महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे सुरक्षित देश घोषित! WPS इंडेक्स 2025-26 में डेनमार्क नंबर-1, जानें टॉप 10 और भारत की चौंकाने वाली रैंक

WPS इंडेक्स 2025-26 जारी, डेनमार्क नंबर-1; सोलो ट्रैवल के लिए टॉप 10 देश सामने

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WPS Index 2025-26: WPS इंडेक्स 2025-26 में 181 देशों की रैंकिंग जारी हुई है जिसमें महिलाओं की सुरक्षा के मामले में नॉर्डिक देश सबसे आगे हैं। लेकिन भारत की रैंकिंग जानकर आपको जरूर हैरानी होगी।

WPS Index 2025-26: दुनियाभर में बढ़ रहा है सोलो ट्रैवल का क्रेज

आज की आधुनिक महिला किसी का इंतजार नहीं करती। वह अकेले बैग उठाती है, टिकट बुक करती है और दुनिया की सैर पर निकल पड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में महिला सोलो ट्रैवलर्स की संख्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ी है। लेकिन जब भी कोई महिला अकेले यात्रा की योजना बनाती है तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि वह देश या शहर कितना सुरक्षित है। इसी सवाल का जवाब देने के लिए अमेरिका के जॉर्जटाउन इंस्टीट्यूट फॉर वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी ने पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के साथ मिलकर वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी यानी WPS इंडेक्स 2025-26 जारी किया है।

WPS Index 2025-26: क्या है WPS इंडेक्स और कैसे होती है रैंकिंग

वुमन, पीस एंड सिक्योरिटी इंडेक्स दुनिया की सबसे विश्वसनीय रिपोर्टों में से एक मानी जाती है। इसमें किसी देश को रैंक करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले, लैंगिक भेदभाव वाली नीतियां, सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंच तथा कानूनी सुरक्षा जैसे मानकों पर देशों का मूल्यांकन किया जाता है। इस इंडेक्स में दुनिया के 181 देशों को तीन मुख्य पैमानों पर परखा गया है जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, उनकी आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल हैं।

WPS Index 2025-26 डेनमार्क है नंबर वन, जानें क्यों

WPS इंडेक्स 2025-26 में डेनमार्क ने पहला स्थान हासिल किया है। यह देश महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तीनों मामलों में सर्वोच्च स्कोर हासिल करता है। यहां के कानून महिलाओं की सुरक्षा के प्रति बेहद कठोर हैं और सरकारी संस्थाएं पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह हैं। डेनमार्क में सार्वजनिक परिवहन बेहद सुरक्षित है और रात के समय भी महिलाएं अकेले आसानी से आवागमन कर सकती हैं। यहां की सामाजिक संस्कृति में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता का भाव गहरे तौर पर रचा बसा है।

WPS Index 2025-26: नॉर्वे और आइसलैंड का जलवा

दूसरे स्थान पर नॉर्वे है जो लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के मामले में लगातार शीर्ष पर बना रहता है। यहां भेदभाव के खिलाफ मजबूत नीतियां हैं और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बेहद प्रभावशाली है। नॉर्वे का अपराध दर बेहद कम है जो इसे अकेली यात्रा के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है। तीसरे पायदान पर आइसलैंड है जो अपनी प्रगतिशील सोच और लैंगिक समानता की नीतियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। आइसलैंड में अपराध दर इतनी कम है कि यहां की पुलिस को शायद ही कभी बड़े अपराधों से जूझना पड़ता है।

WPS Index 2025-26: स्वीडन और फिनलैंड भी हैं टॉप 5 में

चौथे स्थान पर स्वीडन है जो अपनी विकसित सामाजिक व्यवस्था और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली मजबूत कानूनी प्रणाली के लिए जाना जाता है। यहां की संस्कृति समावेश और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है जिससे महिला यात्रियों को एक भरोसेमंद माहौल मिलता है। पांचवें स्थान पर फिनलैंड है। यह देश शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे माना जाता है और इसी शिक्षित समाज का नतीजा है कि यहां महिलाओं के प्रति सम्मान और जागरूकता बहुत अधिक है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत कानूनी सुरक्षा फिनलैंड को एक आदर्श गंतव्य बनाती है।

WPS Index 2025-26: टॉप 10 में शामिल हैं ये देश भी

टॉप 5 के बाद लक्जमबर्ग छठे, बेल्जियम सातवें, नीदरलैंड्स आठवें, ऑस्ट्रिया नौवें और न्यूजीलैंड दसवें स्थान पर है। इन सभी देशों में एक बात समान है और वह है महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीरता। इन देशों में सरकारी नीतियां, सामाजिक ताना बाना और कानूनी व्यवस्था सब मिलकर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करते हैं। न्यूजीलैंड इस सूची में एकमात्र एशिया प्रशांत क्षेत्र का देश है जो टॉप 10 में जगह बना पाया है। यह भी बेहद आकर्षक पर्यटन स्थल होने के साथ साथ महिलाओं के लिए सुरक्षित देश के रूप में जाना जाता है।

WPS Index 2025-26: भारत की रैंकिंग ने चौंकाया

अब बात करते हैं उस रैंकिंग की जो सबसे ज्यादा चर्चा में है। WPS इंडेक्स 2025-26 में भारत को 131वां स्थान मिला है। यानी भारत टॉप 100 देशों में भी जगह नहीं बना पाया। यह रैंकिंग देश के लिए आत्ममंथन का विषय है। भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां लंबे समय से चर्चा में हैं। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा, कानूनी प्रक्रिया की धीमी गति और सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दे इस रैंकिंग को प्रभावित करते हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत की रैंकिंग में सुधार आएगा।

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