घाटे में डूबे राज्य फिर भी बांट रहे मुफ्त की रेवड़ियां, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार; CJI बोले- देश का आर्थिक विकास होगा बाधित
घाटे में डूबे राज्य भी रेवड़ियां बांट रहे, CJI बोले- आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान, 25% राजस्व विकास पर खर्च हो
Supreme Court News: सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों की मुफ्त योजनाओं पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि घाटे में चलने वाले राज्य भी रेवड़ियां बांट रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की फिजूलखर्ची से देश की आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
Supreme Court News: CJI सूर्यकांत की प्रमुख टिप्पणियाँ
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान राजनीतिक जगत के लिए निम्नलिखित गंभीर सवाल उठाए:
-
आर्थिक विकास में बाधा: फिजूलखर्ची से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। राज्य का कर्तव्य संसाधन उपलब्ध कराना है, लेकिन यह भी देखना होगा कि पात्र कौन है।
-
विकास पर खर्च: राज्य के वार्षिक राजस्व का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विकास कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए।
-
राजकोषीय अनुशासन: घाटे में होने के बावजूद मुफ्त योजनाओं की बौछार करना गैर-जिम्मेदाराना और भविष्य के लिए खतरनाक है।
Supreme Court News: न्यायमूर्ति बागची के सुझाव
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया:
-
सुनियोजित बजट: बेरोजगारी जैसी समस्याओं के लिए एक सुनियोजित बजट प्रस्ताव होना चाहिए, जिसमें व्यय का उद्देश्य और दीर्घकालिक लाभ स्पष्ट हो।
-
प्रोत्साहन: बेरोजगारी भत्ता जैसी योजनाएं अधिक व्यावहारिक हो सकती हैं क्योंकि वे लोगों को काम करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
Supreme Court News: फ्रीबी राजनीति का बढ़ता संकट और खतरे
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समस्या पूरे देश में व्याप्त है और इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं:
-
चुनावी होड़: चुनाव से पहले मुफ्त बिजली, पानी, अनाज, साइकिल और स्मार्टफोन देने की होड़ लगी रहती है।
-
बढ़ता कर्ज: राजकोषीय घाटे के दौरान ऐसी घोषणाओं से राज्य का कर्ज बढ़ता है, जिससे या तो टैक्स बढ़ता है या विकास के लिए धन कम हो जाता है।
Supreme Court News: सुनियोजित नीतियों की आवश्यकता
न्यायालय ने मुफ्त उपहारों के स्थान पर स्थायी सुधारों का सुझाव दिया है:
-
रोजगार सृजन: मुफ्त योजनाओं के बजाय रोजगार सृजन और कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए।
-
बुनियादी ढांचा: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जैसे उपाय दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद होते हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट की यह फटकार ऐसे समय में आई है जब कई राज्यों में चुनाव का माहौल है। अब देखना यह होगा कि इस सख्त टिप्पणी का राजनीतिक दलों के चुनावी वादों पर क्या असर पड़ता है।
read more here