सूरजकुंड झूला हादसा,- 8 दिन बाद भी नहीं बनी जांच रिपोर्ट, अधिकारी मेले की व्यस्तता का बना रहे बहाना, लापरवाही पर उठ रहे सवाल
अधिकारी मेले की व्यस्तता बना रहे बहाना, SIT को दस्तावेज नहीं मिल रहे, लापरवाही पर सवाल
Surajkund Mela Accident: सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में घातक झूला हादसे को आठ दिन से अधिक समय हो जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। प्रशासनिक अधिकारियों की छह सदस्यीय जांच समिति मेले में व्यस्तता का बहाना बनाकर जांच से पल्ला झाड़ रही है, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पूरा मामला स्पष्ट और सबके सामने होने के बावजूद अधिकारी जांच को गंभीरता से नहीं ले रहे। इस बीच, मामले की जांच कर रही पुलिस स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को भी जरूरी जानकारी और दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं, जिससे जांच में देरी हो रही है।
Surajkund Mela Accident: जांच समिति की लापरवाही पर सवाल
सूरजकुंड मेले में हुए झूला हादसे की जांच के लिए गठित छह सदस्यीय समिति अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाई है।
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बहाना: समिति के सदस्य सूरजकुंड मेले में अपने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देकर जांच से बच रहे हैं। यह रवैया प्रशासनिक जवाबदेही और गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
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निरीक्षण में कमी: सूत्रों के अनुसार, जांच समिति के सदस्यों ने हादसे की जगह का विस्तृत निरीक्षण नहीं किया है और न ही संबंधित लोगों से विस्तार से पूछताछ की है।
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अधूरा कार्य: समिति को घटना के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा मानकों के पालन और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करनी थी, लेकिन यह काम अभी तक अधूरा है।
Surajkund Mela Accident: पुलिस SIT को नहीं मिल रहे जरूरी दस्तावेज
मामले की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को भी अधिकारियों से सहयोग नहीं मिल रहा है:
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दस्तावेजों की कमी: झूले की स्थापना से संबंधित अनुमति पत्र, सुरक्षा प्रमाण पत्र, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
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जांच में बाधा: SIT के अधिकारियों ने कई बार संबंधित विभागों से दस्तावेज मांगे हैं, लेकिन उन्हें टाल-मटोल का सामना करना पड़ रहा है। इन दस्तावेजों के बिना यह स्थापित करना मुश्किल है कि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
Surajkund Mela Accident: आठ सदस्यीय टीम की भूमिका अस्पष्ट
झूला लगाने से पहले आठ सदस्यों वाली एक टीम ने इसकी जांच की थी और इसे चालू करने की अनुमति दी थी। लेकिन इस टीम की भूमिका पर अब सवाल उठ रहे हैं:
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क्या समिति ने वास्तव में झूले की सुरक्षा की गहन जांच की थी?
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क्या सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों का सत्यापन किया गया था?
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इन सवालों का सीधा और स्पष्ट जवाब अधिकारी नहीं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच सही होती, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा टल सकता था।
Surajkund Mela Accident: पर्यटन निगम और अन्य अधिकारी जांच के दायरे में
सूत्रों से पता चला है कि हरियाणा पर्यटन निगम के अधिकारियों समेत कई प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में जांच के दायरे में हैं:
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जिम्मेदारी: पर्यटन निगम की जिम्मेदारी थी कि वे मेले में लगने वाले सभी उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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गंभीर लापरवाही: कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बिना उचित जांच के झूले को चालू करने की अनुमति दे दी। यही कारण है कि जांच रिपोर्ट को अब ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है।
Surajkund Mela Accident: नई जांच समिति का गठन
अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में एक नई और व्यापक जांच समिति बनाई गई है, जिसमें शामिल हैं:
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लोक निर्माण विभाग के मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कार्यपालक अभियंता।
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जे.सी. बोस YMCA विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल विभाग के चेयरमैन।
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अग्निशमन अधिकारी और HSVP के SDO इलेक्ट्रिकल।
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हरियाणा राज्य परिवहन विभाग से मैकेनिकल प्रभारी।
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हरियाणा पर्यटन से एक जूनियर इंजीनियर।
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इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टोरेट से एक कार्यपालक अभियंता।
स्थिति: समिति के अध्यक्ष और अतिरिक्त उपायुक्त सतबीर मान केवल यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि “जांच चल रही है।”
Surajkund Mela Accident: हादसे की गंभीरता और मांग
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सुरक्षा से खिलवाड़: सूरजकुंड मेला एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है। यह हादसा दिखाता है कि सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
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जनता की मांग: पीड़ितों के परिजन और स्थानीय लोग तेज जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जांच में देरी न्याय में देरी है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
सूरजकुंड झूला हादसे की जांच में हो रही देरी और अधिकारियों का लापरवाह रवैया चिंताजनक है। जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
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