मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उदयनिधि स्टालिन का सनातन बयान हेट स्पीच, 80% हिंदुओं के खिलाफ था

मद्रास HC ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म बयान को हेट स्पीच करार दिया, अमित मालवीय की FIR रद्द

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Tamilnadu Politics: तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सनातन धर्म को लेकर उनके विवादास्पद बयान को हेट स्पीच करार दिया है। मंगलवार को आए इस फैसले में अदालत ने कहा कि उदयनिधि का बयान भारत की अस्सी प्रतिशत हिंदू आबादी के खिलाफ था। यह फैसला चुनावी साल में डीएमके और सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बीजेपी नेता की एफआईआर रद्द

न्यायमूर्ति एस श्रीमति की एकल पीठ ने बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। मालवीय ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का विरोध किया था जिसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। अदालत ने माना कि मालवीय ने केवल सनातन धर्म का बचाव किया था और इसमें आईपीसी के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं हुआ।

अदालत ने कहा कि मालवीय जो खुद एक सनातनी हैं, इस तरह के नफरत भरे भाषण के शिकार थे। उन्होंने केवल अपने धर्म का बचाव किया जो उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

क्या था पूरा विवाद

यह मामला सितंबर दो हजार तेईस का है जब तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन ने सनातन उन्मूलन सम्मेलन नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से की थी। उन्होंने सनातन धर्म के उन्मूलन का आह्वान किया था।

इस भाषण का वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में विरोध शुरू हो गया। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया पर साझा किया और सख्त टिप्पणी की। डीएमके के वकील विंग के त्रिची दक्षिण जिला संगठक केवी दिनाकरन ने मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि मालवीय ने भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश किया और नफरत फैलाई।

अदालत ने क्या कहा?

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अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। न्यायालय ने कहा कि मंत्री (Tamilnadu Politics) का भाषण अस्सी प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ था और यह नफरत भरे भाषण के दायरे में आता है। अदालत ने कहा कि ऐसे भड़काऊ बयान से सनातन धर्म का पालन करने वालों को खतरा हो सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि उदयनिधि के भाषण से नरसंहार का अर्थ निकल सकता है। यह बेहद गंभीर टिप्पणी है जो दर्शाती है कि अदालत ने इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि मंत्री का भाषण गंभीर प्रकृति का था और इसमें सनातन धर्म का पालन करने वाले भारत के अधिकांश नागरिकों के खिलाफ नफरत भड़काने की क्षमता थी।

Tamilnadu Politics: डीएमके पर सवाल

अदालत ने डीएमके पार्टी (Tamilnadu Politics) की कार्यशैली पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसी विशिष्ट घटनाओं के रिकॉर्ड हैं जहां पार्टी द्वारा हिंदू धर्म पर हमला किया गया था। अदालत ने उदाहरण दिया कि भगवान राम की मूर्ति को चप्पल से माला पहनाई गई और गणेश की मूर्तियों को तोड़ा गया।

अदालत ने कहा कि हालांकि इन मामलों में शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई। इस प्रकार अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पार्टी द्वारा हिंदुओं पर स्पष्ट हमला किया गया था। यह टिप्पणी डीएमके के लिए शर्मनाक है क्योंकि अदालत ने सीधे तौर पर पार्टी की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

मालवीय का पक्ष

अमित मालवीय ने अदालत (Tamilnadu Politics) में तर्क दिया था कि उन्होंने केवल मंत्री का भाषण निकाला था जो पहले से ही मीडिया में था। उन्होंने भाषण के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए अपनी समझ व्यक्त की थी। मालवीय ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप झूठे, बेतुके और राजनीति से प्रेरित हैं।

मालवीय ने तर्क दिया कि मंत्री का भाषण गंभीर प्रकृति का था और इसमें हिंसा को प्रोत्साहित करने की क्षमता थी। उन्होंने कहा कि एक सनातनी के रूप में उन्हें अपने धर्म का बचाव करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने उनकी सभी दलीलें मान लीं और एफआईआर रद्द कर दी।

अभियोजन पक्ष का तर्क

अभियोजन पक्ष (Tamilnadu Politics) ने तर्क दिया था कि मालवीय ने मंत्री के भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश किया और फर्जी जानकारी फैलाई। उनका कहना था कि मालवीय ने ऐसी टिप्पणी की जैसे कि मंत्री ने नरसंहार का आह्वान किया हो। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि जिस पक्ष से मंत्री संबंधित हैं, उसने सनातन धर्म के बारे में बार-बार आपत्तिजनक बातें कही हैं। इसलिए समग्र परिस्थितियों पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने माना कि मालवीय की व्याख्या गलत नहीं थी।

दुखद स्थिति

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि नफरत फैलाने वाले भाषण (Tamilnadu Politics) के लिए मंत्री के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था। लेकिन यह दुखद था कि इस पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया। यह टिप्पणी दोहरे मापदंड को उजागर करती है।

अदालत का यह कहना बिल्कुल सही है कि जिस व्यक्ति ने आपत्तिजनक भाषण दिया उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन जिसने उसका विरोध किया उसे परेशान किया गया। यह न्याय की भावना के खिलाफ है।

Tamilnadu Politics: राजनीतिक असर

यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति (Tamilnadu Politics) में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। दो हजार छब्बीस चुनावी साल है और यह फैसला बीजेपी को मजबूती देता है। बीजेपी अब इस फैसले को हथियार बनाकर डीएमके पर हमला कर सकती है।

डीएमके के लिए यह फैसला शर्मनाक है क्योंकि अदालत ने साफ शब्दों में उनकी पार्टी और उपमुख्यमंत्री के बयान की आलोचना की है। अब देखना होगा कि डीएमके इस फैसले का कैसे जवाब देती है। पार्टी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है लेकिन हाईकोर्ट का यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका है।

इस फैसले से यह संदेश भी जाता है कि किसी भी धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान देना गंभीर मामला है और अदालतें इसे हल्के में नहीं लेतीं।

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