मार्च का पहला दिन बेहद खास! रवि प्रदोष और शुक्र गोचर का दुर्लभ संयोग, जानें पूरा पंचांग

1 मार्च को रवि प्रदोष + शुक्र गोचर का दुर्लभ संयोग, नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र पाठ से हर पीड़ा दूर

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Ravi Pradosh 2026: मार्च 2026 की शुरुआत एक अत्यंत शुभ और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन से हो रही है। 1 मार्च 2026 को रविवार के दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पड़ रही है और इसी दिन रवि प्रदोष व्रत भी मनाया जाएगा। इसके अलावा इसी रात 12 बजकर 56 मिनट पर शुक्र ग्रह मीन राशि में प्रवेश करेंगे जो ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से एक बड़ी खगोलीय घटना है। इतने सारे शुभ संयोगों के एक साथ आने से 1 मार्च का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास बन गया है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार इस दिन का पंचांग जानना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

Ravi Pradosh 2026: 1 मार्च 2026 का संपूर्ण पंचांग

ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार 1 मार्च 2026 रविवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इस दिन सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा जिसके बाद आश्लेषा नक्षत्र का प्रारंभ हो जाएगा। दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक शोभन योग बना रहेगा जो किसी भी कार्य की सफलता के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को रवि प्रदोष कहा जाता है जिसे अत्यंत शुभकारी माना गया है।

Ravi Pradosh 2026: शुभ मुहूर्त का विवरण

1 मार्च 2026 को कई महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। यह मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है जिसमें किए गए कार्य सिद्ध होते हैं। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 42 मिनट से शाम 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 58 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा।

Ravi Pradosh 2026: राहुकाल का समय, इन कार्यों से करें परहेज

1 मार्च 2026 रविवार को विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय अलग-अलग रहेगा। दिल्ली में राहुकाल शाम 4 बजकर 54 मिनट से शाम 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। मुंबई में यह शाम 5 बजकर 16 मिनट से शाम 6 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। चंडीगढ़ में शाम 4 बजकर 55 मिनट से शाम 6 बजकर 21 मिनट तक राहुकाल रहेगा। लखनऊ में शाम 4 बजकर 40 मिनट से शाम 6 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। भोपाल में शाम 4 बजकर 55 मिनट से शाम 6 बजकर 23 मिनट तक, कोलकाता में शाम 4 बजकर 12 मिनट से शाम 5 बजकर 40 मिनट तक, अहमदाबाद में शाम 5 बजकर 14 मिनट से शाम 6 बजकर 42 मिनट तक और चेन्नई में शाम 4 बजकर 48 मिनट से शाम 6 बजकर 17 मिनट तक राहुकाल रहेगा। राहुकाल में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

Ravi Pradosh 2026: रवि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व

पुराणों में प्रदोष व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। हर माह में दो बार शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। जब यह व्रत रविवार को पड़ता है तो इसे रवि प्रदोष कहते हैं जो अत्यंत शुभफलदायी माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान सिद्ध होता है जो आत्मविश्वास की कमी या मानसिक अशांति से जूझ रहे हों।

Ravi Pradosh 2026: प्रदोष व्रत की पूजा विधि

रवि प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें। शाम को प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भांग शिवजी को अर्पित करें। शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना करें। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें।

Ravi Pradosh 2026: शुक्र का मीन राशि में गोचर, इन राशियों को मिलेगा लाभ

1 मार्च 2026 की मध्यरात्रि को 12 बजकर 56 मिनट पर शुक्र ग्रह मीन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को मीन राशि में उच्च का माना जाता है इसलिए यह गोचर अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण है। शुक्र के मीन राशि में आने से प्रेम, सौंदर्य, कला और विलासिता से जुड़े मामलों में विशेष उन्नति होने की संभावना बनती है। वृषभ, तुला, मीन और कर्क राशि के जातकों को इस गोचर से विशेष लाभ मिल सकता है। व्यापार और कला के क्षेत्र में भी यह समय अनुकूल रहने की संभावना है।

Ravi Pradosh 2026: होलाष्टक का भी रखें ध्यान

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 1 मार्च को होलाष्टक के आठ दिनों में से यह पांचवां दिन होगा। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। होलाष्टक के दौरान विवाह, मुंडन, नामकरण और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। हालांकि प्रदोष व्रत और भगवान शिव की उपासना इस दौरान भी पूर्ण रूप से की जा सकती है और इससे होलाष्टक के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है।

Ravi Pradosh 2026: आचार्य इंदु प्रकाश की सलाह

देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का दीर्घ अनुभव है, के अनुसार 1 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें और शिव मंत्रों का जाप करें। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव का विधिवत पूजन करें और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति की दृष्टि से बेहद अनुकूल है। रवि प्रदोष और शुक्र गोचर का यह दुर्लभ संयोग मार्च महीने को एक शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भर देगा।

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