Bareilly Ki Barfi: फिल्मी नहीं असली मिठास! ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना में बरेली की बर्फी को मिलेगा ₹1 करोड़ का बजट, जानिए सरकार की पूरी रणनीति

उत्तर प्रदेश बजट 2026-27 में बरेली की बर्फी को ब्रांड बनाने के लिए ₹1 करोड़, प्रशिक्षण-पैकेजिंग-मार्केटिंग पर फोकस

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UP Budget 2026: जब बरेली की बर्फी का नाम सुनते हैं तो ज्यादातर लोगों के जेहन में सबसे पहले आयुष्मान खुराना और कृति सेनन की सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म की तस्वीर उभरती है। लेकिन अब यह नाम सिर्फ सिनेमा के पर्दे तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने ताजा बजट 2026-27 में ‘एक जनपद एक व्यंजन’ नामक एक नई और अनूठी योजना के तहत बरेली जिले की प्रसिद्ध बर्फी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए एक करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किया है। यह पहल प्रदेश के हर जिले के पारंपरिक और लोकप्रिय खान-पान को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

UP Budget 2026: क्या है ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना और कैसे हुई शुरुआत

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी योजना देशभर में काफी सफल रही है, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले के विशिष्ट हस्तशिल्प और उत्पादों को बढ़ावा दिया गया। इसी सफलता से प्रेरित होकर अब सरकार ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना की शुरुआत की है। इस योजना को उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था और बजट 2026-27 में इसके लिए कुल 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस योजना का मूल उद्देश्य प्रदेश के सभी 75 जिलों में मौजूद पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों को एक अलग पहचान देना है। हर जिले का एक प्रतिनिधि व्यंजन चुना जाएगा और उसके उत्पादन, पैकेजिंग, विपणन तथा ब्रांडिंग के लिए सरकारी सहायता दी जाएगी। इससे न केवल स्थानीय खाद्य संस्कृति को संरक्षण मिलेगा, बल्कि इन व्यंजनों से जुड़े हजारों छोटे कारीगरों और हलवाइयों को रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध होंगे।

UP Budget 2026: बरेली की बर्फी का चयन क्यों?

यह सवाल स्वाभाविक है कि बरेली के लिए बर्फी का चयन किस आधार पर किया गया। क्या इसका कारण साल 2017 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ है जिसने इस मिठाई को घर-घर में मशहूर कर दिया? जिला उद्योग विभाग के अधिकारियों ने इस बारे में स्पष्ट किया है कि चयन का मुख्य आधार फिल्म नहीं है। अधिकारियों के अनुसार बरेली में बर्फी का उत्पादन दशकों पुरानी परंपरा है और यहां सैकड़ों मिठाई की दुकानें एवं लघु उद्यम इसके निर्माण से जुड़े हैं। जिले में बर्फी की मांग, उत्पादन क्षमता और इससे जुड़ी रोजगार की संभावनाएं इतनी प्रबल हैं कि यह अपने आप में चयन के लिए पर्याप्त वजह है।

हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि फिल्म ने बरेली की बर्फी को एक अलग पॉपुलर कल्चर आइडेंटिटी दी है। आम लोगों में इस मिठाई को लेकर जो उत्साह दिखता है, उसमें सिनेमा के प्रभाव की अनदेखी नहीं की जा सकती। लेकिन सरकारी फैसले के पीछे ठोस आर्थिक और व्यावसायिक तर्क हैं, जो इसे एक सुविचारित नीतिगत कदम बनाते हैं।

UP Budget 2026: एक करोड़ रुपये कैसे खर्च होंगे

एक करोड़ रुपये की यह राशि बरेली की बर्फी के समग्र विकास और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न मदों में खर्च की जाएगी। इसमें सबसे पहले बर्फी बनाने वाले स्थानीय कारीगरों और हलवाइयों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार उत्पादन कर सकें। इसके बाद पैकेजिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने पर ध्यान दिया जाएगा ताकि बर्फी न सिर्फ भारत के बड़े शहरों बल्कि विदेशी बाजारों में भी अपनी जगह बना सके।

ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बरेली की बर्फी को उपलब्ध कराने की योजना है और सरकारी मेलों, प्रदर्शनियों तथा खाद्य उत्सवों में इसे विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक हासिल करने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं, जिससे बरेली की बर्फी को कानूनी संरक्षण और एक विशिष्ट पहचान मिलेगी।

UP Budget 2026: स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

बरेली शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मिठाई बनाने का कारोबार हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में दूध उत्पादक, मावा बनाने वाले, चीनी व्यापारी, मिठाई कारीगर, पैकर्स और विक्रेता सभी शामिल हैं। सरकारी सहायता मिलने से इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

विशेष रूप से युवाओं के लिए यह योजना आकर्षक हो सकती है क्योंकि आधुनिक पैकेजिंग, ऑनलाइन मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कार्यबल की जरूरत बढ़ेगी। अगर इस योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जाता है तो बरेली की बर्फी एक स्थानीय मिठाई से आगे बढ़कर एक राष्ट्रीय खाद्य ब्रांड बन सकती है, ठीक वैसे ही जैसे आगरा का पेठा या मथुरा का पेड़ा अपनी अलग पहचान रखते हैं।

UP Budget 2026: यूपी की फूड इकोनॉमी को मिलेगी नई दिशा

‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना की सफलता के बाद ‘एक जनपद एक व्यंजन’ की शुरुआत बताती है कि उत्तर प्रदेश सरकार खाद्य अर्थव्यवस्था को विकास का एक प्रमुख इंजन बनाने पर गंभीरता से काम कर रही है। प्रदेश में खाद्य विविधता अद्भुत है। लखनऊ की गलौटी कबाब, वाराणसी की कचौड़ी, मथुरा का पेड़ा, आगरा का पेठा, कानपुर की नमकीन और अब बरेली की बर्फी, हर जिले की अपनी एक अलग खाद्य पहचान है जो सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है।

सरकार का मानना है कि अगर इन पारंपरिक व्यंजनों को पेशेवर तरीके से ब्रांड किया जाए, उनकी गुणवत्ता में सुधार किया जाए और उन्हें आधुनिक बाजार तक पहुंचाया जाए तो ये न केवल पर्यटन को बढ़ावा देंगे बल्कि निर्यात के जरिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने का भी एक बड़ा माध्यम बन सकते हैं। 75 जिलों के लिए 75 करोड़ रुपये का यह बजट इस दिशा में एक ठोस शुरुआत है।

UP Budget 2026: वैलेंटाइन वीक में री-रिलीज हो रही है फिल्म भी

दिलचस्प संयोग यह भी है कि इसी वैलेंटाइन वीक में बॉलीवुड फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज किया जा रहा है। आयुष्मान खुराना, कृति सेनन और राजकुमार राव अभिनीत इस कॉमेडी-रोमांस फिल्म ने 2017 में दर्शकों का दिल जीता था और अब नई पीढ़ी के दर्शकों को भी बड़े पर्दे पर इसका आनंद लेने का मौका मिलेगा। फिल्म की री-रिलीज और सरकारी योजना का एक साथ आना बरेली की बर्फी के लिए दोहरी खुशखबरी है, जो इस मिठाई की लोकप्रियता को नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।

कुल मिलाकर बरेली की बर्फी अब सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक और आर्थिक अवसर बनने की राह पर है। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बरेली का नाम मिठास की दुनिया में और भी चमकेगा।

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