उत्तर प्रदेश के शिक्षकों को बड़ा झटका, केंद्र सरकार ने टीईटी से छूट देने से किया इनकार

केंद्र ने संसद में साफ किया - टीईटी अनिवार्य रहेगी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 5 साल से ज्यादा सेवा वाले को 2 साल में पास करना होगा

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UP Teacher News: शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को लेकर उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि टीईटी परीक्षा से शिक्षकों को सामूहिक छूट नहीं दी जाएगी। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षकों में निराशा और चिंता फैल गई है। ये वे शिक्षक हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी परीक्षा पास नहीं की है।

संसद में क्या कहा गया?

संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने स्पष्ट किया कि टीईटी शिक्षकों के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल इससे किसी भी तरह की सामूहिक छूट देने की कोई योजना नहीं है। यह जवाब उन शिक्षकों के लिए बड़ा झटका है जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे और टीईटी से पूरी तरह मुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे।

केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया कि निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23 के तहत राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 को एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित की गई थी। इसमें टीईटी पास करना अनिवार्य शर्त रखी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया। सर्वोच्च न्यायालय ने एक सितंबर 2025 को अपने एक अहम फैसले में टीईटी को शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता माना था। इस फैसले में अदालत ने दो तरह के शिक्षकों के लिए अलग नियम बनाए हैं।

पहली श्रेणी में वे शिक्षक आते हैं जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है। ऐसे शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख से दो साल के अंदर टीईटी परीक्षा पास करनी अनिवार्य होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा सकता है।

दूसरी श्रेणी में वे शिक्षक हैं जिनकी सेवा में पांच साल से कम समय बचा है। ऐसे शिक्षक टीईटी पास किए बिना भी अपनी सेवानिवृत्ति तक काम कर सकते हैं। लेकिन इनके लिए एक बड़ी समस्या यह है कि बिना टीईटी पास किए वे पदोन्नति के हकदार नहीं होंगे। यानी रिटायरमेंट तक वे जिस पद पर हैं, उसी पद पर बने रहेंगे।

UP Teacher News: शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार के इस रुख से शिक्षक संगठन काफी निराश हैं। अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक और उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई कानून बनाएगी। उन्हें विश्वास था कि सरकार टीईटी से राहत देगी। लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कोई ठोस राहत नहीं दी।

शिक्षक संघ के एक अन्य वरिष्ठ नेता निर्भय सिंह ने कहा कि ये शिक्षक पिछले कई वर्षों से सेवा देकर अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं। उनका कहना है कि बढ़ती उम्र, परिवार की जिम्मेदारियां और स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों के बीच परीक्षा की तैयारी करना शिक्षकों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। उन्होंने फिर से सरकार से अपील की है कि शिक्षकों के हित में फैसला लेकर उन्हें टीईटी से छूट दी जाए।

शिक्षकों की मुश्किलें

उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी परीक्षा पास नहीं की है। इनमें से अधिकतर शिक्षक 2011 से पहले नियुक्त हुए थे। उस समय टीईटी की अनिवार्यता का नियम लागू नहीं था। इसलिए उन्हें बिना टीईटी के ही नियुक्ति मिल गई थी।

अब जब सरकार ने टीईटी को अनिवार्य बना दिया है तो इन शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इनमें से कई शिक्षक 50 साल की उम्र पार कर चुके हैं। लंबे समय बाद फिर से परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं है। साथ ही स्कूल में रोज पढ़ाने की जिम्मेदारी और घर परिवार की देखभाल के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है।

कई शिक्षकों की शिकायत है कि वे पिछले 10 से 15 साल से अपनी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपनी योग्यता साबित कर दी है। ऐसे में अब उनसे फिर से परीक्षा देने की मांग करना उचित नहीं है। लेकिन सरकार और अदालत का कहना है कि नियम सबके लिए एक समान होना चाहिए।

UP Teacher News: आगे क्या होगा?

अब देखना यह है कि शिक्षक संगठन इस मुद्दे को आगे कैसे ले जाते हैं। कुछ संगठनों ने आंदोलन की बात कही है। पिछले कुछ महीनों में कई शहरों में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। कानपुर, बांदा समेत कई जगहों पर शिक्षक सड़कों पर उतरे थे।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने टीईटी अनिवार्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेश के शिक्षक भी राज्य सरकार से ऐसी ही पहल की उम्मीद कर रहे हैं।

फिलहाल स्थिति यह है कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी परीक्षा पास करनी ही होगी। इसके लिए उन्हें गंभीरता से तैयारी शुरू करनी होगी। हालांकि शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी बात सुनेगी और कोई रास्ता निकालेगी। लेकिन केंद्र सरकार के ताजा बयान के बाद ऐसी उम्मीद कम नजर आ रही है।

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