पश्चिम एशिया युद्ध की आग में जला दलाल स्ट्रीट: एक महीने में निवेशकों के ₹51 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 16% टूटा, ब्रेंट क्रूड $117 के पार और FII की रिकॉर्ड ₹1 लाख करोड़ की निकासी से बाजार में कोहराम
पश्चिम एशिया युद्ध से शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 16% टूटा, ब्रेंट क्रूड $117 पार, FII ने ₹1 लाख करोड़ निकाले
Stock Market Crash India: पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बाद से भारतीय शेयर बाजार में जो तूफान आया है, उसने निवेशकों की करीब 51 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा कर दी है। सेंसेक्स अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से 16 प्रतिशत से अधिक लुढ़क चुका है। ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर पार कर गया है और विदेशी निवेशकों ने मार्च में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल लिए हैं। यह गिरावट 2020 के कोविड संकट के बाद सबसे भयावह मानी जा रही है। भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा। 28 फरवरी से 31 मार्च के बीच बीएसई सेंसेक्स 9,339 अंकों की भारी गिरावट के साथ 11.48 प्रतिशत नीचे आ गया।
Stock market crash India: युद्ध का वैश्विक संदर्भ और बाजार पर गहरा आघात
सेंसेक्स ने अपना सर्वकालिक शिखर 86,159 अंक पर छुआ था, जिसके बाद से अब तक यह सूचकांक 14,211 अंक यानी 16.49 प्रतिशत तक टूट चुका है। पश्चिम एशिया में युद्ध भड़कने के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने निवेशकों को जोखिम भरे बाजारों से दूर भागने पर मजबूर कर दिया। बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (Market Cap) घटकर 412 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया है। महज एक महीने में निवेशकों की 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की दौलत बाजार में समा गई।
Stock market crash India: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का डर
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.15 प्रतिशत उछलकर 117.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। तेल उत्पादक देशों में तनाव से आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कच्चे तेल को आसमान पर पहुंचा दिया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें सीधे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर डालती हैं। इस स्थिति ने बाजार की धारणा को और कमजोर कर दिया है, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल है।
Stock market crash India: विदेशी निवेशकों (FII) की रिकॉर्ड निकासी
मार्च महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय बाजारों से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर ली। यह पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा एकल मासिक बहिर्प्रवाह है। रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक जोखिम ने विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली को और तेज किया। जब बड़े संस्थागत निवेशक एक साथ बाजार से बाहर निकलते हैं, तो इसका सबसे बुरा असर खुदरा निवेशकों पर पड़ता है। रिस्क-ऑफ (Risk-off) के इस माहौल ने बाजार की कमर तोड़ दी है।
Stock market crash India: बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण
पोनमुडी आर (CEO, एनरिच मनी): “ऊंचे कच्चे तेल के दाम और मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम ने बाजार में डर का माहौल बना दिया है।”
पबित्रो मुखर्जी (Technical Research Head, बजाज ब्रोकिंग): “2020 के कोविड संकट के बाद बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति इस समय सबसे अधिक देखी गई है।”
सिद्धार्थ खेमका (मोतीलाल ओसवाल): “अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव बाजार पर लगातार दबाव बनाए हुए है और इसका असर अन्य उद्योग क्षेत्रों तक भी फैल रहा है।”
Stock market crash India: वित्त वर्ष के आखिरी दिन का झटका और भविष्य की राह
31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्धविराम या शांति वार्ता के ठोस संकेत नहीं आते, तब तक बाजार में दबाव बना रहेगा। यदि कच्चा तेल 120 डॉलर पार करता है, तो और गिरावट आ सकती है। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजे और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बाजार को सहारा दे सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार की यह गिरावट मुख्यतः बाहरी और भू-राजनीतिक कारणों से आई है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत है, लेकिन पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य होने तक अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को इस कठिन दौर में धैर्य रखना होगा और भावनाओं में बहकर बिकवाली करने से बचना होगा। दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखने वालों के लिए यह गिरावट अच्छे शेयरों में प्रवेश का अवसर भी हो सकती है।
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