काशी विश्वनाथ धाम परिसर में स्थित मां श्रृंगार गौरी मंदिर साल में केवल एक दिन खुलता है, चैत्र नवरात्रि चतुर्थी पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़, नियमित दर्शन को लेकर कोर्ट में जारी सुनवाई

चैत्र नवरात्रि चतुर्थी पर खुलता मंदिर, हजारों श्रद्धालु करते हैं दर्शन

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Shringar Gauri temple: काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है और यहां हर गली में देवी देवताओं के पवित्र स्थल मिलते हैं। लेकिन इसी काशी में एक ऐसा मंदिर भी है जो पूरे 365 दिनों में से केवल एक दिन के लिए भक्तों के लिए खुलता है और उस एक दिन के लिए देश भर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

Shringar Gauri temple: मां श्रृंगार गौरी का मंदिर कहां स्थित है और इसकी क्या विशेषता है?

मां श्रृंगार गौरी का यह पवित्र स्थल वाराणसी के प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर के भीतर स्थित है। यह परिसर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है और यहां देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन के लिए आते हैं।

मां श्रृंगार गौरी की विशेषता यह है कि सुरक्षा कारणों से इस मंदिर में सामान्य दिनों में आम भक्तों का प्रवेश संभव नहीं है। वर्ष भर में केवल चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि को ही यहां दर्शन पूजन का अवसर मिलता है जो इस स्थल को असाधारण रूप से विशिष्ट बनाता है।

Shringar Gauri temple: चैत्र नवरात्रि चतुर्थी पर इस बार क्या हुआ?

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि रविवार के दिन पड़ी जिससे श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक हो गई। न केवल विभिन्न हिंदू संगठनों के सदस्य बल्कि आम नागरिक भी बड़ी संख्या में भजन गाते और माता का स्मरण करते हुए दर्शन के लिए पहुंचे।

साधु संतों ने विधि विधान के साथ पूजा अर्चना संपन्न कराई। इसके पश्चात भक्तों ने काशी की समृद्धि और देश की उन्नति के लिए मां श्रृंगार गौरी से आशीर्वाद मांगा। स्थानीय प्रशासन के अनुसार इस बार पिछले वर्षों की तुलना में भक्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

Shringar Gauri temple: मां श्रृंगार गौरी कौन हैं और इनका क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां श्रृंगार गौरी माता पार्वती का ही एक स्वरूप हैं जो सुहाग और सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं। काशी में उनकी उपस्थिति को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार काशी में भगवान शिव और माता गौरी का सहवास है और यही कारण है कि यहां उनके दर्शन का विशेष फल माना जाता है। विशेषकर सुहागिन महिलाएं और कन्याएं इस एकमात्र दर्शन के अवसर का वर्षों से बेसब्री से इंतजार करती हैं।

Shringar Gauri temple: साल में सिर्फ एक दिन दर्शन क्यों होते हैं और सुरक्षा का क्या कारण है?

यह मंदिर श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर के एक ऐसे हिस्से में स्थित है जहां सुरक्षा संबंधी कारणों से प्रतिदिन आम जनता का प्रवेश संभव नहीं है। परिसर की संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने केवल एक विशेष दिन दर्शन की अनुमति देने की परंपरा कायम रखी है।

धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस दुर्लभता ने ही इस दर्शन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। वर्ष में केवल एक बार मिलने वाले इस अवसर के लिए श्रद्धालु कई दिन पहले से तैयारी करते हैं और दूर दराज से काशी पहुंचते हैं।

Shringar Gauri temple: न्यायालय में नियमित दर्शन के लिए क्या मामला चल रहा है?

मां श्रृंगार गौरी मंदिर में नियमित दर्शन पूजन के अधिकार को लेकर अगस्त 2021 में पांच महिला वादिनियों की ओर से न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि भक्तों को प्रतिदिन दर्शन पूजन का अधिकार मिलना चाहिए।

इस मुख्य याचिका के साथ आधा दर्जन से अधिक संबंधित मुकदमे भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। मामले की सुनवाई अभी भी जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। इस बार नवरात्रि पर पहुंचे अधिकांश भक्तों की यह आकांक्षा थी कि न्यायालय से उनके पक्ष में फैसला आए और वे नियमित रूप से माता के दर्शन कर सकें।

Shringar Gauri temple: चैत्र नवरात्रि में काशी का धार्मिक वातावरण कैसा होता है?

चैत्र नवरात्रि हिंदू नव वर्ष के साथ शुरू होती है और यह समय काशी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। नौ दिनों तक पूरा शहर धार्मिक उत्सव में डूबा रहता है और घाटों पर भजन कीर्तन की गूंज सुनाई देती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में इन नौ दिनों के दौरान लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मां श्रृंगार गौरी दर्शन का दिन इस उत्सव का सबसे भावनात्मक और आध्यात्मिक शिखर माना जाता है क्योंकि यह अवसर वर्ष में केवल एक बार ही आता है।

निष्कर्ष

काशी के हर कोने में देवी देवताओं का वास है लेकिन मां श्रृंगार गौरी का यह मंदिर अपनी दुर्लभता के कारण सबसे अलग और विशिष्ट स्थान रखता है। साल में केवल एक दिन मिलने वाले इस दर्शन का इंतजार करना और फिर हजारों भक्तों के साथ माता के सामने नतमस्तक होना एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव है।

न्यायालय में चल रहे मुकदमे का फैसला आने के बाद यदि नियमित दर्शन की अनुमति मिलती है तो यह लाखों भक्तों की वर्षों पुरानी मनोकामना पूर्ण होगी। तब तक चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी का यह एक दिन मां श्रृंगार गौरी के भक्तों के लिए वर्ष का सबसे पवित्र और प्रतीक्षित दिन बना रहेगा।

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