यूपी विधानसभा बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायकों का जमकर हंगामा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायकों ने जमकर नारेबाजी की, बाहर तख्तियों के साथ प्रदर्शन, योगी सरकार का आत्मविश्वास भरा रुख

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UP Budget Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को शुरू हुआ और पहले ही दिन सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने सदन के अंदर जोरदार नारेबाजी की और बाहर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने सरकार की नीतियों को जन-विरोधी बताते हुए कई मुद्दों को उठाया। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने हंगामे के बीच सभी मुद्दों पर बहस के लिए तैयार होने का संकेत दिया।

UP Budget Session: राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को विधानसभा में अपना अभिभाषण दे रही थीं। परंपरा के अनुसार राज्यपाल का अभिभाषण बजट सत्र की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसमें सरकार की उपलब्धियों और आगे की योजनाओं का उल्लेख किया जाता है।

लेकिन इस दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने लगातार शोर-शराबा किया और नारेबाजी करते रहे। विपक्षी विधायक अपनी सीटों से खड़े होकर चिल्लाते रहे और सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ऐसा हंगामा असामान्य है क्योंकि परंपरागत रूप से इसे शांति और सम्मान के साथ सुना जाता है। लेकिन सपा विधायकों ने इस परंपरा को तोड़ते हुए जमकर विरोध जताया।

सीएम योगी का आत्मविश्वास भरा रुख

सदन में भारी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से शांत और आत्मविश्वास से भरे दिखे। उन्होंने मुस्कुराते हुए मेज थपथपाई और स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार सभी मुद्दों पर बहस के लिए तैयार है।

सीएम योगी का यह रवैया दर्शाता है कि सरकार विपक्ष के आरोपों से घबराई नहीं है और उचित मंच पर अपना पक्ष रखने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री का यह आत्मविश्वास भाजपा विधायकों में भी दिखाई दिया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और अन्य भाजपा विधायकों ने सपा के हंगामे का जवाब “जय श्री राम” के नारों से दिया। सदन का माहौल दोनों पक्षों की नारेबाजी से गूंजता रहा।

UP Budget Session: सदन के बाहर सपा का प्रदर्शन

सदन के अंदर हंगामे के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। विधायकों ने हाथों में तख्तियां पकड़ रखी थीं जिन पर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लिखे थे।

सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह समाजवादी पार्टी का मुख्य राजनीतिक एजेंडा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि योगी सरकार की नीतियां इन वर्गों के हितों के खिलाफ हैं और सरकार केवल एक विशेष वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचा रही है। हालांकि भाजपा ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उनकी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रही है।

मणिकर्णिका घाट विवाद का मुद्दा

सपा विधायक सचिन यादव ने वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर हुए ध्वस्तीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने रानी अहिल्याबाई होल्कर का पोस्टर थामे हुए इस मुद्दे को सदन के सामने रखा।

सचिन यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने रानी अहिल्याबाई होल्कर का अपमान किया है। रानी अहिल्याबाई ने करीब 300 साल पहले काशी के घाटों का विकास कराया था और उनका योगदान ऐतिहासिक महत्व का है। विपक्ष का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर किए गए निर्माण कार्य और ध्वस्तीकरण में ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचा है। यह मुद्दा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना से भी जुड़ा हुआ है।

हालांकि सरकार का तर्क है कि विकास कार्य आवश्यक थे और सभी ऐतिहासिक संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा गया है।

UP Budget Session: बजट सत्र की अहमियत

यूपी विधानसभा का बजट सत्र राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस सत्र में 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा जिसमें राज्य सरकार की वित्तीय योजनाओं और प्राथमिकताओं का खुलासा होगा।

विपक्ष के लिए यह सत्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता के मुद्दों को सदन में रखने का अवसर होता है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के लिए यह अपनी उपलब्धियों को गिनाने और आगामी योजनाओं को प्रस्तुत करने का मंच होता है। इस साल का बजट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अगले वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की दिशा तय करेगा। विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर बजट में प्रावधानों की घोषणा होगी।

आगे की राजनीतिक लड़ाई

सत्र के पहले दिन का हंगामा दर्शाता है कि आगे चलकर भी गर्मागर्म बहस और नोकझोंक देखने को मिल सकती है। विपक्ष अपने मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने के लिए तैयार दिख रहा है।

समाजवादी पार्टी के पास राज्य में दूसरी सबसे बड़ी संख्या में विधायक हैं और वे सरकार को घेरने के लिए हर अवसर का उपयोग कर रहे हैं। पार्टी PDA राजनीति को मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने में जुटी है। दूसरी ओर, भाजपा की योगी सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों पर आत्मविश्वास से भरी दिखाई दे रही है। सरकार का मानना है कि उसकी विकास योजनाएं और कानून-व्यवस्था की स्थिति जनता के बीच लोकप्रिय हैं।

UP Budget Session: निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हंगामे से हुई है जो आगे चलकर और तीखी हो सकती है। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा विधायकों का विरोध और सरकार का आत्मविश्वास भरा रुख राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का संकेत देता है। आने वाले दिनों में बजट प्रस्तुति और विभिन्न मुद्दों पर बहस के दौरान सदन में और भी दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

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