इन लोगों को नहीं रखना चाहिए इस बार महाशिवरात्रि का व्रत, जानें विकल्प और पूजा के नियम
गर्भवती, स्तनपान कराने वाली, बीमार, बुजुर्गों को व्रत से बचना चाहिए; व्रत के बिना भी पूजा-मंत्र-दान से शिव कृपा प्राप्ति
Mahashivratri 2026: इस साल 15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखने की परंपरा है। हालांकि धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हर व्यक्ति के लिए व्रत रखना जरूरी नहीं है। कुछ विशेष परिस्थितियों में व्रत से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि किन लोगों को महाशिवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए और व्रत के बिना कैसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
महाशिवरात्रि का महत्व
फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। पूरे देश में इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। काशी और अन्य शहरों में भगवान शिव की भव्य बारात निकाली जाती है। शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखना बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत अगले दिन यानी 16 फरवरी को खोला जाएगा। लेकिन सभी लोगों के लिए यह व्रत रखना उचित नहीं है।
Mahashivratri 2026: गर्भवती महिलाओं को बचना चाहिए व्रत से
गर्भवती महिलाओं को महाशिवरात्रि का कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भावस्था में माँ और शिशु दोनों के लिए पौष्टिक आहार बहुत जरूरी होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। डॉक्टर भी गर्भवती महिलाओं को नियमित अंतराल पर कुछ न कुछ खाते रहने की सलाह देते हैं।
इसी तरह जो महिलाएं अपने नवजात शिशु को स्तनपान करवा रही हैं, उन्हें भी व्रत से बचना चाहिए। इस दौरान शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। निर्जला या कठोर व्रत इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
अगर फिर भी व्रत रखना चाहती हैं तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर की अनुमति मिलने पर फलाहार या हल्का भोजन लेकर व्रत रखा जा सकता है। याद रखें कि भगवान शिव एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। व्रत से ज्यादा जरूरी है सच्ची भक्ति।
मासिक धर्म के दौरान व्रत
परंपरागत रूप से मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मंदिर नहीं जाती हैं और मूर्तियों को स्पर्श नहीं करती हैं। हालांकि इस स्थिति में भी महिलाएं व्रत रख सकती हैं। घर पर रहकर भगवान शिव का मानसिक पूजन कर सकती हैं।
इस दौरान महिलाएं मन ही मन में भगवान शिव का ध्यान कर सकती हैं। ओम नमः शिवाय जैसे मंत्रों का जाप किया जा सकता है। यह भी भगवान शिव की आराधना का एक माध्यम है। सच्ची भक्ति से किया गया मानसिक पूजन भी फलदायी होता है।
Mahashivratri 2026: बीमारी में व्रत रखना खतरनाक
गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को महाशिवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए। खासतौर पर हृदय रोगियों, मधुमेह के मरीजों और उच्च या निम्न रक्तचाप वाले लोगों को व्रत से बचना चाहिए। इन बीमारियों में नियमित भोजन और दवा बहुत महत्वपूर्ण है।
लंबे समय तक भूखे रहना इन रोगियों की सेहत के लिए घातक हो सकता है। रक्त शर्करा का स्तर गिर सकता है या बढ़ सकता है। रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो सकता है। हृदय रोगियों को कमजोरी महसूस हो सकती है।
अगर व्रत रखना ही चाहते हैं तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर की अनुमति के बिना कभी भी व्रत न रखें। याद रखें कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। व्रत के बदले आप दान-पुण्य कर सकते हैं, शिव पूजा कर सकते हैं और मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इससे भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
बुजुर्गों के लिए विशेष सलाह
वृद्ध लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की क्षमता कम हो जाती है। लंबे समय तक बिना खाए रहना बुजुर्गों के लिए मुश्किल हो सकता है। उन्हें कमजोरी, चक्कर और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
बुजुर्गों को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए। अगर शरीर अनुमति देता है तो हल्का व्रत रखा जा सकता है। नहीं तो केवल पूजा-अर्चना करना ही पर्याप्त है। सच्चे मन से की गई पूजा भी उतनी ही फलदायी होती है।
बुजुर्ग इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान दे सकते हैं। भोजन, कपड़े या धन का दान पुण्य का काम है। मंदिर में दीप जलाना, फूल चढ़ाना और शिव चालीसा का पाठ करना भी शुभ होता है।
Mahashivratri 2026: व्रत के बिना कैसे करें पूजा?
जो लोग किन्हीं कारणों से व्रत नहीं रख सकते, वे अन्य तरीकों से भी भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। सबसे पहले सच्ची श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए। बाहरी आडंबर से ज्यादा महत्वपूर्ण है मन की पवित्रता।
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। बेलपत्र, धतूरा, फूल और दूध से पूजा करें। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा या शिव स्तोत्र का पाठ करें। संभव हो तो शिव मंदिर में दर्शन करें।
दान-पुण्य भी महत्वपूर्ण है। गरीबों को भोजन कराएं। जरूरतमंदों की मदद करें। मंदिर में दान दें। इन सभी कार्यों से भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। भक्ति में सबसे जरूरी है समर्पण का भाव। अगर मन से भगवान को याद किया जाए तो व्रत रखना अनिवार्य नहीं है।
महाशिवरात्रि एक पवित्र पर्व है लेकिन स्वास्थ्य की कीमत पर व्रत नहीं रखना चाहिए। अपनी क्षमता को समझें और उसी के अनुसार निर्णय लें। भगवान शिव दयालु हैं और हर भक्त की भावना को स्वीकार करते हैं।
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