सोना गिरवी रखने की लहर! एक महीने में 24 हजार करोड़ का लोन, RBI के आंकड़े चौंकाने वाले भारतीयों का सोने से रिश्ता बदल रहा है

एक महीने में 24 हजार करोड़ का गोल्ड लोन, RBI आंकड़े चौंकाने वाले; DA से ज्यादा बढ़ा यह लोन

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RBI data gold loans: भारत में सोने को हमेशा से सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता रहा है। पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है कि बुरे वक्त में काम आने के लिए घर में सोने के गहने जरूर रखे जाएं। लेकिन अब इस परंपरा का स्वरूप बदल रहा है। लोग सोना बेच नहीं रहे बल्कि उसे गिरवी रखकर तत्काल नकदी जुटा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं वे सबको चौंकाने वाले हैं। दिसंबर 2025 के अकेले एक महीने में देशभर में 24,061 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन लिया गया। यह आंकड़ा देश की बदलती आर्थिक तस्वीर की कहानी बयान करता है।

RBI data gold loans: RBI की रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

भारतीय रिजर्व बैंक की मासिक रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गोल्ड लोन का चलन अब एक छोटे तबके तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब देश के व्यापक वर्ग की आर्थिक जरूरतों का हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक गोल्ड ज्वैलरी के बदले लिए जाने वाले लोन में सालाना आधार पर 127.6 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष के आधार पर भी यह वृद्धि 85.5 प्रतिशत रही है जो किसी भी लोन कैटेगरी में असाधारण उछाल मानी जाती है।

RBI data gold loans: कुल बकाया लोन का आंकड़ा भी हैरान करने वाला

31 मार्च 2025 तक जहां गोल्ड लोन का कुल बकाया 2,06,282 करोड़ रुपये था वहीं नवंबर 2025 में यह बढ़कर 3,58,645 करोड़ रुपये हो गया। महज एक महीने बाद यानी 31 दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा और बढ़कर 3,82,706 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इन संख्याओं को देखकर साफ पता चलता है कि किस तेजी से लोग सोना गिरवी रखकर पैसे उठा रहे हैं। महीनों में इतनी तेज रफ्तार से बढ़ता यह आंकड़ा बताता है कि गोल्ड लोन अब लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

RBI data gold loans: पर्सनल लोन को भी पीछे छोड़ दिया गोल्ड लोन ने

एक और चौंकाने वाली बात यह है कि दिसंबर 2025 तक गोल्ड लोन की कुल बकाया राशि 16.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है जो पर्सनल लोन की कुल राशि 15.9 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। इसका मतलब साफ है कि अब लोग अचानक आई जरूरतों के लिए बिना किसी गारंटर या लंबी कागजी प्रक्रिया के झंझट में पड़े बिना सोना गिरवी रखने का रास्ता चुन रहे हैं। वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के बाद से उपभोग लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी दोगुनी हो चुकी है। हालांकि होम लोन अब भी सबसे बड़ी श्रेणी है जिसकी कुल राशि करीब 43 लाख करोड़ रुपये है।

RBI data gold loans: आखिर क्यों इतना लोकप्रिय हो गया गोल्ड लोन

गोल्ड लोन की इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई ठोस कारण हैं। पहली बात यह है कि इस लोन को पाने की प्रक्रिया बेहद सरल और तेज है। बैंक या फाइनेंस कंपनी केवल सोने की शुद्धता जांचती है और उसी आधार पर लोन मंजूर कर देती है। लंबे-चौड़े कागजी दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ते और सिबिल स्कोर की भी कोई सख्त जांच नहीं होती। इसीलिए जिन लोगों का क्रेडिट इतिहास बहुत अच्छा नहीं है वे भी आसानी से गोल्ड लोन ले सकते हैं।

दूसरी बड़ी वजह यह है कि 2.5 लाख रुपये तक के छोटे गोल्ड लोन में सोने की कुल कीमत का 85 प्रतिशत तक लोन मिल सकता है। इसका मतलब है कि अगर आपके पास 1 लाख रुपये के सोने के गहने हैं तो आप 85,000 रुपये तक का लोन तुरंत पा सकते हैं। इसके अलावा गोल्ड लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के मुकाबले कम होती है जिससे यह आर्थिक रूप से भी समझदारी भरा विकल्प बनता है।

RBI data gold loans: क्या यह बढ़ता ट्रेंड वित्तीय दबाव का संकेत है

विशेषज्ञों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि गोल्ड लोन में यह असाधारण वृद्धि केवल लोन उत्पाद की सुविधा का परिणाम नहीं है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा के खर्चों में इजाफा और परिवारों पर बढ़ता आर्थिक दबाव भी एक बड़ी वजह है। जब घर की जरूरी जरूरतें पूरी करने के लिए आसानी से पैसे नहीं जुट पाते तो लोग अपने गहने गिरवी रखने का रास्ता चुनते हैं। यह एक तरह से इमरजेंसी फंड की तरह काम करता है जो अचानक आई मुश्किल में राहत देता है।

RBI data gold loans: आने वाले वक्त में क्या होगा

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के सामने अब यह सवाल है कि गोल्ड लोन की यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या धीरे-धीरे कम होगी। अगर महंगाई और आर्थिक दबाव बना रहा तो लोग इसी तरह सोना गिरवी रखते रहेंगे। दूसरी तरफ अगर आय में सुधार होता है और वित्तीय स्थिरता आती है तो यह ट्रेंड थोड़ा कम हो सकता है। लेकिन एक बात तय है कि गोल्ड लोन अब केवल ग्रामीण या निम्न आय वर्ग का हथियार नहीं रहा। यह शहरी मध्यम वर्ग की भी पहली पसंद बनता जा रहा है।

कुल मिलाकर RBI के ये आंकड़े देश की बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। सोना जो कभी केवल शादी-ब्याह और त्योहारों की शान था, अब रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाला सबसे भरोसेमंद वित्तीय साधन बनता जा रहा है।

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