाहिए। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवधान के समय घरेलू आपूर्ति को कम से कम 30 से 45 दिनों तक बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सकता है।

निष्कर्ष

राज्यसभा में एलपीजी संकट पर सोमवार को जो बहस हुई वह केवल संसदीय हंगामे तक सीमित नहीं है। यह मुद्दा उस बड़े सवाल को उठाता है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कितनी तैयार है। जेपी नड्डा का यह कहना कि संकट भारत की वजह से नहीं है, तथ्यात्मक रूप से सही हो सकता है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भारत को अपनी आयात निर्भरता कम करने और ऊर्जा भंडारण बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। संसद में उठा यह सवाल सरकार और विपक्ष दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि आम नागरिकों की रसोई की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक बहस से बड़ी है।

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