ट्रंप की रणनीति पड़ी भारी, ईरान का जबरदस्त पलटवार मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, तेल बाजार से लेकर सुरक्षा तक हड़कंप

मिडिल ईस्ट जंग में नया मोड़, मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिका-इजरायल पर दबाव

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US-Iran military tension: मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पूरी सुरक्षा टीम की रणनीतिक गणना उस वक्त धरी की धरी रह गई, जब ईरान ने उस तरीके से पलटवार किया जिसकी वाशिंगटन ने कल्पना तक नहीं की थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक विस्फोटक रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि अमेरिका ने न केवल ईरान की जवाबी कार्रवाई को कम आंका, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके असर का भी गलत अनुमान लगाया। यह रिपोर्ट पेंटागन और व्हाइट हाउस दोनों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

US-Iran military tension: अमेरिका की बड़ी चूक, पेंटागन को मिला करारा जवाब

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन को यह भरोसा था कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद ईरान बड़ा पलटवार करने की स्थिति में नहीं रहेगा। खुफिया एजेंसियों और रक्षा विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाया था कि ईरान की सैन्य क्षमता और उसकी इच्छाशक्ति दोनों इतनी कमजोर पड़ चुकी हैं कि वह केवल प्रतीकात्मक जवाब ही दे पाएगा। लेकिन ईरान ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित करते हुए एक के बाद एक मिसाइलें दागीं और अपने सैटेलाइट ड्रोन से इजरायल के अहम खुफिया केंद्र को तबाह करने का दावा किया। पेंटागन में अब इस बात पर मंथन चल रहा है कि आखिर खुफिया रिपोर्टें इतनी गलत कैसे निकलीं।

US-Iran military tension: ऊर्जा बाजार पर पड़ा बड़ा असर, दुनिया भर में बढ़ी बेचैनी

अमेरिका की दूसरी बड़ी चूक ऊर्जा बाजार को लेकर थी। ट्रंप प्रशासन का मानना था कि ईरान पर हमलों और जवाबी कार्रवाई का वैश्विक तेल आपूर्ति पर असीमित असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग निकली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री तेल मार्गों में से एक है, उस पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें अस्थिर हो गई हैं। ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश ने अमेरिकी नौसेना को भी सतर्क कर दिया। ऐसे में तेल आयात करने वाले देशों में सप्लाई की चिंता गहरी हो गई है।

US-Iran military tension: ईरान ने इजरायल के खुफिया केंद्र को बताया नष्ट

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने ड्रोन हमले के जरिए तेल अवीव के दक्षिण में स्थित हाइला इलाके में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैटेलाइट संचार और खुफिया केंद्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। आईआरजीसी के अनुसार इस केंद्र का कंट्रोल रूम पूरी तरह राख हो गया। यदि यह दावा सच साबित होता है तो यह अमेरिकी और इजरायली खुफिया तंत्र के लिए बेहद गंभीर झटका होगा। इजरायल ने इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

US-Iran military tension: इजरायल और अमेरिका का जवाब, तेहरान में तेल डिपो तबाह

दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका भी ईरान पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। इजरायली वायुसेना ने तेहरान में एक और बड़े तेल भंडारण केंद्र को निशाना बनाया। हमले के बाद उठता काला धुआं कई किलोमीटर दूर से नजर आ रहा था। ईरान के इन्हीं तेल डिपो पर पहले भी हमले हो चुके हैं और उनमें से कुछ में कई दिनों तक आग धधकती रही थी। इजरायल की रणनीति साफ दिखती है, ईरान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना और उसकी सैन्य आपूर्ति लाइन को कमजोर करना।

US-Iran military tension: हिजबुल्लाह मोर्चे पर भी जंग जारी

ईरान के साथ सीधे टकराव के बीच इजरायल का लेबनान में हिजबुल्लाह से भी भीषण संघर्ष जारी है। इजरायली वायुसेना ने बेरूत के दक्षिणी हिस्से में हिजबुल्लाह की वित्तीय शाखा अल-करद-अल-हसन पर हवाई हमला किया। इजरायल का आरोप है कि यह संस्था हिजबुल्लाह को धन मुहैया कराने और हवाला के जरिए पैसे भेजने का काम करती थी। हिजबुल्लाह ने भी जवाबी हमले करते हुए उत्तरी इजरायल में तैनात सैनिकों पर रॉकेट दागे। इजरायली सेना ने बताया कि उसके जमीनी दस्ते हवाई हमलों के साथ समन्वय करते हुए हिजबुल्लाह के ठिकानों पर आगे बढ़ रहे हैं।

US-Iran military tension: ईरान के बोनाब शहर में पुलिस मुख्यालय पर हमला

ईरान के बोनाब शहर से एक चौंकाने वाली खबर आई। यहां पुलिस मुख्यालय पर एक के बाद एक तीन जोरदार हमले किए गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विस्फोटों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उनकी आवाज दूर-दूर तक गूंजती रही। ईरानी अधिकारियों ने अभी तक इस हमले में जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं की है। माना जा रहा है कि यह हमला ईरान के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को कमजोर करने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

US-Iran military tension: इस्फहान परमाणु साइट पर रहस्यमयी खुदाई, दुनिया हैरान

सबसे ज्यादा चिंता जगाने वाली खबर ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़ी आई। इस्फहान स्थित परमाणु साइट की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में बड़े पैमाने पर खुदाई का काम दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर सुरंगें खोदी जा रही हैं। बता दें कि इसी साइट पर पिछले साल हमला हो चुका था। अब विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान इस परमाणु प्रतिष्ठान को भूमिगत बंकरों में छिपाकर और मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि भविष्य में कोई भी हवाई हमला इसे नुकसान न पहुंचा सके। यह जानकारी अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती है।

US-Iran military tension: एफ-14 टॉमकैट जेट पर भी नजर

इस्फहान के खातामाई एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरों ने रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। तस्वीरों में पुराने एफ-14 टॉमकैट लड़ाकू विमान साफ नजर आ रहे हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि आज पूरी दुनिया में केवल ईरान ही इन विमानों का उपयोग करता है। 1970 के दशक में ईरान ने इन्हें अमेरिका से खरीदा था और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ये आईआरजीसी के हाथों में चले गए। अब इजरायल और अमेरिका इन्हीं पुराने जेट विमानों को नष्ट करने की कोशिश में लगे हैं।

US-Iran military tension: आगे क्या होगा, बड़ा सवाल

ट्रंप प्रशासन अब इस बात को लेकर दबाव में है कि उसकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान की ताकत और इरादे का गलत आकलन क्यों किया। व्हाइट हाउस के अंदर चल रही बहस और पेंटागन में मची हलचल यह बता रही है कि यह जंग अमेरिकी राजनीति के अंदर भी एक नया मोर्चा खोल रही है। दुनिया भर के देश युद्धविराम की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति और बिगड़ती जा रही है। मिडिल ईस्ट की यह जंग अब न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपना असर दिखाने लगी है।

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