इजरायल-ईरान युद्ध के 24वें दिन बढ़ा तनाव, ट्रंप ने कहा ‘शक्ति से ही आती है शांति’, होर्मुज जलडमरूमध्य पर 48 घंटे का अल्टीमेटम, ईरान ने दी अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमले की चेतावनी
होर्मुज पर अल्टीमेटम के बाद बढ़ा तनाव, ईरान ने दी चेतावनी
Israel Iran war: दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलमार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य इन दिनों वैश्विक राजनीति और सैन्य तनाव के केंद्र में है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियां हैं और दूसरी तरफ ईरान का अडिग रुख। इस टकराव की आग में पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
Israel Iran war: ट्रंप का नया बयान क्या है और यह कब आया?
इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के 24वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक महत्वपूर्ण संदेश पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “PEACE THROUGH STRENGTH, TO PUT IT MILDLY!!!” यानी सीधे शब्दों में कहें तो शक्ति से ही शांति आती है।
यह बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। ट्रंप पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान को कठोर चेतावनी दे चुके हैं। उनकी यह पोस्ट तेहरान के लिए एक सुस्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
Israel Iran war: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप ने क्या अल्टीमेटम दिया था?
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद रहा तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर सीधा हमला करेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इसे बंद करने का अर्थ होगा वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथलपुथल और तेल की कीमतों में तीव्र उछाल।
Israel Iran war: ईरान ने ट्रंप की धमकी का क्या जवाब दिया?
ईरान ने ट्रंप के अल्टीमेटम को न केवल नकारा बल्कि करारा जवाब भी दिया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर यानी आईआरजीसी ने साफ कहा कि यदि अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करता है तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बिजली आपूर्ति करने वाले क्षेत्रीय बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा।
इसके अलावा आईआरजीसी ने इजरायल को संबोधित करते हुए उसके बुनियादी ढांचे पर हमले की भी चेतावनी दी। ईरान ने कहा कि वह पूरे बिजली नेटवर्क को ही ध्वस्त कर देने की क्षमता रखता है। यह प्रतिक्रिया स्पष्ट करती है कि तेहरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
Israel Iran war: होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत रणनीतिक जलमार्ग है। इसकी चौड़ाई अपने संकरे बिंदु पर मात्र कुछ दसियों किलोमीटर है।
वैश्विक तेल निर्यात का एक अत्यंत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और ईरान का तेल शामिल है। यदि यह मार्ग बंद होता है तो भारत सहित एशिया के तमाम देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। यही कारण है कि पूरी दुनिया इस विवाद पर नजर रखे हुए है।
Israel Iran war: इस संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है। पिछले 30 दिनों में ही कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि तेल की कीमतें और बढ़ीं तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं जिसका सीधा असर महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ेगा। भारत सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर उच्चस्तरीय बैठक भी की है।
Israel Iran war: ट्रंप का यह बयान वैश्विक कूटनीति पर कैसा असर डालेगा?
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप का “शक्ति से ही शांति” वाला बयान उनकी विदेश नीति के मूल सिद्धांत को दर्शाता है जिसे वे अपने पहले कार्यकाल से भी अपनाते रहे हैं। यह बयान केवल ईरान के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया को अमेरिका की स्थिति से अवगत कराने का संकेत है।
हालांकि अनेक वैश्विक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह की कड़ी भाषा कभी कभी वार्ता की संभावनाओं को भी कमजोर करती है। ईरान के आईआरजीसी के जवाबी बयान से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अभी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
निष्कर्ष
इजरायल ईरान युद्ध और उससे जुड़ा अमेरिका ईरान तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां हर बयान और हर कदम का वैश्विक प्रभाव होगा। ट्रंप का “शक्ति से शांति” का संदेश और ईरान की जवाबी चेतावनी यह स्पष्ट करती है कि दोनों पक्ष अभी किसी समझौते के करीब नहीं हैं।
इस संकट का सबसे बड़ा खतरा होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता को लेकर है जिस पर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति टिकी हुई है। भारत समेत एशिया के तमाम देशों के लिए यह जरूरी है कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और कूटनीतिक समाधान की ओर ध्यान दें।
read more here