कांचीपुरम: पल्लव राजवंश की वो ‘स्वर्ण नगरी’ जहाँ के पत्थरों में आज भी जीवंत है भारत का गौरवशाली इतिहास और बेजोड़ वास्तुकला
कांचीपुरम के प्राचीन मंदिर, पल्लव काल की वास्तुकला और आध्यात्मिक शांति इसे बनाते हैं खास यात्रा स्थल
Travel Tips: जब भी घूमने की बात होती है तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में पहाड़ या समुद्र तट का ख्याल आता है। लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां घूमने के साथ-साथ आध्यात्मिक सुकून और प्राचीन इतिहास का अनुभव भी मिलता है। दक्षिण भारत में स्थित कांचीपुरम को ‘हजार मंदिरों वाली नगरी’ कहा जाता है। यहां एक समय में करीब 1000 मंदिर हुआ करते थे। आज भी यहां सैकड़ों प्राचीन मंदिर मौजूद हैं जो अपनी वास्तुकला, नक्काशी और धार्मिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। अगर आप शांति, इतिहास और आध्यात्मिकता का अनुभव करना चाहती हैं तो कांचीपुरम आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।
कांचीपुरम तमिलनाडु राज्य में चेन्नई से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे ‘सिटी ऑफ टेम्पल्स’ या ‘धर्म की नगरी’ भी कहा जाता है। पल्लव, चोल और विजयनगर साम्राज्य के समय में यह शहर शिक्षा, कला और धर्म का प्रमुख केंद्र था। यहां के मंदिर न सिर्फ पूजा-अर्चना के लिए हैं बल्कि भारतीय वास्तुकला का जीवंत उदाहरण भी हैं।
क्यों कहलाता है कांची ‘हजार मंदिरों का शहर’?
प्राचीन काल में कांचीपुरम में लगभग 1000 मंदिर थे। ये मंदिर विभिन्न राजवंशों द्वारा बनवाए गए थे। समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए या छोटे हो गए, लेकिन आज भी यहां 100 से ज्यादा प्रमुख मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला, मूर्तिकला और नक्काशी इतनी शानदार है कि इन्हें देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।
कांचीपुरम को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है – शिव मंदिर, विष्णु मंदिर और शक्ति मंदिर। यहां के अधिकांश मंदिर पल्लव काल के हैं और द्रविड़ शैली की वास्तुकला का बेहतरीन नमूना पेश करते हैं। शहर को ‘कांची’ भी कहा जाता है और इसे तमिलनाडु के सात पवित्र शहरों में से एक माना जाता है।
कैलाशनाथर से कामाक्षी अम्मन तक, कांचीपुरम के वो 4 मंदिर जिन्हें देखना है बेहद जरूरी
कांचीपुरम घूमने आएं तो इन प्रमुख मंदिरों को जरूर देखें:
कैलाशनाथर मंदिर यह शहर का सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर है। पल्लव राजा राजसिंह द्वारा बनवाया गया यह मंदिर पत्थर की नक्काशी और जटिल वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह और आसपास की दीवारों पर बनी नक्काशी देखते ही बनती है।
एकम्बरेश्वर मंदिर यह भगवान शिव को समर्पित विशाल मंदिर है। यहां का मुख्य मंदिर 57 मीटर ऊंचा राजगोपुरम है। मंदिर परिसर बहुत बड़ा है और इसमें कई छोटे-छोटे मंदिर भी हैं। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने पार्वती को ज्ञान दिया था।
कामाक्षी अम्मन मंदिर यह शक्तिपीठों में से एक है। मां कामाक्षी की पूजा यहां बड़े उत्साह से की जाती है। मंदिर की वास्तुकला और मूर्ति की सुंदरता देखने लायक है। यहां हर साल बड़े मेले लगते हैं।
वरदराज पेरुमाल मंदिर यह विष्णु भगवान को समर्पित मंदिर है। मंदिर में भगवान वरदराज की विशाल मूर्ति है। वास्तुकला और मंदिर की भव्यता पर्यटकों को आकर्षित करती है।
ये मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व के नहीं बल्कि कला और इतिहास के भी जीवंत प्रमाण हैं।
ट्रैवल गाइड: कब जाएं और कैसे प्लान करें कांचीपुरम की यात्रा? जानें सुहावने मौसम का सही समय
कांचीपुरम घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है। इन महीनों में मौसम सुहावना रहता है और गर्मी कम होती है। अप्रैल से जून तक गर्मी बहुत तेज होती है इसलिए यात्रा थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
मानसून के समय भी यहां घूमना रोमांचक हो सकता है लेकिन बारिश की वजह से कुछ मंदिरों तक पहुंचना कठिन हो सकता है।
चेन्नई से मजह 2 घंटे की दूरी, रेल और सड़क मार्ग से पहुँचने का सबसे आसान तरीका
हवाई मार्ग: निकटतम एयरपोर्ट चेन्नई है, जो कांचीपुरम से करीब 75 किलोमीटर दूर है। चेन्नई से टैक्सी या बस लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: कांचीपुरम में अपना रेलवे स्टेशन है। चेन्नई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग: चेन्नई से NH4 via अच्छी सड़क है। दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों से बस या कार से भी पहुंचा जा सकता है।
विश्व प्रसिद्ध साड़ियों की शॉपिंग और स्थानीय बाजारों की रौनक
कांचीपुरम का नाम आते ही कांजीवरम साड़ी का जिक्र जरूर होता है। यहां की रेशमी साड़ियां अपनी बेहतरीन क्वालिटी और डिजाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। अगर आप यहां घूमने जा रही हैं तो कुछ समय शॉपिंग के लिए जरूर निकालें।
स्थानीय बाजार में साड़ियों के अलावा पारंपरिक आभूषण, मंदिर की नक्काशी वाली वस्तुएं और स्मृति चिन्ह भी मिलते हैं।
ड्रेस कोड से लेकर गाइड की मदद तक, इन टिप्स के साथ यात्रा बनाएं यादगार
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सुबह जल्दी मंदिरों में जाएं क्योंकि दोपहर में गर्मी बढ़ जाती है।
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आरामदायक जूते पहनें क्योंकि मंदिरों में काफी चलना पड़ता है।
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मंदिरों में विनम्र कपड़े पहनें। महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-कमीज बेहतर रहता है।
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पानी की बोतल और हल्का नाश्ता साथ रखें।
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लोकल गाइड की मदद लें तो मंदिरों का इतिहास बेहतर तरीके से समझ आएगा।
Travel Tips: निष्कर्ष
कांचीपुरम सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रमाण है। हजार मंदिरों वाली इस नगरी में घूमकर आपको शांति, इतिहास और कला का अनोखा अनुभव मिलेगा।
अगर आप भीड़-भाड़ से दूर शांत जगह पर घूमना चाहती हैं तो कांचीपुरम आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यहां आकर आप न सिर्फ मंदिरों के दर्शन करेंगी बल्कि भारतीय सभ्यता की गहराई को भी महसूस करेंगी।
अप्रैल में अगर आप दक्षिण भारत की यात्रा प्लान कर रही हैं तो कांचीपुरम को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। एक बार यहां घूमकर आने के बाद आप बार-बार आने का मन बनाएंगी।
नोट: मंदिरों के दर्शन का समय और स्थानीय नियम उत्सवों के दौरान बदल सकते हैं, यात्रा से पहले स्थानीय अपडेट्स जरूर चेक कर लें।
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