कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 5.4 मापी गई तीव्रता; नेपाल और सिक्किम भी हिले
पश्चिम बंगाल, नेपाल और सिक्किम में महसूस हुए झटके, केंद्र बांग्लादेश में; अभी तक कोई बड़ा नुकसान नहीं
Earthquake in Bengal: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और राज्य के कई अन्य जिलों में शुक्रवार दोपहर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट पर आए इस भूकंप ने कोलकातावासियों को दहशत में डाल दिया। लोग घरों, दफ्तरों और अन्य इमारतों से बाहर निकल आए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.4 मापी गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार इस भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में बताया जा रहा है। अभी तक किसी भी जानमाल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
Earthquake in Bengal: कोलकाता में कैसा था माहौल
दोपहर के समय जब लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तभी अचानक जमीन हिलने लगी। कोलकाता के विभिन्न इलाकों में लोगों ने कुछ सेकंड तक तेज कंपन महसूस किया। ऊंची इमारतों में रहने और काम करने वाले लोगों को झटके अपेक्षाकृत अधिक तीव्र लगे। भूकंप के झटकों के बाद लोग घबराकर इमारतों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। कुछ देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। सोशल मीडिया पर भी कोलकाता के नागरिकों ने भूकंप के अनुभव साझा किए और एक-दूसरे की खैरखबर ली।
राज्य के अन्य जिलों से भी भूकंप के झटके महसूस होने की खबरें आई हैं। हालांकि अभी तक किसी भी जिले से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
Earthquake in Bengal: भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में
भूकंप विशेषज्ञों और भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस भूकंप का केंद्र बांग्लादेश में था। यही कारण है कि बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल के जिलों में भूकंप के झटके अधिक तीव्रता से महसूस हुए। 5.4 की तीव्रता को मध्यम श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस श्रेणी के भूकंप से आमतौर पर बड़ी तबाही तो नहीं होती, लेकिन कमजोर और पुरानी इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए अधिकारियों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश केंद्रित भूकंप के झटके पश्चिम बंगाल में महसूस हुए हों। भौगोलिक दृष्टि से यह पूरा क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। बंगाल की खाड़ी और हिमालय की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में भूकंप की संभावना सदैव बनी रहती है।
Earthquake in Bengal: नेपाल में भी आया भूकंप
पश्चिम बंगाल में आए भूकंप से पहले इसी सप्ताह नेपाल के पूर्वी हिस्से में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। शुक्रवार तड़के रात 3 बजकर 18 मिनट पर नेपाल के संखुवासभा जिले में भूकंप के झटके आए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई। इस समय अधिकांश लोग नींद में थे और अचानक आए झटकों ने उन्हें घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया।
नेपाल में इस भूकंप का मुख्य केंद्र काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर पूर्व में स्थित संखुवासभा और ताप्लेजंग जिले की सीमा के पास टोपके गोला नामक स्थान पर था। इस भूकंप के झटके संखुवासभा के अलावा भोजपुर, पंचथर, तेहरथुम और ताप्लेजंग जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि इस भूकंप में भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई।
Earthquake in Bengal: सिक्किम भी झेल चुका है भूकंप के झटके
इस सप्ताह के भूकंपों की श्रृंखला में सिक्किम भी शामिल रहा। गुरुवार को सिक्किम में 4.6 और 3.5 तीव्रता के दो भूकंप आए। पहले भूकंप का केंद्र ग्यालशिंग जिले के युक्सोम से चार किलोमीटर उत्तर-पूर्व में 10 किलोमीटर की गहराई में था। दूसरा भूकंप दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर मांगन जिले में महसूस किया गया। इसका केंद्र गंगटोक से 11 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
सिक्किम वैसे भी भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह राज्य उच्च भूकंपीय क्षेत्र में आता है। यहां बार-बार भूकंप आना आम बात है, लेकिन राज्य प्रशासन और नागरिक दोनों ही इसके लिए पहले से सतर्क रहते हैं।
Earthquake in Bengal: पूर्वोत्तर भारत क्यों है भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र और उससे सटे नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे देश भूकंपीय दृष्टि से दुनिया के सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती रहती हैं। इन प्लेटों की निरंतर गतिविधि के कारण इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार पूर्वोत्तर भारत को भूकंप संवेदनशील क्षेत्र की पांचवीं और चौथी श्रेणी में रखा गया है जो सबसे खतरनाक श्रेणियां मानी जाती हैं। इस क्षेत्र में अतीत में कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। 1950 में असम में आया 8.6 तीव्रता का भूकंप इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जाता है।
Earthquake in Bengal: भूकंप आने पर क्या करें, क्या न करें
भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से नुकसान को कम किया जा सकता है। भूकंप के झटके महसूस होने पर तुरंत किसी मजबूत टेबल या बेड के नीचे छिप जाएं। यदि बाहर हैं तो खुले स्थान पर जाएं और इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। भूकंप के दौरान लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल न करें। झटके थमने के बाद इमारत से बाहर निकलें और राहत और बचाव दल के निर्देशों का पालन करें।
Earthquake in Bengal: प्रशासन की अपील
पश्चिम बंगाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और शांत रहें। किसी भी प्रकार की क्षति या आपातकाल की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन से संपर्क करें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करें।
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