म्यूचुअल फंड में ये 7 गलतियां डुबो सकती हैं आपका निवेश, जानें कैसे बचाएं अपना पोर्टफोलियो और पाएं बेहतर रिटर्न

लक्ष्यहीन निवेश, बाजार टाइमिंग, घबराहट में निकासी, ज्यादा फंड और रिव्यू न करना- बचें इनसे

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Mutual Fund Invest Tips: म्यूचुअल फंड में निवेश करना आसान है लेकिन सफल निवेशक बनना उतना ही कठिन। अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां आपके पोर्टफोलियो की ग्रोथ को रोक सकती हैं। आइए जानें वो सात आम गलतियां जो ज्यादातर निवेशक दोहराते हैं और उनसे बचने का सही तरीका।

Mutual Fund Invest Tips: म्यूचुअल फंड निवेश की 7 प्रमुख गलतियां

पहली गलती: जोखिम क्षमता और लक्ष्य को अनदेखा करना

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले दो सवालों के जवाब जरूरी हैं। पहला यह कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और दूसरा यह कि आपका निवेश किस लक्ष्य के लिए है। निवेश से पहले अपनी जोखिम प्रोफाइल का आकलन करें और लक्ष्य स्पष्ट करें।

दूसरी गलती: दूसरों की नकल करना

किसी दोस्त या रिश्तेदार को किसी फंड में अच्छा रिटर्न मिलते देख उसी फंड में पैसा लगा देना एक बेहद आम गलती है। अपनी वित्तीय स्थिति और जरूरतों के अनुसार ही पोर्टफोलियो बनाएं।

तीसरी गलती: हालिया रिटर्न से प्रभावित होना

अनुभवी निवेशक इसे Recency Bias कहते हैं। जो फंड इस साल सबसे ऊपर है वह अगले साल सबसे नीचे भी हो सकता है। कम से कम 5 साल या उससे अधिक के प्रदर्शन का विश्लेषण करना चाहिए।

चौथी गलती: बाजार को टाइम करने की कोशिश

बाजार की चाल का सटीक अनुमान लगाना लगभग असंभव है। मार्केट टाइमिंग के चक्कर में अक्सर निवेशक सही मौका चूक जाते हैं। इसकी बजाय टाइम इन द मार्केट यानी लंबे समय तक बाजार में बने रहने पर ध्यान दें।

पांचवीं गलती: घबराकर पैसा निकाल लेना

जब पोर्टफोलियो लाल दिखने लगता है तो कई निवेशक घबराकर अपना पूरा निवेश निकाल लेते हैं। यह सबसे बड़ी और महंगी गलतियों में से एक है क्योंकि इससे बाजार की संभावित रिकवरी का फायदा नहीं उठाया जा सकता।

छठी गलती: जरूरत से ज्यादा फंड रखना

विविधीकरण यानी डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। बहुत ज्यादा फंड रखने से असली डाइवर्सिफिकेशन नहीं होता और रिटर्न पर नकारात्मक असर पड़ता है। कम लेकिन बेहतर फंड चुनें।

सातवीं गलती: पोर्टफोलियो की समीक्षा न करना

एक बार निवेश करके भूल जाना भी एक गलती है। समय के साथ आपकी जरूरतें बदलती हैं, बाजार बदलता है और फंड का प्रदर्शन भी बदलता है। हर छह महीने या साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार री-बैलेंसिंग करें।

Mutual Fund Invest Tips: निवेश सुधार हेतु संक्षेप तालिका

गलती का प्रकार सुधार का उपाय
लक्ष्यहीनता निवेश से पहले वित्तीय लक्ष्य और समय सीमा तय करें।
बाजार का उतार-चढ़ाव घबराहट में निकलने के बजाय अपने पोर्टफोलियो पर टिके रहें।
अत्यधिक फंड पोर्टफोलियो में ओवरलैपिंग से बचें और चुनिंदा फंड रखें।
रिव्यू की कमी नियमित अंतराल पर पोर्टफोलियो की री-बैलेंसिंग करें।

निष्कर्ष: सफल निवेश एक यात्रा है, एक बार का काम नहीं। सही रणनीति, अनुशासन और धैर्य के बिना म्यूचुअल फंड निवेश भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकता।

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