केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मिली जान से मारने की धमकी, MP5 हथियार का जिक्र, व्हाट्सएप पर लीक हुआ टूर प्रोग्राम, आवास की निगरानी का खुलासा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

टूर प्रोग्राम लीक, आवास की निगरानी का दावा, पुलिस जांच में जुटी

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Jayant Chaudhary: किसी केंद्रीय मंत्री का सरकारी दौरा कार्यक्रम किसी अनजान व्यक्ति के पास पहुंच जाए और उस पर लिखा हो “इनको गोली मार दो” तो यह केवल एक धमकी नहीं बल्कि सुरक्षा तंत्र की गंभीर चूक का भी संकेत है।

Jayant Chaudhary: जयंत चौधरी को किस तरह दी गई जान से मारने की धमकी

18 मार्च 2026 को सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के एक करीबी सहयोगी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन उठाते ही कॉल करने वाले व्यक्ति ने सीधे मंत्री जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी देना शुरू कर दिया। धमकी देने वाले ने MP5 जैसे स्वचालित हथियारों का नाम लेते हुए कहा कि वह उन्हीं से हमला करेगा। इतना कहकर उसने फोन काट दिया और पीछे एक ऐसा भय छोड़ गया जिसने सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल सक्रिय कर दिया।

Jayant Chaudhary: व्हाट्सएप पर मंत्री का टूर प्रोग्राम भेजकर क्या लिखा गया

धमकी के बाद जब उस अज्ञात नंबर से आए व्हाट्सएप संदेशों को खोला गया तो मामला और गंभीर हो गया। उन संदेशों में केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का आधिकारिक सरकारी दौरा कार्यक्रम था जिस पर स्पष्ट रूप से “इनको गोली मार दो” लिखा हुआ था। इसके अलावा धमकी देने वाले ने व्हाट्सएप पर अपनी लोकेशन और वॉयस मैसेज भी भेजे जिनमें बार-बार जान से मारने की बातें कही गई थीं। यह एक सुनियोजित और प्रीमेडिटेटेड धमकी की ओर इशारा करता है।

Jayant Chaudhary: मंत्री का गोपनीय टूर प्रोग्राम उस व्यक्ति तक कैसे पहुंचा

यह मामले का सबसे चिंताजनक पहलू है। जब उस नंबर पर वापस फोन करके पूछा गया कि मंत्री का आधिकारिक दौरा कार्यक्रम उसके पास कहां से आया तो उसने कहा कि यह उसे “ऊपर से भेजा गया है।” सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी केंद्रीय मंत्री के सरकारी दौरे का कार्यक्रम एक संवेदनशील दस्तावेज होता है। यदि यह किसी अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचा है तो यह सूचना सुरक्षा में बड़ी सेंध की ओर इशारा करता है जिसकी जांच होनी आवश्यक है।

Jayant Chaudhary: आवास की जासूसी का खुलासा क्यों बढ़ा देता है इस मामले की गंभीरता

पुलिस शिकायत में केवल फोन पर मिली धमकी का जिक्र नहीं है बल्कि एक और गंभीर तथ्य भी सामने आया है। शिकायत के अनुसार कोई अज्ञात व्यक्ति मंत्री के आवास के पिछले गेट की निगरानी कर रहा है। शिकायत में बताया गया है कि करीब तीन दिन पहले रात 9 से 10 बजे के बीच काले शीशों वाली एक सफेद स्विफ्ट कार उनके आवास के दूसरी तरफ काफी देर तक खड़ी रही और उसमें सवार लोग आवास पर नजर रखे हुए थे।

Jayant Chaudhary: तुगलक रोड थाने को कब और कैसे दी गई सूचना

घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री के सहयोगियों ने तुरंत तुगलक रोड थाने के थानाध्यक्ष को फोन पर सूचित किया। साथ ही मोबाइल पर मिले सभी साक्ष्य जैसे व्हाट्सएप संदेश, वॉयस मैसेज और लोकेशन भी पुलिस को भेज दिए गए। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां उस अज्ञात नंबर की तकनीकी जांच कर रही हैं और संदिग्ध वाहन की पहचान की कोशिश जारी है।

Jayant Chaudhary: जयंत चौधरी कौन हैं और उनका राजनीतिक महत्व क्या है

47 वर्षीय जयंत चौधरी राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा हैं। वे चौधरी अजित सिंह के पुत्र हैं जो भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद NDA गठबंधन के साथ आने के बाद जयंत चौधरी को केंद्र सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दर्जा मिला। वे कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय में राज्यमंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं।

Jayant Chaudhary: किसी केंद्रीय मंत्री को धमकी मिलने पर कानूनी प्रक्रिया क्या होती है

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी केंद्रीय मंत्री को जान से मारने की धमकी देना भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के अंतर्गत आता है। इसमें धमकी देने, सुरक्षा में बाधा पहुंचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी जांच में शामिल हो जाती हैं। मंत्री की सुरक्षा को अतिरिक्त बल भी दिया जाता है और संदिग्धों की डिजिटल निगरानी बढ़ा दी जाती है।

निष्कर्ष

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मिली यह धमकी एक साथ कई गंभीर सवाल खड़े करती है। पहला यह कि किसी मंत्री का गोपनीय दौरा कार्यक्रम किसी संदिग्ध व्यक्ति तक कैसे पहुंचा। दूसरा यह कि क्या यह एक संगठित षड्यंत्र का हिस्सा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे न केवल धमकी देने वाले को जल्द से जल्द पकड़ें बल्कि इस पूरे नेटवर्क की भी तह तक जाएं। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

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