गांधी प्रतिमा पर 5000 करोड़ खर्च के आरोपों पर रेवंत रेड्डी का पलटवार, बोले- असली लागत सिर्फ 70 करोड़; विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप
सीएम बोले, 5000 करोड़ का दावा झूठा, हैदराबाद में गांधी प्रतिमा पर खर्च होंगे सिर्फ 70 करोड़
Revanth Reddy statement: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विपक्ष के उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि हैदराबाद में बनने वाली गांधी प्रतिमा पर 5000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सीएम ने साफ कहा कि असली लागत महज 70 करोड़ रुपये है और यह पूरा विवाद राजनीति से प्रेरित है।
Revanth Reddy statement: विपक्ष के झूठ का पर्दाफाश
तेलंगाना की राजनीति में इन दिनों गांधी प्रतिमा को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शनिवार को एक बड़ा बयान देते हुए विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में प्रस्तावित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर केवल 70 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। यह दावा कि इस परियोजना की लागत 5000 करोड़ रुपये है, पूरी तरह झूठा, भ्रामक और राजनीतिक स्वार्थ से भरा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जानबूझकर गलत आंकड़े फैलाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे लोग न तो इतिहास का सम्मान करते हैं और न ही जनहित में सोचते हैं। उनका मकसद सिर्फ सरकार को बदनाम करना है।
Revanth Reddy statement: अंबेडकर प्रतिमा पर क्यों नहीं उठाए सवाल
रेवंत रेड्डी ने विपक्ष की दोहरी नीति को उजागर करते हुए एक तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा कि जब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के निर्माण पर 220 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, तब इन्हीं विरोधियों में से किसी ने भी एक शब्द नहीं बोला था। तब कोई प्रदर्शन नहीं हुआ, कोई हंगामा नहीं मचाया गया। लेकिन जैसे ही गांधी प्रतिमा की बात आई, ये लोग अचानक जाग गए। मुख्यमंत्री ने इसे खुला दोहरा मानदंड करार देते हुए कहा कि यह रवैया यह साबित करता है कि विरोध किसी सिद्धांत पर नहीं बल्कि शुद्ध राजनीति पर आधारित है।
Revanth Reddy statement: हैदराबाद के इतिहास को जिंदा रखना जरूरी
रेवंत रेड्डी ने अपने बयान में एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने पूछा कि क्या हम राजनीतिक स्वार्थ के लिए हैदराबाद के गौरवशाली इतिहास और विरासत को दफन कर दें? उनके मुताबिक, किसी भी जिम्मेदार सरकार का यह कर्तव्य है कि वह इतिहास को सम्मान दे और उसे जनता के सामने जीवंत रूप में पेश करे। उन्होंने कहा कि प्रतिमा निर्माण केवल एक ढांचा खड़ा करना नहीं है बल्कि यह उन मूल्यों और विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है जिनके लिए महात्मा गांधी ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
Revanth Reddy statement: HYDRAA का जमकर किया बचाव
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस मौके पर हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति निगरानी और संरक्षण प्राधिकरण यानी HYDRAA का भी जोरदार बचाव किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब HYDRAA की स्थापना की गई थी तब भी इसकी जमकर आलोचना हुई थी। विपक्ष ने इसे अनावश्यक और जनविरोधी करार दिया था। लेकिन जब HYDRAA ने हैदराबाद के तालाबों और जलाशयों को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराकर उन्हें आम जनता के लिए सुलभ बनाया तो पूरे शहर ने इस कदम की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही हाल गांधी प्रतिमा परियोजना का भी होगा। आज जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे कल इसकी प्रशंसा करेंगे।
Revanth Reddy statement: मूसी नदी परियोजना पर सरकार अडिग
रेवंत रेड्डी ने मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना का जिक्र करते हुए विरोधियों को एक अनोखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ऐसे सभी विरोधियों के लिए परियोजना स्थल के पास कंटेनर हाउस की व्यवस्था करेगी जिनमें सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह संदेश बिल्कुल साफ है—तेलंगाना सरकार मूसी नदी परियोजना को पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्पित है। किसी भी तरह का विरोध सरकार की नीति और नीयत को नहीं बदल सकता।
Revanth Reddy statement: राजनीतिक घमासान और जनता की राय
तेलंगाना में इस पूरे विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी और भारत राष्ट्र समिति दोनों ही कांग्रेस सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाती रही हैं। उनका कहना है कि जब राज्य में विकास की जरूरत है तब प्रतिमाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करना उचित नहीं है। हालांकि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इन सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि सरकार विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। हैदराबाद को एक आधुनिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध शहर बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
आगे की राह
गांधी प्रतिमा का यह विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। विपक्ष अपने आरोपों पर कायम है जबकि सरकार अपनी योजना से पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव किस दिशा में जाता है और क्या जनता सरकार के फैसले को स्वीकार करती है या विपक्ष के सुर में सुर मिलाती है।
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