मिडिल ईस्ट जंग का 15वां दिन बेहद खतरनाक, ईरान ने सऊदी स्थित अमेरिकी एयरबेस पर दागीं मिसाइलें; 5 रिफ्यूलिंग विमान तबाह, खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 5 अमेरिकी विमान नष्ट होने का दावा
Iran US conflict: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का 15वां दिन और भी खतरनाक साबित हुआ। ईरान ने सऊदी अरब के एयरबेस को निशाना बनाया, जिसमें अमेरिका के 5 रिफ्यूलिंग विमान नष्ट हो गए। खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद तनाव चरम पर है।
Iran US conflict: मिडिल ईस्ट की धरती फिर दहली
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग थमने का नाम नहीं ले रही। युद्ध के 15वें दिन हालात और भी भयावह हो गए हैं। ईरान ने सऊदी अरब स्थित एक अमेरिकी एयरबेस पर सीधा हमला कर दिया, जिसमें अमेरिका के 5 रिफ्यूलिंग विमानों को निशाना बनाया गया। यह हमला इस पूरे संघर्ष का अब तक का सबसे उकसावे वाला कदम माना जा रहा है। दुनियाभर के देश इस युद्ध को लेकर सांसें रोककर बैठे हैं क्योंकि यह संघर्ष अब किसी भी वक्त और बड़े रूप में भड़क सकता है।
Iran US conflict: खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमला, ईरान बौखलाया
शनिवार सुबह अमेरिका ने ईरान के सबसे अहम तेल केंद्र खर्ग द्वीप पर जबरदस्त हवाई हमले किए। इन हमलों में 15 से ज्यादा विस्फोट हुए और पूरे इलाके में काले धुएं के गुबार उठते नजर आए। खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यहां से ईरान का अधिकांश कच्चा तेल निर्यात होता है। इस हमले के बाद ईरान की खातम अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान के तेल, आर्थिक या ऊर्जा ठिकानों को दोबारा निशाना बनाया गया तो ईरान तुरंत और बेहद कठोर जवाबी कार्रवाई करेगा।
Iran US conflict: सऊदी एयरबेस पर ईरानी मिसाइल हमला
ईरान ने खर्ग द्वीप पर हमले का बदला लेने में देर नहीं की। सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ईरान ने मिसाइलें दागीं और अमेरिका के 5 रिफ्यूलिंग विमानों को तबाह कर दिया। ये विमान उन ऑपरेशन में काम आते हैं जिनसे लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन भरा जाता है। इनके नष्ट होने से अमेरिका की हवाई क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा। यह हमला इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि इसमें सऊदी अरब की धरती का इस्तेमाल बतौर युद्ध क्षेत्र हुआ। सऊदी अरब अब तक इस संघर्ष में सीधे तौर पर नहीं उलझा था, लेकिन ईरान के इस कदम के बाद खाड़ी देशों की स्थिति और जटिल हो गई है।
Iran US conflict: ईरान की नई शर्त और चीन का दांव
इसी बीच ईरान ने एक बड़ी कूटनीतिक चाल चली है। ईरान ने ऐलान किया है कि वह अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन की मुद्रा यानी युआन का इस्तेमाल करेगा। यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर की ताकत को चुनौती देने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों का असर कुछ हद तक कम हो सकता है और चीन के साथ उसकी आर्थिक नजदीकियां और बढ़ेंगी।
Iran US conflict: ट्रंप का दावा और वाशिंगटन में हड़कंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस युद्ध के चलते ऊर्जा की कीमतें जल्द गिरेंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए 30 दिनों की विशेष छूट जारी कर रहा है। यह फैसला ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए लिया गया है। वहीं वाशिंगटन के हवाई अड़्डों पर कुछ देर के लिए उड़ानें रोकी गईं, जिससे अमेरिका में भी बेचैनी का माहौल बना रहा। हालांकि बाद में हालात सामान्य होने की खबर आई।
Iran US conflict: लेबनान में भी आग
मिडिल ईस्ट में सिर्फ ईरान और अमेरिका ही नहीं बल्कि लेबनान भी युद्ध की चपेट में है। वहां एक स्वास्थ्य केंद्र पर हमला किया गया जिसमें कई लोगों के हताहत होने की खबर है। यह हमला उस वक्त हुआ जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका की जंग पर टिकी थीं। लेबनान में लगातार जारी हिंसा ने वहां की जनता की जिंदगी बेहाल कर दी है।
Iran US conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की सबसे बड़ी चिंता इस वक्त होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की कोशिश की तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और दुनियाभर में आर्थिक संकट गहरा सकता है। फिलहाल यह रास्ता खुला है लेकिन हालात को देखते हुए इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।
आगे क्या होगा
युद्ध का यह दौर दिन प्रतिदिन और खतरनाक होता जा रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान पीछे हटने के किसी भी संकेत नहीं दे रहा। इजरायल और अमेरिका भी अपने हमले जारी रखे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने युद्धविराम की अपील की है लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। दुनिया इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एक गलत कदम पूरे मिडिल ईस्ट को महाविनाश की ओर धकेल सकता है।
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